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संभल में बुलडोजर से मस्जिद और मैरिज हॉल पर कार्रवाई

संभल।

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ओवैसी ने जताई नाराज़गी

संभल।  संभल ज़िले के राया बुज़ुर्ग गांव में गुरुवार सुबह दशहरे के दिन प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। यहां एक मैरिज हॉल और उसके बगल में बनी मस्जिद को अवैध निर्माण बताते हुए गिराने की प्रक्रिया शुरू की गई। जिला प्रशासन का कहना है कि दोनों निर्माण तालाब की जमीन पर किए गए थे, इसलिए इन्हें हटाना ज़रूरी है। इस दौरान भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई तथा पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया।

प्रशासन की कार्रवाई-

प्रशासन के अनुसार, करीब 30,000 वर्ग फीट में फैला मैरिज हॉल और 550 वर्ग फीट में बनी मस्जिद तालाब की ज़मीन पर कब्ज़ा करके बनाए गए थे। पहले चरण में मैरिज हॉल को बुलडोजर से गिराया गया। इसके बाद मस्जिद को भी ध्वस्त किया जाना था। इस दौरान जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई मौके पर मौजूद रहे। कार्रवाई की गंभीरता को देखते हुए 200 पुलिसकर्मी और पीएसी जवान तैनात किए गए। साथ ही, ड्रोन से भी निगरानी रखी गई ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों की अपील और प्रतिक्रिया-

जब बुलडोजर मस्जिद की तरफ बढ़ा तो स्थानीय लोग आगे आए और प्रशासन से चार दिन का समय मांगा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं ही मस्जिद को ढहा देंगे। जिलाधिकारी से अनुमति मिलते ही ग्रामीणों ने खुद ही मस्जिद तोड़ने का काम शुरू कर दिया। इससे यह साफ हो गया कि स्थिति को टकराव से बचाने के लिए प्रशासन और लोगों के बीच बातचीत का रास्ता निकाला गया।

ओवैसी की प्रतिक्रिया-

इसी बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई पर नाराज़गी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखा कि यह बुलडोजर से जुल्म किया जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन नहीं किया जा रहा। ओवैसी का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई कानून और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

कानूनी और सामाजिक पहलू-

बुलडोजर कार्रवाई को लेकर लगातार यह सवाल उठता रहा है कि क्या प्रशासन इस तरह की कार्रवाइयों में कानूनी प्रक्रिया का पूरा पालन करता है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है कि किसी भी अवैध निर्माण को गिराने से पहले उचित नोटिस और समय दिया जाना चाहिए। हालांकि, संभल प्रशासन का दावा है कि इस मामले में पहले से ही नोटिस जारी किए गए थे और यह ज़मीन सरकारी रिकॉर्ड में तालाब की ज़मीन दर्ज है।

संभल की यह घटना फिर से देशभर में बुलडोजर राजनीति पर बहस को तेज़ कर देगी। एक तरफ प्रशासन का कहना है कि सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर इसे धार्मिक भावनाओं और समुदाय विशेष से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का स्वयं मस्जिद तोड़ने का कदम यह दिखाता है कि टकराव की स्थिति टालने की कोशिश हुई।

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