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मेरठ में शहर काज़ी के लिए भाजपा नेता जितेंद्र सिंह ने पेश की दावेदारी!

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  • शहर काज़ी की कुर्सी का नहीं थम रहा विवाद
प्रोफेसर जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी

मेरठ, (रॉयल पत्रिका)। उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ में शहर काज़ी का जो तमाशा चल रहा है, उसे देखकर लगता है कि कुछ लोग अपनी-अपनी कुर्सी की लड़ाई में मज़हबी स्थानों को भी अखाड़ा बनाने पर तुले हैं। रमज़ान का पाक महीना चल रहा है, जो शांति, एकता, इबादत और आपसी भाईचारे का वक्त होना चाहिए, लेकिन यहां तो पगड़ियों की होड़ और शोर-शराबे ने सारी सुकून की हवा निकाल दी है। एक तरफ प्रोफेसर जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी के बेटे डॉ. जैनुल सालिकीन को अगला काज़ी बनाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ कारी शफीकुर्रहमान अपनी 42 साल की तालीम का दम भरते हुए मैदान में हैं। दोनों के समर्थक मस्जिदों में जाकर शोर मचा रहे हैं, मानो ये कोई धार्मिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सत्ता का खेल हो। इस सबके बीच मौका देखकर बीजेपी नेता जितेंद्र सिंह भी मैदान में कूद पड़े हैं। जब लोग आपस में ही उलझे हुए हैं, तो जितेंद्र सिंह ने भी सोचा, क्यों न वह भी अपनी किस्मत आजमा लें? उन्होंने सरकार से मांग कर दी कि मैं शरिया जानता हूं, सुन्नतों पर चलता हूं, मुझे काज़ी बनाओ, अमन-चैन लाऊंगा।” अब ये तो वही बात हुई कि आपस में लड़ाई चल रही हो और कोई तीसरा आकर मलाई ले जाए। मेरठ के मुसलमानों का एक पक्ष कहता कि हमारी 25वीं पीढ़ी इस पद पर रही, इसलिए इस पर हमारा हक़ है तो वही दूसरा पक्ष बताता है कि हमारा तजुर्बा 42 साल का है। इसलिए इस कुर्सी के लिए हम सबसे बेहतर हैं। ये काज़ी का पद है या कोई टीवी शो का ख़िताब, जिसके लिए ऑडिशन चल रहा है? ऊपर से प्रदर्शन, नारेबाजी और पुलिस पर इल्जाम लगता है इस पाक महीने में चैन सुकून से ज्यादा शोर मचाना जरूरी हो गया है। मज़हब और आस्था के नाम पर ये जो अखाड़ा बनाया जा रहा है, उससे न तो किसी का भला होगा, न ही समाज की तरक्की। ये नसीहत किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि हर उस शख्स के लिए है जो अपने झगड़ों में इतना उलझ जाए कि अपनी जमीन दूसरों के हवाले कर दे।

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