भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों के जरिए मुसलमान के वोट तो लेना चाहती है लेकिन उनको अधिकार कुछ नहीं देना चाहती
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भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के किसी भी पदाधिकारी की अल्पसंख्यक आयोग, बोर्ड एवं कमेटियों में नहीं की गई है नियुक्ति
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भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के पदाधिकारी मुस्लिम समाज के लोगों के सरकार और सरकारी दफ्तरों में कोई काम नहीं करवा सकते हैं, उन्हें सरकार में बैठे मंत्री और अधिकारी कोई तवज्जो नहीं देते हैं
जयपुर। (रॉयल पत्रिका)| अभी हाल ही में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के स्टेट पदाधिकारी की बैठक हुई जिसमें मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी भी शामिल थे । भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी और प्रदेश अध्यक्ष हमीद मेवाती ने कार्यकर्ताओं से मुसलमानो में भाजपा को मजबूत करने और प्रदेश एवं केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने का आह्वान किया । पदाधिकारियों ने प्रदेश के उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों को जीताने के लिए मुसलमानो में मेहनत करने के लिए कार्यकर्ताओं से कहा । भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता और कुछ मुस्लिम अधिकारी और कर्मचारी मेहनती हैं, अच्छी सोच रखते हैं । लेकिन भाजपा पार्टी में और सरकार में उनके पास कोई अधिकार नहीं है । मोर्चा के पदाधिकारी मुस्लिम समाज के लोगों के काम के लिए दबाव नहीं बना पाते हैं और ना ही मुस्लिम समाज के लिए भाजपा सरकार द्वारा चलाई गई कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बता पाते हैं। क्योंकि एसी एक भी योजना नहीं है जिससे मुसलमानों का भला हो सके ऐसे में मुस्लिम समाज बीजेपी से कैसे जुड़ सकता है । मोर्चा के पदाधिकारी की बात क्यों माने । भाजपा और संघ के नेताओं के भड़काऊ भाषणों और पूर्व केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा केंद्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों की कई योजनाओं को बंद करने और विभाग का बजट कम करने को लेकर देश के अल्पसंख्यक पहले से नाराज हैं ।
भाजपा को क्यों वोट दें मुसलमान ?
मुस्लिम वर्ग के काफी लोग भाजपा से जुड़ना चाहते हैं क्योंकि उनकी सोच है कि मुस्लिम वर्ग के साथ राजनीतिक पक्षपात का दौर बंद होना चाहिए । मुसलमान भी देश के विकास में बराबर के भागीदार बनना चाहते हैं, लेकिन कोई भी राजनीतिक दल मुसलमान को बराबरी का दर्जा नहीं देना चाहता है । सभी दल मुसलमान को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं । देश में लोकसभा में इंडिया गठबंधन काफी मजबूत हुआ है । इंडिया गठबंधन की मजबूती में मुसलमानो का बड़ा योगदान है । फिर भी इंडिया गठबंधन के दल कोई मजबूत मुस्लिम नेता नहीं चाहते हैं । भाजपा तो देश में मुसलमानो के विरोध में हवा बनाकर चुनाव लड़ती है और विधायक एवं सांसद के लिए मुसलमानो को टिकट नहीं देती है । ऐसे में भाजपा की ओर मुसलमान कैसे आकर्षित हो । भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा में पदाधिकारियों को भी सरकार में ना तो अच्छी नियुक्ति देती है और ना ही मुसलमान के काम करने के लिए उनको अधिकार देती है । यदि भाजपा की टॉप लीडरशिप पार्टी को मजबूत करने की सोच रखती है तो भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों को अधिकार और ताकत दोनों देनी होगी । अल्पसंख्यक वर्ग के बोर्ड, निगम और कमेटियों के अलावा उनको ताकतवर बनाने के लिए भाजपा सरकार में नियुक्तियां देनी होगी। बिना मुसलमानो के विकास और कल्याण की सोच के भाजपा मुसलमानो के वोट नहीं ले सकती है ।
मुसलमानों की राजनीतिक ताकत
देश में मुसलमान 15% जनसंख्या के साथ सबसे बड़ा अल्पसंख्यक वर्ग है । कई प्रदेशों में तो मुसलमान की जनसंख्या 35% तक है । मुसलमान यदि यह सोच लें कि उसे किसी राजनीतिक दल को नुकसान करना है तो नुकसान हो जाता है । यही कारण है कि 400 प्लस का नारा देने वाली भाजपा लोकसभा चुनाव 2024 में 240 पर ही सिमट गई । भाजपा ने भी बिना मुसलमानो के देश में राजनीति करने का कीर्तिमान बना दिया है । इंडिया गठबंधन के दल जिनके पास ज्यादा कुछ करने के लिए नहीं है । लेकिन भाजपा विरोध के चलते उन्हें मुसलमानो का भरपूर समर्थन मिल गया । जबकि देश में कोई भी राजनीतिक पार्टी और धर्म जाति एवं वर्ग के लोग एक दूसरे के लिए अछूत नहीं होने चाहिए । देश के विकास और मजबूती के लिए सबका साथ और सबका विकास की थीम पर काम करना चाहिए ।
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