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कुदरत की ख़ूबसूरती: अल्लाह की नेअमत

जयपुर

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कुदरत की ख़ूबसूरती इंसान के लिए अल्लाह तआला की सबसे अज़ीम नेअमतों में से एक है। अल्लाह ने इस कायनात को न सिर्फ़ हमारे जिस्मानी वजूद के लिए, बल्कि हमारी रूही और ज़हनी सुकून के लिए भी पैदा किया है। अल्लाह की हर तख़लीक़ में एक ऐसी हुस्न व खूबसूरती है जो किसी भी इंसानी बनाई हुई चीज़ से बेहतर और बेनज़ीर है। यह अल्लाह की मर्ज़ी है कि इस दुनिया में इंसान की ज़िंदगी यादगार बने। ताकि इंसान अल्लाह का शुक्र अदा करे और उसके आगे आज़िज़ी के साथ झुके। अल्लाह की हर तख़लीक़ इस बात का सबूत है कि अल्लाह को ख़ूबसूरती पसंद है और वह चाहता है कि हम भी इस ख़ूबसूरती की अहमियत को समझें। चलती हुई नदियाँ, आसमान का नीलापन, समंदरों की गहराइयाँ, ऊँचे पहाड़, उड़ते परिंदे, समंदर की मख़लूक़ात, जंगलों की रहस्यमयी दुनिया, सूखा रेगिस्तान और उसकी गोद में छुपे हुए हरियाली के चश्मे,  यह सब इंसान के दिल को सुकून देने के लिए हैं। जहाँ भी इंसान अपनी निगाहें घुमाता है, वहां उसे कुदरत की हुस्न-ओ-जमाल की झलक दिखती है। अगर ये दिलकश मंजर न होते, तो इंसान की ज़िंदगी बेजान और फीकी होती।

सूरज का निकलना और फूलों का खिलना

सोचिए, जब सूरज सुबह के वक़्त अपने सुनहरी रंगों के साथ आसमान में निकलता है, तो कैसे पूरी कायनात में ताज़गी भर देता है। उसका नूर हमें न सिर्फ़ उठाता है, बल्कि हमारे अंदर एक नई जान डाल देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त का मंजर लाखों लोगों को पहाड़ों और समंदर के किनारे खींच लाता है। सिर्फ़ इसलिए कि वो इन नज़ारों को देख कर अपने परेशान दिलों को सुकून दें। सूरज के साथ ही तरह-तरह के फूल खिलते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि इतने रंग-बिरंगे फूल क्यों हैं? ये सुर्ख़, पीले, नारंगी, सुनहरे और बैंगनी रंग के फूल — गुलाब, चमेली, ऑर्किड, मैगनोलिया — क्या ये बेमक़सद उग आए हैं? जंगलों और रेगिस्तानों में भी जंगली फूल मुसाफ़िरों को रौशनी और ज़िंदगी का अहसास देते हैं।

क़ुदरत से मिली राहत और शुक्रगुज़ारी

क्या इंसान को अपने इर्द-गिर्द मौजूद इन हसीन साथियों से ख़ुशी नहीं मिलती? क्या उसे अपने रब का शुक्र अदा नहीं करना चाहिए जिसने ये सब बे-हिसाब नेअमतें बग़ैर किसी कीमत के अता कीं?

जरा सोचिए, अगर दुनिया में दरख़्त और पौधे न होते तो क्या होता? अल्लाह ही है जिसने इस हरियाली को दुनिया के कोने-कोने में फैला दिया — छोटे-छोटे झाड़ियों से लेकर बड़े-बड़े दरख़्तों तक। ये हमें न सिर्फ़ खाना और छाँव देते हैं, बल्कि आँखों को सुकून देने वाला मंजर भी देते हैं। ज़रा सोचिए अगर हर तरफ़ सिर्फ़ भूरापन होता और हरियाली न होती तो कैसी होती ज़िंदगी?मगर अफ़सोस की बात है कि आज का इंसान इतना खुदगर्ज़ और लापरवाह हो गया है कि वो इन्हीं नेअमतों को काटता और तबाह करता जा रहा है। क्या वह खुद अपनी तबाही की तरफ़ नहीं बढ़ रहा?

परिंदे और रंग-बिरंगे मख़लूक़ात

परिंदे, मधुमक्खियाँ, तितलियाँ और दूसरी मख़लूक़ात हमारे माहौल को और भी खूबसूरत बनाते हैं। सोचिए, अल्लाह ने इतने रंग-बिरंगे और हसीन परिंदे क्यों बनाए? अगर आप कभी किसी पक्षी उद्यान जाएँ, तो समझ में आएगा कि अल्लाह ने इंसान की सौंदर्य की चाहत को पूरा करने के लिए कितनी नाज़ुक और खूबसूरत चीज़ें बनाई हैं। ये परिंदे इतने अच्छे तालमेल और रंगों की तासीर के साथ बनाए गए हैं कि इंसान को यकीन आ जाए कि अल्लाह वाक़ई रहमतों वाला और मेहरबान है। जानवर, चाहे छोटे हों या बड़े, हमारी कायनात को और भी रोशन कर देते हैं। क्या आपने कभी सोचा कि ज़मीन पर घूमते ये विशाल हाथी और समंदर में तैरते विशाल व्हेल किसने बनाए? क्या वो अल्लाह के तख़लीक़ी अजूबे नहीं हैं?

पानी और समंदर

हमारे पास मौजूद पानी के ज़राए, नदियाँ, झरने और समंदर ये सिर्फ़ ज़रूरत की चीज़ें नहीं, बल्कि सुकून और हुस्न का ज़रिया भी हैं। झरनों की रवानगी इंसान के दिल को तसल्ली देती है। नीला समंदर और बहती नदियाँ अपने आप में एक हुस्न की मिसाल हैं। समंदर की लहरों को घंटों तक देखा जा सकता है।  जैसे अल्लाह ने इनसे अपने हुस्न की झलक दुनिया को दी हो।

क़ुरआन की नसीहत

अल्लाह ने क़ुरआन में इरशाद फ़रमाया:

बेशक आसमानों और ज़मीन की तख़लीक़ में और रात-दिन के आने-जाने में अक़्लमंद लोगों के लिए निशानियाँ हैं।
(क़ुरआन 3:190)

यानी जो लोग अक़्ल और दिल से सोचते हैं, वो इन तमाम नेअमतों में अल्लाह की कुदरत को पहचानते हैं। सोचिए अगर यह दुनिया एक रंगहीन, सूखा, बेजान रेगिस्तान होती तो क्या हम ऐसी कोई बात पढ़ रहे होते? क्या हम इतना सुकून पा रहे होते? अल्लाह ने इस कायनात को हमारे लिए नायाब हुस्न और सुकून का ज़रिया बनाया है और यह हम पर फ़र्ज़ है कि हम इस नेअमत की कद्र करें, इसका हिफ़ाज़त करें और अपने रब का शुक्र अदा करें।

 

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