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कहीं चमक-दमक में न खो जाए बाबा साहेब के विचार

Jaipur

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डॉ. श्याम सुन्दर बैरवा,

भीलवाड़ा

मेरे एक घनिष्ठ के मोबाइल की कॉलर ट्यून है-

जिसको देखो वही भीम पे निसार है, जिसको देखो वही भीम पे निसार है, बाबा साहेब अम्बेडकर की जय जयकार है।और आजकल का सबसे चर्चित मुद्दा बाबा साहेब पर अमित शाह की टिप्पणी है- “यह फैशनेबल हो गया है, आम्बेडकर, आम्बेडकर, आम्बेडकर, आम्बेडकर, आम्बेडकर…… अगर आपने इतनी बार भगवान का नाम लिया होता तो सात जन्मों के लिए स्वर्ग चले जाते।”  यह तो निश्चित है कि विगत दो-तीन दशकों में बाबा साहेब का नाम बढ़ा है, प्रचार-प्रसार बढ़ा है और 14 अप्रेल तथा 6 दिसम्बर को निकलने वाली रैलियों और जुलूसों में लोगों की संख्या और जुलूसों की संख्या भी बढ़ी है। नये-नये कार्यक्रम होने लगे हैं। लेकिन यह भी गौर करने की बात है कि उनके द्वारा लिखित संविधान भी खतरे में पड़ता जा रहा है, क्योंकि संविधान विरोधी ताकतों ने भी बहुत सिर उठाया हुआ है। मनुवादी मनुस्मृति लागू करना चाहते हैं और धीरे-धीरे संविधान को समाप्त करना चाहते हैं।

इस देश में लोकतन्त्र चाहने वालों, दलित, बहुजन और बाबा साहेब के समर्थक हर इंसान का यह कर्तव्य है कि वह बाबा साहेब को माला पहनायें या न पहनायें, उन्हें पुष्प अर्पित करें या न करें, उनकी मूर्तियाँ लगायें या न लगायें, लेकिन उनके विचारों को अवश्य पढ़ें, उनको समझें और उन पर अमल करें। संविधान की मूल भावनाओं को बरकरार रखें और मनुस्मृति को संविधान का स्थान लेने से रोकें। ऐसा न हो कि दलित, बहुजन और प्रजातान्त्रिक मूल्यों को चाहने वाले संविधान पार्कों में लगी बाबा साहेब की शानदार, चमचमाती मूर्तियों को देख कर भाव-विभोर और आत्मानन्दित होते रहें और दूसरी तरफ संविधान में संशोधन पर संशोधन होते रहें और संविधान की मूल भावना ही समाप्त हो जाये और यह देश पूँजीपतियों, बाहुबलियों और साम्प्रदायिक ताकतों का गुलाम हो जाये, संविधान और देश का नक्शा ही बदल जाये, प्रजातन्त्र राजतन्त्र में बदल जाये और देश का साम्प्रदायिक सद्भाव समाप्त हो जाये। आज जगह-जगह अनेकानेक महापुरुषों की मूर्तियाँ लगी हुई हैं, लेकिन उनके विचारों को लोग कितना मानते हैं ? ठीक इसी प्रकार ऐसा न हो कि हर गाँव और हर कस्बे में बाबा साहेब की प्रतिमा तो हो लेकिन उनके विचारों को मानने वाला कोई न हो। अतः बाबा साहेब को भगवान बनाने से बचाना होगा। मूर्तियों के बजाय उनके विचारों को प्राथमिकता देनी होगी, तभी संविधान भी बचेगा और देश भी।

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