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ऑटो चालक यूनियन ने परिवहन विभाग को सौंपा ज्ञापन

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मॉडल कंडीशन ऑटो व ई-रिक्शा पर जताई आपत्ति

जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। राजधानी जयपुर में समस्त ऑटो चालक यूनियन संघर्ष समिति ने शनिवार को परिवहन आयुक्त जयपुर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें ऑटो चालकों की प्रमुख समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखते हुए समाधान की मांग की गई। ज्ञापन में यूनियन प्रतिनिधियों ने सबसे पहले शहर में मॉडल कंडीशन में आए नए ऑटो रिक्शा नियमों पर आपत्ति जताते हुए बताया कि इससे पहले से ऑटो चला रहे कई गरीब चालक बेरोजगारी की कगार पर पहुंच गए हैं। यूनियन ने मांग की है कि सीएनजी (CNG) ऑटो रिक्शा परमिट खोले जाएं, ताकि नए परमिट मिलने से चालक ऑटो खरीदकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें। साथ ही, परमिट की सीमा को नगर निगम से बढ़ाकर जेडीए क्षेत्र तक लागू करने की मांग की गई। दूसरा मुद्दा अनाधिकृत ई-रिक्शा को लेकर उठाया गया। यूनियन का कहना है कि जयपुर में बिना अनुमति के चल रहे ई-रिक्शा नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। यूनियन ने मांग की कि ई-रिक्शाओं को नियमानुसार चलाया जाए और चारदीवारी व मुख्य मार्गों पर इन्हें प्रतिबंधित किया जाए, जिससे पारंपरिक ऑटो चालकों की रोजी-रोटी पर असर न पड़े। इसके अतिरिक्त यूनियन ने ऑटो स्टैंडों की स्थिति पर भी चिंता जताई। ज्ञापन में सुझाव दिया गया कि शहर भर के ऑटो स्टैंडों का सर्वे कराकर गजट नोटिफिकेशन कराया जाए, ताकि स्टैंडों की कानूनी मान्यता और व्यवस्था स्पष्ट हो सके। दुकानदारों द्वारा ऑटो स्टैंड पर किए जा रहे अतिक्रमण को भी हटवाने की मांग की गई है। यूनियन का कहना है कि कई स्टैंडों पर स्थानीय व्यापारियों द्वारा अतिक्रमण कर दिया गया है, जिससे ऑटो चालकों को खड़ा होने की जगह नहीं मिल रही। यूनियन ने यह भी कहा कि जिन स्टैंडों की सूची परिवहन विभाग व यातायात विभाग को दी जा चुकी है, उनका भी गजट नोटिफिकेशन किया जाए, और यातायात पुलिस द्वारा उन स्टैंडों पर सूचना बोर्ड लगाए जाएं। ज्ञापन की प्रतियां पुलिस आयुक्त जयपुर, यातायात पुलिस उपायुक्त और प्रादेशिक परिवहन अधिकारी झालाना को भी भेजी गई हैं। ज्ञापन पर यूनियन के प्रमुख अध्यक्षगणों के हस्ताक्षर रहे, जिनमें अमर सिंह चौहान, बाबू भाई, मुराद खान मलवान, उमराव कुरैशी, फूलचंद गुर्जर और कुलदीप सिंह शामिल थे। ऑटो चालक यूनियन ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे संघर्ष और आंदोलन के रास्ते पर भी जा सकते हैं।

 

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