बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार बढ़े
बांग्लादेश के हालात बदलते जा रहे हैं। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर अत्याचारों में इजाफा हुआ है। हिंदू, बौद्ध और ईसाइयों के घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानो, मंदिरों आदि पर हमले हुए हैं। प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्ता पलट से पहले बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ समानता का व्यवहार देखने को मिलता था। लेकिन प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े हैं और दर्जनों हिंदुओं की हत्या भी कर दी गई है। बांग्लादेश पुलिस ने शनिवार 11 जनवरी 2024 को अगस्त 2024 से दिसंबर 2024 के बीच हुए हमलो की रिपोर्ट जारी की। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि इस दौरान हुए ज्यादातर हमले सांप्रदायिक नहीं बल्कि राजनीति से प्रेरित थे। बांग्लादेश में जल्द ही आम चुनाव होंगे। बांग्लादेश की कुछ पार्टियां सांप्रदायिक व्यवहार करती है। बांग्लादेश की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी को अपने पक्ष में करने के लिए और चुनाव जीतने के लिए यह राजनीतिक दल बांग्लादेशी जनता को ध्रुवीकरण करके बांटने का कार्य कर रहे हैं। चुनाव जीतने के लिए बांग्लादेश में कुछ राजनीतिक दल जनता को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक वगों में बांटने पर तुले हुए हैं, उनके बीच नफरत फैला रहें हैं एक दूसरे पर हमले करवा रहे हैं। बांग्लादेश में आम चुनाव जीतने के लिए नफरत की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। राजनीति में ऐसे दलों को सिर्फ सरकार की बागडोर संभालने की इच्छा होती है। बांग्लादेश 1972 में भारत की सैन्य सहायता से पाकिस्तान से अलग हुआ था। जब से लेकर ही बांग्लादेश भारत के ऊपर काफी हद तक निर्भर था। देश में कांग्रेस शासन के समय बांग्लादेश को अपने साथ बनाए रखने के लिए पूरा ध्यान दिया। बांग्लादेश के अंदरूनी मामलों की पूरी जानकारी रखी। लेकिन 2014 में भारत में भाजपा की सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी। 2014 के बाद भारत में भी ज्यादातर चुनाव सांप्रदायिक आधार पर ही लड़े गए। भाजपा ने बहुसंख्यकों के समर्थन से लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीते हैं। लेकिन इस दौरान अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े, मॉब लिचिंग के मामले सामने आये और मस्जिदो, दरगाहों के परिसरों में शिव मंदिरों को खोजने की कोशिश शुरू हुई। भारत में आम जनता सांप्रदायिक नहीं है लेकिन राजनीति ने जनता को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की है। जब ऐसे साम्प्रदायिक दल सत्ता में आ जाते हैं तो देश की तरक्की रुक जाती है। देश आर्थिक रूप से बिछड़ने लगाता है। देश के बच्चों की शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता है, रोजगार के संसाधन कम होने लगता है। देश के शासन को कानून को जगह मनमानी से चलाने की कोशिश की जाती है, सरकारी भर्तियों, ऑफिसो में एवं सार्वजनिक स्थानों में पक्षपात दिखाई देने लगता है। इसलिए कहा जा सकता है कि बांग्लादेश में सांप्रदायिक आचरण ना तो बांग्लादेश के लिए फायदेमंद है और ना ही पड़ोसी देश भारत के लिए फायदेमंद है।
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