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सेना, संविधान, तिरंगा, मुसलमान और भाजपा के नेताओं का रवैया

Jaipur

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सेना, संविधान, तिरंगा और मुसलमानों के प्रति भाजपा नेताओं का रवैया कभी नफ़रत भरा होता है तो कभी-हिक़ारत का होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इनका राष्ट्रवाद सिर्फ़ दिखावे का होता है। मुसलमानों के प्रति तो भाजपा और संघ का रवैया आजादी से पहले से ही नफरहत भरा है। संघ के दूसरे संघ प्रमुख गुरु गोवालकर ने अपनी प्रतिबंधित पुस्तक ‘द बंच ऑफ थॉट्स’ में साफ कर दिया था कि उनके हिंदू राष्ट्र में मुसलमान रह जरूर सकते हैं। लेकिन उनको नागरिक के रूप में कोई अधिकार नहीं होगा। यानि मुसलमानों को वोट डालने का भी अधिकार नहीं होगा। यह अलग बात है कि देश के बहुसंख्यक हिंदू समुदाय ने उनकी इस नफरत भरी सोच को ख़ारिज कर दिया था। और उनका संगठन आज भी भारत को हिंदू राष्ट्र नहीं बना पाया और आज भी भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाये हुए है। लेकिन हाल ही में हुई कुछ घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि देश में मुसलमानों का होना ही अपने आप में एक गुनाह है। अभी हाल ही में भारत की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था और वह संघर्ष विराम के लिए गिड-गिड़ा ने लगा था। सेना के इस अद्तितीय पराक्रम को देश के सामने प्रस्तुत करने के लिए सेना ने एक मुस्लिम अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी और एक दलित अधिकारी विंग कमांडर व्यामिका सिंह को चुना। इन दोनों ही महिला अधिकारियों ने सेना के पराक्रम को देश के सामने रखा और कर्तव्य को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से पूरा किया। लेकिन कर्नल सोफिया कुरैशी का अचानक देश का हीरो बन जाना भाजपा के नफ़रती नेताओं को हजम नहीं हुआ और मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बता दिया। उसके बाद जबलपुर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया। कोर्ट के आदेश के बाद भी बहुत कमजोर सी एफआईआर दर्ज की गई। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री को कड़ी फटकार लगाई और पूरे मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया। इतना कुछ होने के बाद भी भाजपा नेतृत्व ने विजयशाह को मंत्री पद से नहीं हटाया। और यह व्यक्ति आज भी मंत्री बना हुआ है। यह अलग बात है कि बाद में पाकिस्तान के लिए जासूसी करते पकड़ी गई ज्योति महलोत्रा ​​आतंकियों की बहन के तौर  पर सामने आयी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए जितने भी लोग गिरफ्तार हुए उनमें एक भी व्यक्ति मुस्लिम समुदाय से नहीं है।

मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने तो भारतीय सेना के अपमान में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कह दिया कि भारत की सेना प्रधानमंत्री मोदी जी के चरणों में नतमस्तक हैं। उप मुख्यमंत्री को शायद यह नहीं पता है  कि देश की सेना की निष्ठा देश के प्रति होती है। देश के संविधान के प्रति होती हैं। और भारतीय सेना का सर्वोच्च कमांडर देश का राष्ट्रपति होता हैं। देश की सेना किसी भी प्रधानमंत्री की बपौती नहीं होती हैं। जो किसी भी प्रधानमंत्री के चरणों में नतमस्तक होगी। लेकिन भाजपा के नेता ने हमेशा से सेना के पराक्रम का इस्तेमाल अपने लिए वोट हासिल करने में करती रहीं हैं। पठानकोट हमले के बाद जब भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान में अंदर घुसकर बालाकोट में एयर स्ट्राइक की तो मोदी जी ने 2019 के लोक सभा के चुनावों में सेना के नाम पर खुलकर वोट मांगे। अभी भी भाजपा ऑपरेशन सिंदूर में सेना की सफलता से बिहार का चुनाव जीतना चाहती हैं। और इसके लिए पूरे देश में तिरंगा यात्राऐं निकाल रही हैं। यह अलग बात है कि संघ जो कि भाजपा का पितृ संगठन है, उसने कभी भी तिरंगा का सम्मान नहीं किया। जब संविधान सभा ने तिरंगे को राष्ट्र ध्वज के रूप में स्वीकार किया तो संघ ने तीनों रंगों के ध्वज को देश के लिए अपशुकन बताया और बहुत विरोध किया। लेकिन संविधान सभा ने इनकी एक भी नहीं सुनी और तिरंगे को राष्ट्र ध्वज के रूप में स्वीकार किया। इसका नतीजा यह हुआ कि लगभग 52 साल तक संघ अपने मुख्यालय पर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर कभी भी तिरंगे को नहीं फहराया। लेकिन जब संघ पर सवाल उठने लगे तो जन दबाव में उन्होंने तिरंगा फहराना शुरू किया हैं। अभी जयपुर निकली तिरंगा यात्रा में भाजपा के एक विधायक तिरंगे से अपनी नाक साफ कर रहा हैं। और इसका वीडियो पूरे देश में वायरल हुआ और पूरे देश ने देखा कि कैसे भाजपा के विधायक ने तिरंगा का अपमान किया और इसमें सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आज तक पुलिस प्रशासन ने उस विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की हैं। अब जरा कल्पना कीजिये की कोई मुस्लिम विधायक तिरंगा के साथ ऐसी हरकत कर देता तो देश का पूरा मीडिया उस मुस्लिम विधायक की सात पुश्तों को पाकिस्तानी घोषित कर चुका होता ।चलिये कुछ और घटनाओं से समझते है कि कैसे मुसलमान होने की उनको सजा मिल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ठ निर्देश है कि बिना दूसरे पक्ष को सुने उसके घरों को बुलडोजर नहीं चलाया जा सकता हैं। लेकिन उसके बावजूद उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने सैकण्ड़ों मदरसों को अवैध बताते हुए बुलडोजर से जमींदोज कर दिया हैं। जबकि उसी उत्तराखण्ड में सैकण्ड़ों मंदिर अवैध तरीके से सरकारी जमीनों पर कब्जा बनाये हुए हैं। लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती हैं। ऐसे ही पूरी दुनिया को पता है कि मायंम्मर में रोहिंग्या मुसलमानों का नरंसहार हो रहा हैं। ऐसे हालत में कुछ रोहिंग्या वैध कुछ अवैध तरीके से भारत में आ गये। देश का संविधान यह कहता है कि कोई वैध तरीके से आया हो या अवैध तरीके से आया हो। व्यक्ति के रूप में उसके जीवन को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सरकार की होती हैं। लेकिन हाल ही में सूत्रों से बाहर से आयी खबर से यह तथ्य सामने आया कि कुछ रोहिंग्या मुसलमानों को मरने के लिए समुद्र में फेंक दिया गया तो कुछ को मरने के लिए मयंम्मार की सीमा पर फेंक दिया गया।

गुजरात के अहमदाबाद में तो भारत के ही बंगाली मुसलमानों की बस्ती को बांग्लादेशियों की बस्ती-बताकर लगभग आठ हज़ार मकानों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। ऐसा ही राजस्थान में भी हुआ। बंगाल के बंगला भाषी मुसलमानों को बांगलादेशी बताकर गिरफ्तार किया गया और फिर उनको डिटेंशन कैंप में डाल दिया गया। जबकि  उनके पास भारत के नागरिक होने के पर्याप्त सबूत मौजूद थे। इन सारी घटनाओं के विश्लेषण से आप समझ सकते है कि भाजपा नेताओं से ना संविधान, तिरंगा और देश के मुसलमानों के प्रति कैसा रवैया हैं।

                                                                                  डॉ॰ एस खान

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