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क्या सभी अल्पसंख्यक वर्गों को डराया जा रहा है?

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मुंबई के विले पार्ले में पार्शवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पर बुलडोजर चलाए जाने की विरोध में जैन समुदाय के लोगों ने शनिवार को मोर्चा निकाला। इस विरोध प्रदर्शन में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड़ भी शामिल हुई। बीएमसी ने अवैध निर्माण बता कर बुधवार को 90 साल पुराने इस मंदिर को ढहा दिया था। जैन समाज देश में एक धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग है। जनसंख्या कम होने के बावजूद जैन अल्पसंख्यक वर्ग आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से देश का शक्तिशाली वर्ग है। देश में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में जैनियों का बड़ा योगदान है। देश के गृहमंत्री अमित शाह स्वयं जैन समाज से हैं। जैन समाज देश में सबसे सशक्त व्यापारी वर्ग है। जैन समाज का ज्यादातर आर्थिक संसाधनों पर कब्ज़ा है। जैन समाज के लोग सरकार के उच्च पदों पर जैसे आईएएस, आईपीएस पदों पर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। जैन समाज देश का एकमात्र ऐसा वर्ग है जिसके विधायक सांसद जनसंख्या के प्रतिशत से कहीं ज्यादा जीतकर आते हैं। राजस्थान की गहलोत सरकार में शांति धारीवाल और प्रमोद जैन भाया कैबिनेट मंत्री थे। भाजपा को मजबूत बनाने में तो जैन समाज का काफी योगदान है। ऐसी स्थिति में देश के कई भागों से   खबरें आती रहती है कि जैन समुदाय का मंदिर तोड़ दिया गया। आश्चर्य की बात यह है कि यह सब भाजपा की सरकार में हो रहा है। क्या अब यह सोचा जाए कि भाजपा धार्मिक जैन समुदाय को भी अब मुस्लिम, ईसाई एवं सिख, समुदाय की तरह देखने लगी है? क्या भाजपा जैनियों को भी हिंदू धर्म के लिए खतरा मानती है। वैसे जैन धर्म एक धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग है जो हिंदू धर्म के लोगों द्वारा बनाया गया है। जैन धर्म हिंदुओं के व्यापारी वर्ग में अपने अनुयायी लगातार बढ़ा रहा है। जैन धर्म के लोग वैसे तो हिंदू जैसे लगते हैं। लेकिन उनका धार्मिक व्यवहार हिंदुओं से बिल्कुल अलग होता है इसलिए हिंदुओं के विद्वान लोग समझते हैं कि जैन समुदाय हिंदू धर्म को कमजोर कर रहा है और करेगा। ऐसे में हिंदू धर्म के अनुयायी जैनियों पर विभिन्न प्रकार से अपना आक्रामक व्यवहार दिखाते रहते हैं। लेकिन यह भी सही है कि जैन धर्म के अनुयायी आर्थिक, राजनीतिक एवं शैक्षणिक रूप से बहुत सशक्त हैं यदि जैन वर्ग ने भाजपा को समर्थन देना बंद कर दिया तो भाजपा आर्थिक संकट में आ जाएगी। भाजपा की एकता और मजबूती नहीं बचेगी। इसलिए माना जा रहा है कि भाजपा जैन समाज को नाराज नहीं कर पाएगी। यदि ऐसा किया तो भाजपा सत्ता में नहीं रह पाएगी। देश में कुछ अल्पसंख्यक वर्ग ऐसे हैं जिनको भाजपा नाराज नहीं रख सकती है। जिनमे जैन और बोद्ध अल्पसंख्यक वर्ग हैं, सभी जानते हैं कि दोनों ही वर्ग तेजी से देश में बढ़ रहे हैं। दोनों ही वर्गों में हिंदु वर्ग से आकर जैन या बोद्ध बनते हैं। बौद्ध धर्म में ज्यादातर देश के दलित वर्ग के लोग आते हैं बोद्ध धर्म देश का सबसे बढ़ता हुआ धार्मिक अल्पसंख्यक समूह है। बौद्ध धर्म के अनुयायी या बोद्ध धर्म के लोगों के सपोर्ट के बिना बीजेपी चुनाव नहीं जीत सकती है। इसलिए भविष्य में चाहते हुए भी भाजपा की सरकारें जैन धर्म और बौद्ध धर्म के लोगों को ज्यादा नाराज नहीं रख सकती है।

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