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अंता में सियासी रण: नरेश मीणा तिपहिये पर सवार, जीत की रणनीति आखिरी दिन बनी

जयपुर

Naresh Meena leads Anta by-election 2025 as independent candidate, Congress and BJP intensify campaign in Rajasthan

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Anta by-election 2025 : जयपुर।  राजस्थान की अंता विधानसभा सीट इस बार सिर्फ एक उपचुनाव का मैदान नहीं, बल्कि सियासी प्रतिष्ठा की जंग बन गई है। निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा के इर्द-गिर्द पूरा चुनाव घूमता दिख रहा है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने आखिरी दिन पूरा जोर झोंक दिया, लेकिन जनता का रुख अब तक किसी के भी हक में साफ नहीं दिखा।

अंता उपचुनाव में नया समीकरण: नरेश मीणा बने केंद्रबिंदु

अंता का यह उपचुनाव अब सरकार बनाम नरेश मीणा की लड़ाई में बदल गया है। ना कोई पार्टी चिन्ह, ना बड़ा राजनीतिक पद-फिर भी नरेश मीणा के साथ है जनता और युवाओं का जोश। जनता की ताकत ही मेरी पार्टी है, यह नारा अब अंता की गलियों में गूंज रहा है। राजस्थान में शायद पहली बार एक निर्दलीय प्रत्याशी ने इतनी मजबूती से सत्ता और विपक्ष दोनों को चुनौती दी है।

सरकार और कांग्रेस की सियासी हलचल तेज

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन तक बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने नरेश मीणा के खिलाफ जमकर वार किए।

कांग्रेस के बड़े चेहरे अशोक गहलोत, शांति धारीवाल और प्रमोद जैन भाया तक को मैदान में उतरना पड़ा।

उधर बीजेपी के नेता भी मतदाताओं को साधने में जुटे रहे। इसके बावजूद, जनता के बीच ये चर्चा जोर पकड़ रही है कि जो जनता के बीच है, वही असली नेता है।

रोड शो से लेकर आरोप-प्रत्यारोप तक

अंतिम दिन का माहौल बिल्कुल चुनावी फिल्म जैसा रहा- रोड शो, नारों की गूंज और सोशल मीडिया पर जबरदस्त मुहिम। गहलोत ने मोरपाल सुमन पर “टाइमपास प्रत्याशी” का तंज कसा। जवाब में बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर “जनता से कटे” होने का आरोप लगाया। लेकिन भीड़ जिस दिशा में झूम रही थी, वहां नरेश मीणा का नाम सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा था।

जातीय समीकरण बनाएंगे ‘राजा’ कौन बनेगा

अंता की लड़ाई अब पूरी तरह जातीय समीकरणों पर टिक गई है। यहां करीब 2.25 लाख मतदाता हैं, जिनमें

-40,000 माली समाज

-35,000 अनुसूचित जाति (SC)

-32,000 मीणा समाज

-और करीब 25,000 माइनॉरिटी वोटर हैं।

-धाकड़, ब्राह्मण, राजपूत और अन्य समाज भी

अगर मीणा, SC-ST और माइनॉरिटी समाजों का गठजोड़ बना, तो नरेश मीणा की नैया पार लग सकती है।वरना सत्ता का पलड़ा फिर से भारी पड़ सकता है।

गहलोत बनाम नरेश: सियासत में नई कहानी

अशोक गहलोत का ‘सीएम शर्मा कुछ दिन के मेहमान हैं’ वाला बयान खूब चर्चा में रहा। राजनीतिक हलकों में इसे अंता की सियासत पर गहलोत की झुंझलाहट माना जा रहा है।क्योंकि निर्दलीय नरेश मीणा ने न सिर्फ कांग्रेस बल्कि बीजेपी को भी परेशान कर दिया है।

नतीजे से पहले जनता का मूड साफ

अभी तक जनता खुलकर किसी के पक्ष में नहीं दिखी, लेकिन युवाओं की भीड़ और गांवों की नब्ज़ कुछ और ही इशारा कर रही है। अंता में अब हर गली में चर्चा है-राजा कौन बनेगा-सरकार या जनता का बेटा? अब नजरें टिक गई हैं 16 नवंबर पर, जब तय होगा कि जनता का भरोसा किस पर ठहरता है-भाया, मोरपाल, या नरेश मीणा पर।

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