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अमेरिका अब भरोसे वाला देश नहीं रहा!

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आभास होने लगा था कि अमेरिका भरोसेमंद देश नहीं हो सकता है? एक तरफ अमेरिका दोस्ती की बात करता है और दूसरी तरफ अपने स्वार्थ और अपनी बातें मनमाने के लिए काम करता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का तो कहना ही अलग है। डोनाल्ड ट्रंप विश्व के किसी भी राष्ट्रध्यक्ष का सम्मान नहीं करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन किसी भी देश एवं उसके राष्ट्रध्यक्ष को धमकाते रहते हैं। लेकिन जब किसी देश को अमेरिका की जरूरत होती है तो अमेरिका उस देश एवं उसके शासनाध्यक्ष को ब्लैकमेल करने से नहीं चूकते है। डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उसके हिसाब से चलने और उसकी हर बात मानने के लिए धमकाया, ब्लैकमेल करने की कोशिश की। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दबाव में नहीं आए। अमेरिका भारत के दुश्मन देश पाकिस्तान का हमेशा सपोर्टर रहा है। विश्व में अमेरिका की छवि धोखेबाज देश की बनती जा रही है। ऐसी ही घटना 9 सितंबर को कतर से आई है। कतर और अमेरिका के बीच अरबों डॉलर का सुरक्षा समझौता है। कतर पर इजरायल ने लड़ाकू विमानो से आक्रमण कर दिया। अमेरिका ने इजरायल के आक्रमण का कोई जवाब नहीं दिया। जबकि अमेरिका कतर से अरबो डॉलर उसकी सुरक्षा की एवज में लेता है। कतर के साथ अमेरिका का 2014 डिफेंस कॉरपोरेशन एग्रीमेंट और 2025 में THAAD मिसाइल सिस्टम सहित 42 बिलीयन डॉलर का समझौता है। इजराइल के आक्रमण को नहीं रोकना कतर के साथ अमेरिका की गद्दारी है। अमेरिका ने अनेक देशों के साथ धोखा दिया है। अमेरिका की ताकत के सामने कोई भी देशी उसको जवाब देने की हिम्मत नहीं कर पाता है। चीन, रूस, ईरान और उत्तरी कोरिया जरूर अमेरिका की आंख में आंख डालकर बात करते हैं। यही कारण है कि विश्व के अनेक देश अमेरिका से परेशान होकर चीन, रूस गुट की तरफ आते जा रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आक्रामक ट्रैफिक नीतियों के कारण विश्व के ज्यादातर देशों को परेशान कर रखा है। विश्व में सभी देश अमेरिका से परेशान दिखाई दे रहे हैं। भारत को भी अमेरिकी टैरिफ का दबाव बनाकर झुकाने की कोशिश की गई। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की कोई चिंता नहीं की और भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के दुश्मन देश चीन और रूस से दोस्ती बढ़ा ली। रूस से सस्ता पेट्रोल खरीदना जारी रखा और चीन से सस्ता आयात शुरू कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कदम भारत को अमेरिका से मिलने वाले बड़े धोखे से बचाने में बड़ा कारगर सिद्ध हो सकता है। क्योंकि अमेरिका निश्चित रूप से भारत को ब्लैकमेल और धोखा देने वाला देश है।

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