ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने की मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात
UMEED पोर्टल पर समय सीमा बढ़ाने की मांग
वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने में आ रही तकनीकी समस्याएं
नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 11 दिसंबर, 2025 को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने में आ रही समस्याओं को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
क्या है प्रमुख समस्या?
बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि UMEED पोर्टल पर पंजीकृत वक्फ संपत्तियों को अपलोड करते समय भारी तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन दिक्कतों की वजह से लाखों संपत्तियां अभी तक अपलोड नहीं हो सकी हैं।
बोर्ड का कहना है कि वक्फ बोर्डों के पास पहले से पंजीकृत संपत्तियों को अपलोड करने की जिम्मेदारी खुद वक्फ बोर्डों की होनी चाहिए थी और इसके लिए कम से कम दो साल का समय मिलना चाहिए था। इसलिए, मांग की गई है कि जो संपत्तियां अपलोड नहीं हो सकी हैं, उनके लिए कम से कम एक वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जाए।
वक्फ अधिनियम और समय सीमा का दबाव
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को अवगत कराया कि वक्फ अधिनियम/UMEED अधिनियम में किए गए संशोधन तथा धारा 3B के तहत पोर्टल पर विवरण अपलोड करना अनिवार्य किए जाने से मुस्लिम समुदाय पर भारी दबाव है।
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कम समय: सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने के लिए निर्धारित 6 माह का समय बेहद कम था।
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तकनीकी खामियां: पोर्टल पर विवरण अपलोड करने के दौरान अनेक तकनीकी गड़बड़ियां सामने आईं, जिससे यह कार्य लगभग असंभव साबित हुआ।
राज्य वक्फ बोर्ड भी नहीं कर पाए समय पर काम
समस्या की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान वक्फ बोर्ड ने समय बढ़ाने के लिए ट्रिब्यूनल का रुख किया। ट्रिब्यूनल ने उन्हें अनुमति भी दी। यह स्पष्ट करता है कि जब स्वयं वक्फ बोर्ड 6 महीने की समय सीमा का पालन नहीं कर सके, तो मुतवल्लियों (देखरेख करने वालों) के लिए यह कितना कठिन होगा।
नोटिफिकेशन और लॉन्च की तारीख में अंतर
प्रतिनिधिमंडल ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि UMEED नियम और घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन फॉर्म) 03/07/2025 को अधिसूचित किए गए थे। जबकि पोर्टल लॉन्च की तारीख 06/06/2025 मानी जा रही है। अधिनियम के लागू होने की तारीख को पोर्टल लॉन्च की तारीख से नहीं जोड़ा जा सकता।
केंद्र सरकार के पास है अधिकार (धारा 113)
प्रतिनिधिमंडल ने याद दिलाया कि वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 113 केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में उत्पन्न कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक आदेश जारी कर सके।
अतः अनुरोध है कि प्रारंभिक 6 माह की अवधि को कम से कम एक वर्ष के लिए बढ़ाया जाए। इससे सामान्य परिस्थितियों में किसी को दोबारा ट्रिब्यूनल जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
मंत्री का आश्वासन
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को अत्यंत गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इन समस्याओं और कठिनाइयों का समाधान बहुत जल्द निकाल लिया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्य:
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सैयद सादतुल्लाह हुसैनी (उपाध्यक्ष, AIMPLB)
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मौलाना मोहम्मद फज़लुर रहीम मुजद्दिदी (महासचिव)
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बैरीस्टर असदुद्दीन ओवैसी (कार्यकारी सदस्य एवं सांसद)
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मोहम्मद अदीब (पूर्व सांसद)
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मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी (महासचिव, जमीयत उलमा-ए-हिंद)
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मुफ्ती अब्दुर रज़ीक (महासचिव, जमीयत उलमा-ए-हिंद, दिल्ली)
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एडवोकेट फ़ुज़ैल अहमद अय्यूबी, हकीम मोहम्मद ताहिर और सुश्री नबीला जमील (बोर्ड सदस्य)
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