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एम्स की हाई ब्लड प्रेशर पर हैरान कर देने वाली नई रिसर्च

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बचाव के लिए अपनाएं यह उपाय

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन सबसे आम बीमारियों में गिना जाता है। पहले इसे सिर्फ बुज़ुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 30–35 साल की उम्र में भी लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर तीसरा वयस्क ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित है। अब तक यह माना जाता था कि गलत लाइफस्टाइल, अनहेल्दी डाइट और तनाव ही इसके बड़े कारण हैं। लेकिन एम्स (AIIMS) की एक ताजा रिसर्च ने डॉक्टरों और पेशेंट्स दोनों को चौंका दिया है।

एम्स की रिसर्च में सामने आया नया कारण

एम्स (नई दिल्ली) के कार्डियोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट की स्टडी के मुताबिक, हजारों हाइपरटेंशन पेशेंट्स में हाई बीपी की असली वजह हॉर्मोनल डिसऑर्डर भी हो सकती है। इस डिसऑर्डर को कॉन सिंड्रोम (Conn’s Syndrome) या प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज़्म कहा जाता है।

क्या है कॉन सिंड्रोम?

मानव शरीर में एड्रिनल ग्लैंड्स (किडनी के ऊपर छोटी ग्रंथियां) मौजूद होती हैं। ये ग्लैंड्स कई हॉर्मोन बनाती हैं, जिनमें से एक है एल्डोस्टेरोन। इसका काम है शरीर में सोडियम और पोटैशियम का संतुलन बनाए रखना। लेकिन जब यह ग्लैंड जरूरत से ज्यादा एल्डोस्टेरोन बनाने लगती है, तो—शरीर में सोडियम बढ़ जाता है और पोटैशियम घट जाता है, इस असंतुलन से ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है और मरीज हाइपरटेंशन का शिकार हो जाता है।

रिसर्च के नतीजे

एम्स की टीम ने पाया कि लगभग हर 10 हाई बीपी पेशेंट्स में से 1 को यह हॉर्मोनल डिसऑर्डर होता है। यानी लगभग 10% हाइपरटेंशन मरीजों के पीछे असली वजह लाइफस्टाइल नहीं, बल्कि यह हॉर्मोनल गड़बड़ी है। डॉक्टर्स का कहना है कि अगर इस वजह का समय पर पता चल जाए, तो मरीज को ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में दवाइयों पर आजीवन निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती।

हाई ब्लड प्रेशर के खतरनाक प्रभाव

ब्लड प्रेशर को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण मामूली होते हैं और लोग इन्हें नज़रअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह शरीर को धीरे-धीरे अंदर से नुकसान पहुंचाता है।

दिल का दौरा (हार्ट अटैक),स्ट्रोक, किडनी फेलियर, आंखों की रोशनी पर असर, दिमाग की नसों पर दबाव, ये सब हाई बीपी के लंबे समय तक अनकंट्रोल रहने पर हो सकते हैं।

किन संकेतों पर सतर्क हों?

कॉन सिंड्रोम या सामान्य हाइपरटेंशन दोनों में शुरुआती लक्षण अक्सर समान होते हैं: लगातार सिरदर्द रहना, चक्कर आना या आंखों के सामने धुंध छाना, थकान और बेचैनी, पैरों या चेहरे पर सूजन, तेज धड़कन या सीने में दबाव, अगर आपको ये लक्षण बार-बार दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से चेकअप कराना चाहिए।

उपाय: प्राकृतिक तरीके से ब्लड प्रेशर कंट्रोल

आयुर्वेद और योग में ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के कई आसान उपाय बताए गए हैं।

घरेलू नुस्खे

लहसुन: रोज़ खाली पेट 1–2 लहसुन की कलियां खाने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।

आंवला: इसमें मौजूद विटामिन C धमनियों को मजबूत बनाता है।

मेथीदाना पानी: रात को भिगोकर सुबह पीने से हाई बीपी में राहत।

अश्वगंधा और अर्जुन की छाल: दिल को मजबूत करने में लाभकारी।

जीवनशैली सुधार

नमक का सेवन कम करें।

तैलीय और प्रोसेस्ड फूड से बचें।

रोज़ाना कम से कम 30 मिनट टहलना ज़रूरी।

धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएँ।

पर्याप्त नींद लें और तनाव को मैनेज करें।

डॉक्टर और योग – दोनों का संतुलन ज़रूरी

यह सच है कि योग और आयुर्वेद ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी हैं। लेकिन अगर कॉन सिंड्रोम जैसा हॉर्मोनल कारण मौजूद हो, तो सिर्फ घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। ऐसे मरीजों को समय पर हॉर्मोन टेस्ट, मेडिकल चेकअप और उचित इलाज कराना ज़रूरी है। योग और प्राणायाम दवाइयों के साथ सपोर्ट की तरह काम करते हैं। नियमित अभ्यास से दवा की डोज़ कम हो सकती है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनती है।

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