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एक बच्चे की नसीहत….

Jaipur

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हजरत बहलोल र.अ. शहर बसरा की एक गली से गुजर रहे थे, आपने देखा कि बच्चे गली में अखरोट और बादाम से खेल रहे हैं। उन बच्चों से थोड़ी दूरी पर एक बच्चा बड़ी मायूसाना और अफसोस भरी नजरों से उन खेलते हुए बच्चों को देख रहा है। हजरत बहलोल र.अ. उस बच्चे के पास गए और बोले सब बच्चे तो खेल रहे हैं, क्या तुम्हारे पास अखरोट और बादाम नहीं हैं। चलो तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हें भी अखरोट और बादाम दिलवा देता हूं। फिर तुम भी इन बच्चों के साथ खेलना।बच्चे ने हजरत बहलोल र.अ. को बड़ी मायूसाना नजरों से देखा और बोला- नहीं जनाब मैं इस पर कतई दुखी व मायूस नहीं हूं कि मेरे पास अखरोट और बादाम नहीं है। बल्कि मैं इस वजह से दुखी हूं कि यह बच्चे किस तरह से अल्लाह की दी हुई इस बेश बहा (कीमती) जिंदगी के वक्त को खेलकूद में बर्बाद कर रहे हैं। क्या यह इस वक्त अल्लाह की याद में नहीं गुजार सकते ? क्या अल्लाह ने हमको इस दुनिया में खेलकूद के दिए भेजा है? अल्लाह ने तो हमको अपनी इबादत और बंदगी के लिए भेजा है और इस जिंदगी के बाद हम सबको इस तरफ लौट कर जाना है।हजरत बहलोल र.अ. बच्चे की इन नासिहाना/नसीहत वाली बातों को सुनकर बड़े खुश हुए और बोले ए साहबजादे तुमने यह दानाई और अकलमंदी की बातें कहां से सीखी। बच्चों ने जवाब दिया कि जनाब यह बातें मुझे मेरी मां ने सिखाई हैं। मेरी अम्मी घर में जब कुरआने पाक की तिलावत करती हैं तो हम बच्चों को पास बिठाती हैं और कुरआनी आयत का मफ़हूम (मायने) हम बच्चों को बताती हैं। मेरी अम्मी ने ही मुझे बताया है कि कुरआने पाक में है कि “क्या तुम ख्याल करते हो कि हमने तुम्हें बेकार पैदा किया है और यह कि तुम हमारी तरफ नहीं लौटाए जाओगे” और कुरआने पाक में यह भी है कि “हमने तमाम इंसानों और जिनों को अपनी इबादत के लिए पैदा किया है” अब आप ही बताइए कि जब हम को बेकार पैदा नहीं किया गया तो हम बेकार के कामों में अपना कीमती वक्त क्यों बर्बाद कर रहे हैं ! हमको तो अपना कीमती वक्त उसकी इबादत और याद में मशगूर रहकर क्या नहीं गुजारना चाहिए!  इस छोटे बच्चे की यह आलीमाना और नासिहाना बातें सुनकर बहुत खुश हुए और उसको दुआएं दीं।

बच्चे की इन नासिहाना बातों से यह जाहिर होता है कि घर में मां ही अपने बच्चों की सही तरबियत करके उन्हें आला अखलाक, आला किरदार, दूसरे लोगों को बुराइयों से रोकने में बचाने वाला और गरीबों की मदद करने वाला और मोहब्बत करने वाला जैसे जज्बे बच्चों में पैदा कर सकती है। जिससे उसकी जिंदगी आगे चलकर कामयाबी का जीना साबित हो सकता है और बच्चा अपने दिन और दुनियां की हिफाजत कर सकता है।

यह किसी का कौल है कि “मां की गोद बच्चों की पहली  दर्शगाह है”। अल्लाह तआला से बस यही दुआ है कि वह दुनियां की तमाम माओ को अपने बच्चों की तरबियत कुरआन व हदीस के मुताबिक करने की तौफीक और समझ अता फरमाए, ताकि उनके बच्चे दीन दुनियां दोनों में तरक्की कर आला मुकाम हासिल कर सके और अपने वालदेन का नाम रोशन कर सकें।

आमीन।

हबीबुल्लाह एडवोकेट

जवाहर नगर, जयपुर

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