तीन गोल्ड और एक कांस्य पदक जीतकर अब्दुल कादिर ने देश का नाम रोशन किया
रतलाम के दिव्यांग तैराक का दुबई में जलवा
रतलाम। रतलाम के दिव्यांग तैराक अब्दुल कादिर इंदौरी ने दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स में इतिहास रच दिया है। बचपन में एक दर्दनाक हादसे का शिकार होने के बावजूद, उन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत बनाया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। कादिर ने इस प्रतियोगिता में कुल चार पदक जीते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन
दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स में अब्दुल कादिर ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए तीन स्वर्ण (Gold) और एक कांस्य (Bronze) पदक अपने नाम किए।
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गोल्ड मेडल: उन्होंने 50 मीटर बटरफ्लाई, 50 मीटर बैकस्ट्रोक और 100 मीटर फ्री स्टाइल इवेंट में पहला स्थान हासिल किया।
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कांस्य पदक: 50 मीटर बटरफ्लाई इवेंट के एक अन्य वर्ग में तीसरा स्थान प्राप्त कर उन्होंने कांस्य पदक भी जीता।
चारों इवेंट में उनका प्रदर्शन खेल जगत में चर्चा का विषय बना रहा।
छत पर खेलते समय हुआ था दर्दनाक हादसा
करीब 18 वर्षीय अब्दुल कादिर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वर्ष 2014 में रतलाम की कलीमी कॉलोनी स्थित अपने घर की छत पर खेलते समय वे हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए थे। इस हादसे में उनके दोनों हाथ पूरी तरह खराब हो गए, जिन्हें अलग करना पड़ा। उस समय उनकी उम्र लगभग 6 वर्ष थी।
कोच के मार्गदर्शन में निखरी प्रतिभा
हादसे के बाद कादिर ने हिम्मत नहीं हारी। कोच राजा राठौड़ के अनुसार, हादसे के एक वर्ष बाद ही उन्होंने तैराकी का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। कोच के मार्गदर्शन में उन्होंने जल्द ही तैराकी में दक्षता हासिल कर ली और प्रतियोगिताओं में लगातार सफलताएं प्राप्त करने लगे।
एशियन यूथ पैरा गेम्स तक का सफर
दुबई में आयोजित यह पांचवां यूथ एशियन पैरा गेम्स था, जिसमें 18 वर्ष तक के खिलाड़ी भाग ले सकते हैं।
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चयन प्रक्रिया: खिलाड़ियों का ट्रायल ग्वालियर में हुआ था। देशभर से आए प्रतिभागियों में से अब्दुल कादिर सहित पांच-छह तैराकों का चयन दुबई एशियन यूथ पैरा गेम्स-2025 के लिए किया गया।
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प्रतिस्पर्धा: इस प्रतियोगिता में विभिन्न खेलों के कुल 162 खिलाड़ी शामिल हुए थे।
भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं पर नजर
अब्दुल कादिर इससे पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी हिस्सा ले चुके हैं, जहां उन्होंने नौवीं रैंक हासिल की थी। दुबई प्रतियोगिता से पहले वे पैरा स्पोर्ट्स की राष्ट्रीय स्पर्धा में 9 गोल्ड और 3 सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। उनके कोच और समर्थकों को उम्मीद है कि आगे वे सीनियर स्तर पर ओलंपिक और एशियन गेम्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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