पेड़ की टहनी गिरने से गरीब युवक की मौत
-मुआवजा नहीं केवल आश्वासन मिला, ढांढस बंधाने तक नहीं आए समाज के नेता
सवाई माधोपुर (रॉयल पत्रिका)। सवाई माधोपुर के पुराने शहर स्थित अंसारी मोहल्ले में तेज हवाओं के झौंके से एक युवक के सिर पर एक जर्जर पेड़ की टहनी गिरने से युवक की तत्काल मौत हो गई । मृतक युवक मोहम्मद नफीस 35 वर्षीय अंसारी मोहल्ला का निवासी था, जानकारी के मुताबिक मृतक मोहम्मद नफीस पुत्र रईस मोहम्मद परिवार में इकलौता कमाने वाला था, उसके पिता रईस मोहम्मद बीमार रहते हैं और माँ की भी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। बताया जा रहा है कि सोमवार शाम मोहम्मद नफीस अपने काम काज से निवृत होकर अपने घर अंसारी मोहल्ला लौट रहा था, उस दौरान तेज हवाएं चल रही थी। नफीस पैदल ही अपने घर जा रहा था, इसी दौरान जैसे ही नफीस एक जर्जर पेड़ के नीचे से गुजरने लगा, तभी पेड़ की एक टहनी टूटकर नफीस के सिर पर गिर गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजनों एवं मोहल्लेवासियों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के परिजनों एवं मोहल्लेवासियों का कहना है कि पेड़ काफी जर्जर हो चुका था, जिसे काटने के लिए मोहल्लेवासियों ने स्थानीय पटवारी को लिखित में शिकायत भी दी थी। लेकिन प्रशासन द्वारा पेड़ को नहीं हटाया गया। स्थानीय लोगों एवं परिजनों का कहना है कि प्रशासन अगर समय रहते पेड़ को कटवा देता तो आज नफीस जिंदा होता। उनका कहना है कि नफीस की मौत का जिम्मेदार प्रशासन की लापरवाही है।
मृतक परिवार की मांग है कि मृतक के परिवार को 50 लाख रूपये की सहायता राशि, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, गरीब व बीमार पिता को डेयरी बूथ सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। मृतक का परिवार गरीबी की हालत से जुझ रहा है, प्रशासन की लापरवाही की वजह से जान जा चुकी है। परिवारजन को सरकारी या अन्य प्रकार से कोई राहत नहीं मिली। समाज के प्रतिष्ठित नेता जो मंचों पर बड़े-बड़े बातें करते हैं और दावा करते हैं कि हम आपके सच्चे हमदर्द हैं। लेकिन जब कोई ऐसी मुसीबत आ जाए तो साथ आकर खड़े होना तो दूर फोन पर सुध तक नहीं लेते हैं। इन नेताओं को समाज के जो चापलूसी में महारथ हासिल जिम्मेदार लोग ही माला पहनाते हैं और अपनी गली मोहल्ले में घुमाते हैं। फिर ऐसे मौके पर वो अपने नेता को बेसहारा परिवार के साथ दुःख की घड़ी में साथ देने को क्यूं नहीं कहते? समाज में एक वर्ग निचला है जो गरीबी की हर रोज़ मार झेलता है और ऐसी विपदा की घड़ी में भी वही मार झेले यह न्याय नहीं है। अगर समाज का भला करना है तो एक दूसरे की दुःख की घड़ी में साथ आना पड़ेगा और जो नेता समाज के भारी वोटों से सत्ता में आते हैं, उनसे एक जुट होकर काम लेने होंगे। अन्यथा ये समाज का हमेशा शोषण करते रहेंगे। समाज के गरीब लोग केवल ज्ञापन ही देते रहेंगे।
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