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अच्छी परवरिश के आसान टिप्स

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अक्सर माँ-बाप समझते हैं कि परवरिश का मतलब है बच्चे को इस तरह समझाना कि वो बिना किसी सवाल के बस हमारी बात मान ले। शायद इस सोच की बुनियाद सही हो, लेकिन इसका तरीका बदलना होगा। अच्छी परवरिश सज़ा देने से नहीं, तालीम और रहनुमाई देने से होती है। गुस्से की जगह मुस्कराहट, चिल्लाने की जगह नरमी, और सज़ा की जगह इनाम ज़्यादा असरदार होता है। इस लेख में 13 आसान टिप्स दिए गए हैं जो आपके बच्चे की तरबियत के तरीके को बेहतर बना सकते हैं:

  1. खुद मिसाल बनें:
    बच्चा हर वक्त आपको देखता है – आपके ग़ुस्से का तरीका, सच बोलना, ईमानदारी, और आपके अख़लाक। इसलिए जैसा आप चाहते हैं कि बच्चा बने, वैसा खुद बनकर दिखाएं। जो आपके पास नहीं है, वो आप किसी को नहीं दे सकते।
  2. खुद पर भरोसा करना सिखाएं:
    जब आप उसके अच्छे बर्ताव की तारीफ़ करते हैं, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। ऐसा बच्चा बुरे बर्ताव से खुद को दूर करना जानता है।
  3. समाजी तौर-तरीके सिखाएं:
    बचपन से बच्चे को अदब और शराफत सिखाएं – जैसे दरवाज़ा खटखटाकर अंदर जाना, शुक्रिया कहना, मां-बाप के हाथ चूमना, रिश्तेदारों से मिलना, और घर के कामों में मदद करना।
  4. उम्र के मुताबिक़ आज़ादी दें:
    बच्चे को छोटे-छोटे फैसले लेने दें – जैसे अपने कपड़े चुनना, अपनी चीज़ें खुद खरीदना। इससे वो जिम्मेदार बनता है।
  5. जिम्मेदारियाँ सौंपें:
    कुछ माँ-बाप खुद सब कर लेते हैं ताकि बच्चा थके नहीं, मगर उसे छोटे-छोटे काम देना ज़रूरी है – जैसे सफाई करना, पापा की मदद करना। शुरू में उसे सिखाकर काम सौंपें, ताकि वो नाकामी महसूस न करे।
  6. पहले ध्यान खींचें:
    अगर बच्चा आपकी बात नहीं सुन रहा, तो सीधा उसके पास जाकर, उसकी आंखों में देखकर बात करें। सरल और साफ़ शब्दों का इस्तेमाल करें।
  7. नर्म लहजे में रोकें:
    “चिल्लाना बंद करो” की बजाय कहें “प्लीज़, अपनी नार्मल आवाज़ में बात करो”।
    “बॉल मत फेंको” की जगह कहें “बाहर जाकर बॉल खेलो”।
    इस तरह से बच्चा आपकी बात को नकारेगा नहीं और खुद फैसला लेने लायक बनेगा।
  8. सीमाएं तय करें:
    कुछ माँ-बाप सोचते हैं कि बच्चे को आज़ादी देनी चाहिए, मगर हदें तय करना ज़रूरी है ताकि बच्चा जिम्मेदार बन सके।
  9. हालात को पहले से समझें:
    अगर बच्चा खिलौनों की दुकान में हर चीज़ मांगता है, तो अगली बार अकेले जाएं। बुरी आदतें बनने से पहले उन्हें रोकना समझदारी है।
  10. सज़ा तय करें:
    गलत बर्ताव पर साफ़ कहें – “अगर टाइम पर नहीं गए तो पिकनिक नहीं होगी।” “अगर बहन को मारा तो पॉकेट मनी नहीं मिलेगी।” इससे बच्चा समझेगा कि बुरा बर्ताव नुक़सान पहुंचाता है।
  11. लचीलापन अपनाएं:
    अगर बच्चा स्कूल से थककर आया है, तो ज़िद न करें कि “अब ही होमवर्क करो।” कहिए, “पहले थोड़ा आराम कर लो, फिर मैं तुम्हें उठा दूंगा।” इससे बच्चा समझेगा कि आप उसकी हालत समझते हैं।
  12. इनाम का तरीका अपनाएं:
    इनाम और रिश्वत में फर्क है। रिश्वत होती है – “अगर चुप रहा तो पैसे मिलेंगे।”
    इनाम होता है – “आज तुमने बहुत अच्छे से बिहेव किया, ये तुम्हारे लिए इनाम है।”
    इनाम से अच्छे अख़लाक बढ़ते हैं।
  13. अपने उसूलों पर क़ायम रहें:
    जो बात कहें, उस पर डटे रहें। इससे बच्चा समझेगा कि आप सीरियस हैं और आपके उसूलों की क़द्र करेगा। घर में कुछ नियम तय करें – जैसे खाना साथ बैठकर खाना, झूठ न बोलना – इससे बच्चे को ज़िंदगी में फैसला लेने की तालीम मिलेगी।

 

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