इमाम मुस्लिम र.अ.
इमाम मुस्लिम र.अ. का पूरा नाम अबू अल-हुसैन मुस्लिम इब्न अल-हज्जाज इब्न मुस्लिम इब्न वार्ड इब्न कुशाद अल-कुशैरी अन-नयसबुर है। इमाम मुस्लिम र.अ. का जन्म 202 हिजरी या 204 या 206 हिजरी में खुरासान (वर्तमान में ईरान में स्थित) के अब्बासिद प्रांत के निशापुर में हुआ था। वे ‘कुशायर’ नामक एक कुलीन अरब जनजाति से थे। 261 हिजरी में उनकी मृत्यु भी निशापुर में हो गई थी। इमाम मुस्लिम र.अ. ने शुरुआती तालीम निशापुर खुरासान में प्राप्त की ,उस समय निशापुर दीनी तालीम का एक बड़ा केंद्र था। बहुत कम उम्र में ही आप ने हज कर लिया था और 15 सालों तक इल्मे दीन हासिल करते रहे थे।इमाम मुस्लिम र.अ. के प्रमुख शिक्षक(उस्ताद ) यह थे:-
- अब्दुल्ला इब्न मसलामा अल-क़ानाबी
- याह्या इब्न याह्या एन-नैसाबरी
- कुतैबा इब्न सईद
- सईद इब्न मंसूर
- इमाम अहमद इब्न हंबल
- इसहाक इब्न राहुवेह
- अबू खैथम ज़ुहैर इब्न हर्ब
- अबू कुरैब मुहम्मद इब्न अल-अला
- अबू मूसा मोहम्मद इब्न अल-मुथन्ना
- मुहम्मद इब्न यह्या अध-दुहली
- अबू मुहम्मद इब्न इस्माइल अल-बुखारी (इमाम बुखारी)
- अब्दुल्ला अद-दारिमी
इमाम मुस्लिम र.अ. निशापुर में हदीसें पढ़ाया करते और उनके कई शिष्य बाद में मशहूर हुए और हदीस के क्षेत्र में प्रमुखता हासिल की। जहाँ तक उनके शिष्यों की बात है, तो वे बहुत थे। उनमें से कुछ थे:
- अली इब्न अल-हसन इब्न ईसा अल-हिलाली
- मुहम्मद इब्न अब्दुल-वहाब अल-फर्रा
- अल-हुसैन इब्न मुहम्मद अल-कब्बानी
- अबू ईसा (अल-तिर्मिज़ी)
- अब्दुल्ला इब्न याह्या अस-सरखासी अल-कादी
- अली इब्न अल-हुसैन अर-रज़ी
- सलीह इब्न मुहम्मद जजराह
- नस्र इब्न अहमद अल-हाफ़िज़
- इब्न खुज़ैमाह
- अबू उवाना,
- अब्दुर-रहमदन इब्न अबू हातिम अर
इमाम मुस्लिम र.अ. कपड़ों की तिजारत किया करते थे और अपनी निजी ज़रुरतें उसी तिजारत से पूरी किया करते थे। इमाम मुस्लिम एक उम्दा शख्सियत के इन्सान थे, कभी किसी से उनका झगड़ा नहीं हुआ। वह अमामा बांधते थे और खूबसूरत भी थे। इमाम मुस्लिम र. अ. ने व्यापक रूप से इराक, अरब प्रायद्वीप, सीरिया और मिस्र के क्षेत्रों सहित अहादीस (हदीस के बहुवचन) के संग्रह को इकट्ठा करने के लिए यात्राएं की। इमाम मुस्लिम र.अ., इमाम बुखारी र.अ. से बहुत प्रभावित थे और उनसे बराबर हदीस सीखा करते थे। इसी तरह वह इमाम मोहम्मद बिन याहिया अल धूहलि से भी बहुत प्रभावित थे और उनसे बराबर हदीस का इल्म हासिल करने के लिए बगदाद की यात्रा करते थे अपनी मृत्यु के दो साल पहले भी उन्होंने बगदाद की यात्रा की थी। कहते हैं कि इमाम मुस्लिम र.अ. ने 300,000 हदीसों का मूल्यांकन किया, और कड़े स्वीकृति के मानदंडों के आधार पर लगभग 4,000 हदीसों को ही माना क्योंकि उनके संग्रह में शामिल प्रत्येक रिपोर्ट (हदीस के ताल्लुक से) की जांच की गई और उल्लेखकर्ताओं (हदीसें बयान करने वालों) की श्रृंखला की सत्यता को दृढ़ता से स्थापित किया गया था। सुन्नी मुसलमानों में सहीह अल बुखारी के बाद यह दूसरा सबसे प्रामाणिक हदीस संग्रह माना जाता है। सहीह मुस्लिम 43 किताबों में बांटा गया है, जिसमें कुल 9200 बयान / हदीसें हैं। इमाम मुस्लिम इब्न अल-हज्जाज र.अ. ने कभी भी सभी प्रामाणिक हदीसों को इकट्ठा करने का दावा नहीं किया क्योंकि उनका लक्ष्य केवल सही और प्रमाणिक हदीसों को इकट्ठा करना था। सहीह मुस्लिम सुन्नी इस्लाम में कुतुब अल-सित्ताह (छह प्रमुख हदीस संग्रह) में से एक है। यह सुन्नी मुसलमानों द्वारा अत्यधिक प्रशंसित है। सहीह मुस्लिम, पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहिवसल्लम के 250 साल बाद लिखी गई , इसके बावजूद सुन्नी मुसलमानों का मानना है कि इसमें वास्तविक और प्रामाणिक हदीसें हैं। सहीह मुस्लिम, सहीह अल-बुख़ारी के साथ सहीद् दैन के रूप में जानी जाती है। अरब प्रायद्वीप, मिस्र, इराक और सीरिया में अपना इल्मे दीन हासिल करने के बाद, वह अपने गृह नगर निशापुर खुरासान में बस गए।वह बुखारी र.अ. से मिलते थे और आजीवन उनके साथ बने रहे। इमाम मुस्लिम ने हदीस के बहुत से विद्वानों से शिक्षा प्राप्त की और अनगिनत लोगों से हदीसें सीखीं। इमाम मुस्लिम र.अ. ने जिन प्रमुख विद्वानों से हदीसें सीखीं थीं उनमें ये शामिल थे:
- अब्दुल्ला इब्न मसलामा अल-क़ानाबी
- याह्या इब्न याह्या एन-नैसाबरी
- कुतैबा इब्न सईद
- सईद इब्न मंसूर
- इमाम अहमद इब्न हंबल
- इसहाक इब्न राहुवेह
- अबू खैथम ज़ुहैर इब्न हर्ब
- अबू कुरैब मुहम्मद इब्न अल-अला
- अबू मूसा मोहम्मद इब्न अल-मुथन्ना
- मुहम्मद इब्न यह्या अध-दुहली
- अबू मुहम्मद इब्न इस्माइल अल-बुखारी (इमाम बुखारी)
- अब्दुल्ला अल-दारिमी
कहा जाता है कि हदीस के लगभग 220 बयान करने वाले उनके उस्ताद थे। वे इमाम बुखारी के साथ थे और हदीसों के संकलन में उनकी पद्धति से प्रभावित थे। बताया जाता है कि वे इमाम बुखारी से कहा करते थे:“मुझे आपके पैर चूमने दीजिए, हे शिक्षकों के गुरु, मुहद्दिसिन (हदीस के विद्वानों) के नेता और हदीस ज्ञान और उसकी कमियों के डॉक्टर”। इमाम मुस्लिम र.अ. निशापुर में हदीस का दर्स दिया करते थे और उनके कई शागिर्द बाद में मशहूर हुए और हदीस के क्षेत्र में प्रमुखता हासिल की। जहाँ तक उनके शागिर्दों की बात है, तो वे बहुत थे। उनमें से कुछ यह थे:
- अली इब्न अल-हसन इब्न ईसा अल-हिलाली
- मुहम्मद इब्न अब्दुल-वहाब अल-फर्रा
- अल-हुसैन इब्न मुहम्मद अल-कब्बानी
- अबू ईसा अत-तिर्मिज़ी
- अब्दुल्ला इब्न याह्या अस-सरखासी अल-कादी
- अली इब्न अल-हुसैन अर-रज़ी
- सलीह इब्न मुहम्मद जजराह
- नस्र इब्न अहमद अल-हाफ़िज़
- इब्न खुज़ैमाह
- अबू उवाना,
- अब्दुर-रहमदन इब्न अबू हातिम अर-रज़
सहीह मुस्लिम के अलावा, उन्होंने हदीस पर कई अन्य किताबें लिखीं और उनमें से सबसे महत्वपूर्ण किताबें यह हैं :-
- अल-मुस्नद अस-साहिह (साहिह मुस्लिम)
- अत-तमीयिज़
- किताब अल-इलल
- किताब अल-वुहदान
- किताब अल-अफ़राद
- किताब अल-अकरान
- किताब अल-मुखदरमीन
- किताब अवहम अल-मुहद्दीथिन
- किताब अत-तबाक़त
इमाम मुस्लिम की मृत्यु का वाकया भी हैरत अंगेज था:-
इमाम मुस्लिम 55 साल तक जीवित रहे और रविवार, 24 रजब, 261 हिजरी की शाम को उनकी मृत्यु हो गई।इमाम मुस्लिम र.अ. एक दीनी मजलिस में थे जहां एक हदीस के बारे में उनको मालूम ना था, वह घर आए और अपना दीपक जलाया और घर पर कहा कि उन्हें कोई डिस्टर्ब ना करें और कहा कि वह जो खजूर की टोकरी उपहार में आई है वो मुझे दे दो फिर उन्होंने हदीस की खोज शुरू की और सुबह तक एक-एक खजूर लेते रहे, यहां तक कि सुबह तक खजूरें खत्म हो गईं और उन्हें आखिरकार हदीस मिल गई । कहा जाता है कि खजूरें उनकी मौत का सबब बन गई। अगले दिन यानी 25 रजब, 261 हिजरी को उन्हें निशापुर, खुरासान, ईरान में दफना दिया गया।
संकलनकर्ता:-
फ़ज़लुर्रहमान,
सहायक सचिव (सेवानिवृत्त)
मोबाईल नं 9828668877
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