सैयद मोहम्मद शरफुद्दीन कादरी स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता
सैयद मोहम्मद शरफुद्दीन कादरी का जन्म 25 दिसम्बर 1901 को भारतीय राज्य बिहार के नवादा जिले कुमरवा में यूनानी चिकित्सक मोहम्मद मोहिबुद्दीन के घर हुआ था। कुछ सालों बाद वो कलकत्ता चले गए और फिर ताउम्र वही रहे। सैयद मोहम्मद शरफुद्दीन कादरी ने अपने पिता से यूनानी चिकित्सा पद्धति सीखकर अपने अभ्यास के ज़रिए अपने पिता की मदद की। इस दौरान वो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी शामिल हुए। 1930 में नमक मार्च में महात्मा गांधी जी के साथ थे और ब्रिटिश हुकूमत द्वारा कटक जेल में कैद किये जाने पर बड़े नेताओं के साथ जेल में रहे। राजेन्द्र प्रसाद के साथ उनका जुड़ाव बहुत था। उन्होंने एक चिकित्सा पत्रिका हिकमत ए बांग्ला निकाली जिसके वो संस्थापक थे, जो यूनानी चिकित्सा पद्धति पर केंद्रित एक चिकित्सा पत्रिका थी।जिसके जरिये यूनानी चिकित्सा पद्धति को आम करने के लिए कड़ी मेहनत की। सैयद शरफुद्दीन कादरी ने औपनिवेशिक भारत के विभाजन की वकालत करने वाले द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का विरोध किया।1994 में उन्होंने कलकत्ता यूनानी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना में सैयद फैज़ान अहमद की सहायता की। राष्ट्र के प्रति समर्पित इस राष्ट्रवादी कार्यकर्ता, महात्मा गांधी वादी विचारक ओर यूनानी चिकित्सा पद्धति के लिए देश भर में मशहूर सैयद मोहम्मद शरफुद्दीन कादरी को भारत सरकार ने 2007 में पद्म भूषण के नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया। 30 दिसम्बर 2015 को 114 वर्ष की आयु में कोलकाता में उनके रिपन स्ट्रीट निवास पर उनकी मृत्यु हो गई। देश की एकता अखण्डता ओर उसके सम्मान के लिए लिए जी जान से ताउम्र मेहनत करने वाले महान देशभक्त को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया।
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