Loading...

जयपुर में करणी सेना पर लाठीचार्ज: UGC के नए नियमों के विरोध में उग्र हुआ प्रदर्शन UGC Roll Back

जयपुर में करणी सेना पर लाठीचार्ज: UGC के नए नियमों के विरोध में उग्र हुआ प्रदर्शन UGC Roll Back

Follow us

Share

UGC Roll Back : जयपुर:

UGC के नए नियमों (UGC Roll Back) और सवर्ण समाज की विभिन्न मांगों को लेकर जयपुर में सोमवार को श्री राजपूत करणी सेना का प्रदर्शन उग्र हो गया। रैली निकाल रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया और भीड़ को काबू करने के लिए वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के बीच जमकर धक्का-मुक्की भी हुई।

बैरिकेड्स तोड़े, पुलिस और कार्यकर्ताओं में झड़प
यह रैली श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में कालवाड़ रोड स्थित रावण गेट से कलेक्ट्रेट सर्किल तक निकाली जा रही थी। योजना के अनुसार कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाना था, लेकिन किसी कारणवश ऐसा संभव नहीं हो पाया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट सर्किल से आगे बढ़ते हुए सीधे बीजेपी कार्यालय की ओर कूच करने लगे।

पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए पहले कालवाड़ पुलिया पर बैरिकेड्स लगाए, लेकिन प्रदर्शनकारी उन्हें हटाकर आगे बढ़ गए। चौमूं पुलिया पर भी पुलिस और कार्यकर्ताओं में झड़प हुई। आखिरकार पुलिस ने खासाकोठी पुलिया के नीचे उन्हें रोक लिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों के सिर में चोटें आई हैं।

हंगामे के बीच कुछ लोगों ने वाटर कैनन वैन में घुसने का भी प्रयास किया। हालांकि, इस दौरान फंसी एक एंबुलेंस को प्रदर्शनकारियों ने इंसानियत दिखाते हुए रास्ता देकर सुरक्षित बाहर निकाला।

Advertisement

मकराना ने दिलाई बीजेपी को वोट न देने की शपथ

रैली में महिपाल सिंह मकराना अपने हाथ में संविधान की किताब लेकर एक गाड़ी के ऊपर खड़े नजर आए। प्रदर्शन के दौरान मकराना ने कलेक्ट्रेट सर्किल पर बैठे लोगों को शपथ दिलाई कि वे आने वाले निकाय और पंचायत चुनावों में बीजेपी को वोट नहीं देंगे और न ही इनकी रैलियों में जाएंगे।

आखिर UGC के किन नियमों का हो रहा है विरोध?

सवर्ण समाज और करणी सेना का आरोप है कि UGC द्वारा लागू किए गए नए नियम पूरी तरह से एकतरफा हैं। विरोध के मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

भेदभाव की एकतरफा परिभाषा: नियमों में केवल SC/ST/OBC, महिलाओं और दिव्यांगों को ही पीड़ित माना गया है। जनरल कैटेगरी को पीड़ित नहीं माना गया, सिर्फ आरोपी माना जा सकता है।

झूठी शिकायत पर कोई सजा नहीं: फर्जी या गलत शिकायत करने वालों पर कोई जुर्माना या कार्रवाई तय नहीं की गई है। 24 घंटे में कार्रवाई का नियम गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ाता है।

सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं:

EOC (इक्वल अपॉर्चुनिटी सेंटर) और इक्विटी कमेटी में जनरल कैटेगरी का कोई सदस्य होना जरूरी नहीं है, जिससे फैसले एकतरफा होने का डर है।

UGC एक्ट के दायरे से बाहर: विरोध करने वालों का कहना है कि 1956 का UGC एक्ट केवल अकादमिक मानकों तक सीमित है। एक्ट में जातीय भेदभाव या उत्पीड़न पर सीधे नियम बनाने की बात नहीं है।

कॉलेजों पर दबाव: नियम तोड़ने पर कॉलेज की ग्रांट रोकने और मान्यता रद्द करने के प्रावधान से कॉलेज सजा के डर से मेरिट के आधार पर सही फैसले नहीं ले पाएंगे।

क्या हैं UGC के नए नियम?

हर कॉलेज में एक ‘इक्वल अपॉर्चुनिटी सेंटर’ (EOC) और ‘इक्वालिटी कमेटी’ (समता समिति) बनेगी, जिसके अध्यक्ष कॉलेज के प्रमुख होंगे।
कमेटी में SC/ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग शामिल होंगे और इसका कार्यकाल 2 साल का होगा।

भेदभाव की शिकायत मिलने पर 24 घंटे में मीटिंग करना अनिवार्य होगा और 15 दिन में रिपोर्ट कॉलेज प्रमुख को देनी होगी।

नियम तोड़ने पर कॉलेज की ग्रांट रोकी जा सकती है, डिग्री/ऑनलाइन कोर्स पर रोक लग सकती है, और गंभीर मामलों में UGC की मान्यता भी रद्द हो सकती है।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।