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सरकारी अस्पतालों में मौत का ‘इन्फेक्शन’! अब दौसा में प्रसूता की मौत, डेढ़ साल पहले हुई थी शादी

सरकारी अस्पतालों में मौत का ‘इन्फेक्शन’! अब दौसा में प्रसूता की मौत, डेढ़ साल पहले हुई थी शादी

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Rajasthan Maternal Death Dausa : दौसा। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश में गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं की मौत के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। पहले कोटा, भीलवाड़ा के बाद दौसा के सरकारी अस्पतालों में भी प्रसूता की मौत का मामला सामने आया है। जयपुर में शुक्रवार को एक और प्रसूता ने दम तोड़ दिया।

15 दिन पहले महिला की हुई थी डिलीवरी

दौसा जिले के बांदीकुई शहर स्थित देवराज कॉलोनी पुराना बास निवासी तारा देवी ने पहली बार संतान को जन्म दिया था। जिला अस्पताल में तारा देवी 14 जुलाई को सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के करीब 24 घंटे बाद अचानक यूरिन बंद हो गया, जिसके बाद उनकी किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या सामने आई। महिला की स्थिति बिगड़ने पर जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने तत्काल उसे तुरंत जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया। यहां महिला की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया। हॉस्पिट में 15 दिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

SMS अस्पताल में भर्ती थी तारा देवी

परिजनों के मुताबिक, पुराना बास देवराज कॉलोनी की रहने वाली तारा देवी की 14 जुलाई को जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी कराई गई थी। शुरुआत में उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही थी, लेकिन ऑपरेशन के करीब 24 घंटे बाद अचानक यूरिन आना बंद हो गया। इसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल जांच की, जिसमें किडनी संबंधी समस्या की आशंका सामने आई। महिला की हालत को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल भेज दिया था। महिला 15 दिनों तक जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती रही। यहां 15 दिन तक उपचार चलने के बाद शुक्रवार को मौत हो गई। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

डेढ साल पहले हुई थी शादी

परिजनों के बताया कि मृतक तारा देवी (21) की डेढ साल पहले शादी हुई थी। महिला का पति प्राईवेट जॉब करता है। 15 दिन पहले महिला को प्रसव कराने के लिए दौसा लेकर गए थे। उस समय महिला बिल्कुल पूरी तरह स्वस्थ थी। अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला ने बेटी को जन्म दिया। प्रसव के 24 घंटे बाद महिला की अचानक तबीयत बिगड़ती चली गई। डिलीवरी के बाद महिला का यूरियन आना बंद हो गया। डॉक्टरों ने किडनी इंफेक्शन बताते हुए जयपुर रेफर कर दिया। यहां 15 दिन एसएमएस अस्पताल में भर्ती रहने के बाद शुक्रवार को महिला ने दम तोड़ दिया।

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कोटा, बीकानेर और जोधपुर में भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

राजस्थान में यह पहला मामला नहीं है। मई में कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत ने स्वास्थ्य विभाग को झकझोर दिया था। वहीं जून में बीकानेर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल होने का मामला सामने आया था, जिनमें से दो महिलाओं की बाद में मौत हो गई थी। वहीं अब महिला की मौत के बाद सरकारी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, सर्जिकल उपकरणों की उपलब्धता, स्टरलाइजेशन प्रक्रिया और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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