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अमेरिका ने ईरान पर फिर हमला किया, ट्रम्प की धमकी-समझौता नहीं किया तो कुछ नहीं बचेगा

अमेरिका ने ईरान पर फिर हमला किया, ट्रम्प की धमकी-समझौता नहीं किया तो कुछ नहीं बचेगा

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तेल अवीव/तेहरान। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी है। अमेरिका की यह कार्रवाई ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए की जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “हम मंगलवार रात (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह) भी हमला करेंगे, उसके अगले दिन भी करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं लौटा तो अमेरिका अगले हफ्ते से ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर तेहरान, वॉशिंगटन के साथ समझौता करने में विफल रहता है तो उसके पास कुछ नहीं बचेगा। ट्रंप ने दावा किया कि अगर वार्ता दोबारा शुरू नहीं होती है तो अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज करेगा।

डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और दोनों देश एक दूसरे के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच संपर्क बना हुआ है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि जब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर समुद्री यातायात पर प्रतिबंध जारी रखेगा, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।

अमेरिका का दावा- होर्मुज में नौसैनिक नाकेबंदी फिर शुरू की

डोनाल्ड ट्रम्प ने ये भी कहा कि अमेरिका नागरिकों के हताहत होने की आशंका को कम करने के लिए ज्यादा सावधानी बरत रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम नागरिक आबादी को लेकर बेहद सावधानी बरत रहे हैं। लेकिन मैंने कहा है कि बेहतर होगा आप (ईरान) समझौता कर लें। नहीं तो आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा।’ इससे पहले दिन में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया था कि उसने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों को निशाना बनाते हुए अपनी नौसैनिक नाकेबंदी फिर से शुरू कर दी है।

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पिछले 24 घंटे में क्या-क्या हुआ

IRGC का व्यापारिक जहाजों पर हमला: ईरानी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमला किया। इसमें 1 भारतीय शख्स की मौत हो गई जबकि 10 लोग घायल हुए। जहाज पर कुल 20 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे।

भारत ने ईरानी राजदूत को तलब किया: भारत ने होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख (डिप्टी चीफ ऑफ मिशन) को तलब कर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया।

समंदर में भारत से जुड़े 11 जहाज फंसे: विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। ये सभी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं।

ट्रम्प ने होर्मुज में 20 फीसदी टैक्स का फैसला वापस लिया: ट्रम्प ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20 फीसदी टैक्स लगाने का अपना फैसला वापस ले लिया। उन्होंने मिडिल ईस्ट के नेताओं के साथ बातचीत के बाद यह फैसला लिया।

होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सबसे कम: होर्मुज स्ट्रेट मंगलवार को सिर्फ 4 जहाज गुजरे। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद यह सबसे कम शिपिंग ट्रैफिक है।

सैटेलाइट तस्वीरों में कतर के अमेरिकी बेस पर हमले के निशान

कतर के अल-उदीद एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिकी सेना के एक वेयरहाउस को नुकसान होने के संकेत मिले हैं। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी ने वीडियो जारी कर दावा किया कि यह नुकसान ईरान के हालिया मिसाइल हमले के बाद हुआ। अल-उदीद अमेरिका का पश्चिम एशिया में सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। हाल के दिनों में ईरान ने कतर समेत खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले करने का दावा किया है। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक इन सैटेलाइट तस्वीरों या वेयरहाउस को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। स्वतंत्र तौर पर भी इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।

सीजफायर के बाद क्यों भिड़े अमेरिका-ईरान?

परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद : अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पर सख्त रोक लगाए। ईरान इसे अपना वैध अधिकार बताकर मानने से इनकार कर रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट पर टकराव : दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से होती है। अमेरिका चाहता है कि यहां जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक जारी रहे, जबकि ईरान इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता का मामला मानता है।

आर्थिक प्रतिबंधों पर खींचतान : ईरान की मांग है कि पहले अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएं। अमेरिका कहता है कि प्रतिबंध तभी हटेंगे, जब ईरान परमाणु कार्यक्रम पर तय शर्तें पूरी करेगा।

पश्चिम एशिया में दबदबे की लड़ाई : अमेरिका ईरान के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव और उसके समर्थित सशस्त्र समूहों पर रोक चाहता है। ईरान इसे अपनी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा मानता है।

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