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राम मंद‍िर चढ़ावा चोरी में असली आरोपी कौन? पुलिस की रिमांड पर 3 आरोपी; 40 घंटे होगी पूछताछ

राम मंद‍िर चढ़ावा चोरी में असली आरोपी कौन? पुलिस की रिमांड पर 3 आरोपी; 40 घंटे होगी पूछताछ

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Ram Temple Donation Theft : अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अविनाश शुक्ला को चोरी के रैकेट का मुख्य आरोपी माना है। 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में SIT ने अव‍िनाश शुक्ला को पहला आरोपी बताया और उसे इस बड़ी साजि‍श की मुख्य कड़ी बताया। SIT के अनुसार, अव‍िनाश के जर‍िए भक्तों के चढ़ावे का गबन किया गया था। जांच टीम ने कहा कि अव‍िनाश से जुड़े सबूतों की कड़ी की वजह से ही वे पांच अन्य आरोपियों की पहचान कर पाए और मंदिर के दान-गिनती सिस्टम के अंदर ऑपरेशन का पूरा घटनाक्रम समझ पाए। अवि‍नाश शुक्ला उन छह लोगों में से पहला व्यक्ति है, ज‍िसकी शुरुआती तौर पर संलिप्तता सीसीटीवी फुटेज, रिकवरी रिकॉर्ड, बैंक खाते की जांच और गवाहों के बयानों से साबित हुई है। SIT के अनुसार, बाकी आरोपियों के खिलाफ मामला तब तैयार किया गया, जब टीम ने उनसे जुड़े सबूतों की जांच की, जिससे वे जांच का मुख्य केंद्र बन गए।

तीन आरोप‍ियों को र‍िमांड पर ल‍िया

वहीं पुलिस ने तीन आरोपियों को करीब 40 घंटे की रिमांड पर ले लिया है। पुलिस टीम बुधवार सुबह 7:36 बजे फैजाबाद जेल पहुंची और आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय को पुलिस लाइन लेकर गई। SIT रिपोर्ट के अनुसार, तीनों आरोपी CCTV फुटेज में नोटों को जेब में रखते हुए नजर आए थे। इस बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि चंपत राय से मिलने पहुंचे हैं। चंपत राय राम मंदिर के निकट रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम में एकांतवास कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने लेटर जारी कर चुप्पी तोड़ी थी। कहा था- मेरे ऊपर लगे सभी आरोप झूठे हैं।

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की जांच तेज

इधर, SIT ने अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बड़े आयोजनों के खर्च की जांच शुरू कर दी है। SIT 22 जनवरी 2024 के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह और 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण के बिल और वाउचर खंगाल रही है। रिकॉर्ड के मुताबिक, प्राण-प्रतिष्ठा पर 113 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसमें 8 हजार मेहमान आए थे। वहीं ध्वजारोहण पर 10.12 करोड़ खर्च हुए। जबकि अयोध्या पुलिस ने मिल्कीपुर क्षेत्र में छापेमारी की। पुलिस ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा के चाचा के साथ इनायतनगर के एक सर्राफा कारोबारी और एक बिल्डिंग मैटेरियल कारोबारी के यहां भी दबिश दी। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी द्वारा खरीदी गई संपत्ति या सामान के भुगतान का तरीका (पेमेंट मोड) क्या था।

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राममंदिर के नए महासचिव बोले-चोरी करने वालों को सजा दिलाएंगे

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। चंपत राय की जगह नए ट्रस्टी रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। कृष्ण मोहन दलित समाज से हैं। महासचिव बनने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा- चढ़ावा चोरी करने वालों को सजा दिलाएंगे। मैनेजमेंट की कमियों का फायदा उठाया गया। उन कमियों को दूर करेंगे, जिससे दोबारा ऐसी घटना न हो। समाज में दोबारा विश्वास स्थापित करेंगे। समाज में जो माहौल बना है, इससे हमारे न्यास की छवि धूमिल हुई है। मेरा प्रयास रहेगा कि हम सभी न्यासी लोग इस धूमिल छवि को सही करने का प्रयास करेंगे।

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राम गोपाल यादव बोले- सिर्फ नौकरों पर FIR हुई

सपा सासंद राम गोपाल यादव ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर कहा- SIT तब गठित होती है जब पहले FIR दर्ज होती है लेकिन उन्होंने पहले SIT गठित कर दी और FIR बाद में की है। किसी के खिलाफ FIR नहीं हुई है, जो वहां नौकर थे उनके खिलाफ FIR हुई है।

राम मंदिर को अब तक 3,264 करोड़ रुपए दान मिले

ट्रस्ट के अनुसार, निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस डोनेशन से अब तक 3,264 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। इनमें से 2,370 करोड़ रुपए मंदिर निर्माण और अन्य कामों पर खर्च किए गए। ट्रस्ट बनने से 31 मार्च 2026 तक श्रद्धालुओं से 582 करोड़ रुपए का चढ़ावा मिला। इसमें 391 करोड़ रुपए मंदिर संचालन और अन्य खर्चों पर उपयोग किए गए, जबकि शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित है। श्रद्धालुओं द्वारा भेंट किए गए 2,926 प्रकार के उपहारों का पूरा रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास है। हर साल स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म इनका सत्यापन करती है। श्रद्धालु समय लेकर अपने दान की जानकारी भी ले सकते हैं।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की कथित चोरी और गबन से जुड़ा है। एसआईटी जांच के बाद 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दान की गिनती के दौरान रकम का गबन किया। पुलिस का दावा है कि कुछ आरोपियों ने चोरी के पैसों से संपत्तियां भी खरीदीं, जिनकी जांच जारी है। अब पुलिस रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ को इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में अहम माना जा रहा है।

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