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मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज, कई मंत्रियों की छुट्टी और नए चेहरों की एंट्री की संभावना

मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज, कई मंत्रियों की छुट्टी और नए चेहरों की एंट्री की संभावना

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Modi Cabinet Reshuffle Analysis : नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में एक बार फिर कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में लगातार ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पार्टी और सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि आगामी संसद के मानसून सत्र और अगले साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकती है। इस फेरबदल का उद्देश्य सरकार के कामकाज को और मजबूत करना, चुनावी राज्यों में राजनीतिक संतुलन बनाना और नए चेहरों को मौका देना हो सकता है।

कब हो सकता है कैबिनेट विस्तार?

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई के आसपास शुरू होने की संभावना है। ऐसे में चर्चा है कि कैबिनेट विस्तार सत्र शुरू होने से पहले जुलाई में किया जा सकता है। हालांकि कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार फिलहाल संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर ध्यान देना चाहती है। इनमें ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और परिसीमन जैसे बड़े प्रस्ताव शामिल बताए जा रहे हैं। क्योंकि इन मुद्दों पर सरकार को विपक्ष का सहयोग भी चाहिए होगा, इसलिए कुछ सूत्रों का मानना है कि कैबिनेट फेरबदल को सितंबर या अक्टूबर तक टाला जा सकता है, ताकि किसी तरह की राजनीतिक नाराजगी से बचा जा सके।

किन मंत्रियों की कुर्सी पर मंडरा रहा है खतरा?

सूत्रों के मुताबिक, इस बार मंत्रियों के कामकाज और प्रदर्शन की समीक्षा को सबसे बड़ा आधार माना जाएगा। बताया जा रहा है कि सरकार पहले ही मंत्रियों के काम की समीक्षा कर चुकी है और उसी के आधार पर आगे फैसला लिया जा सकता है। कुछ मंत्रियों के विभागों को लेकर विवाद भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। उदाहरण के तौर पर NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। हालांकि सरकार की ओर से उनके भविष्य को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। इसके अलावा जिन मंत्रियों की उम्र 70 से 80 वर्ष के बीच है, उनके भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि पार्टी आने वाले चुनावों को देखते हुए युवा नेतृत्व को अधिक अवसर देना चाहती है। केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को उत्तर प्रदेश और दिल्ली भाजपा की जिम्मेदारी मिलने के बाद यह भी चर्चा है कि ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति के तहत उनमें से कुछ नेताओं को मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। हालांकि उत्तर प्रदेश के चुनाव और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।

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किन नए चेहरों को मिल सकता है मौका?

बता दें कि अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड सहित 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इन राज्यों से आने वाले नेताओं को मंत्रिमंडल में ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। इसके अलावा महिला आरक्षण कानून के भविष्य में लागू होने और ओबीसी वर्ग को लेकर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच सरकार युवा, महिला और पिछड़े वर्ग के नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है। वहीं कुछ पूर्व नौकरशाहों के नाम भी चर्चा में हैं। इनमें पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल में हाल के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुछ भाजपा सांसदों को भी मंत्री बनाया जा सकता है। इसके अलावा अन्य दलों से भाजपा में आए कुछ नेताओं को भी मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन सभी नामों को लेकर फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलें ही सामने आई हैं।

राज्यसभा का गणित भी रहेगा अहम

मंत्रिमंडल में बदलाव के दौरान राज्यसभा और लोकसभा का संतुलन भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं क्योंकि उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया है। वहीं रवनीत सिंह बिट्टू अभी मंत्री बने हुए हैं, जबकि वे किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी ने उन्हें पंजाब में संगठन और चुनावी रणनीति पर काम करने की जिम्मेदारी दी है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल भी इसी वर्ष समाप्त होने वाला है। ऐसे में इन नेताओं के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं।

कुछ नेताओं को मिल सकती है राज्यपाल की जिम्मेदारी

राजनीतिक जानकारों में यह भी चर्चा है कि जिन वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर किया जाएगा, उनमें से कुछ को राज्यपाल बनाया जा सकता है। आने वाले महीनों में कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के राज्यपालों का कार्यकाल पूरा होने वाला है। ऐसे में नए राज्यपालों की नियुक्ति भी जल्द हो सकती है। माना जा रहा है कि सरकार अनुभवी नेताओं को इन पदों पर भेज सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी का व्यस्त कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिजी शेड्यूल के चलते उनके पास समय की काफी कमी है। वे 1 से 3 जुलाई तक जापानी प्रधानमंत्री के दौरे में व्यस्त रहेंगे। 4 जुलाई को राजस्थान जाएंगे और 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड के दौरे पर रहेंगे। ऐसे में मॉनसून सत्र से पहले सिर्फ 5 जुलाई का दिन ही बचता है। हालांकि, 2021 में भी मॉनसून सत्र से ठीक पहले रातों-रात 36 नए मंत्रियों को शामिल कर बड़ा फेरबदल किया गया था।

राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, तभी से शुरू हुई चर्चा

केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाएं हाल हीमें तक शुरू हुई। जब प्रधानमंत्री मोदी 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के इतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इसके दो दिन बाद 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात से इन अटकलों को और बल मिला। अधिकारियों ने इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि दोनों नेता नियमित अंतराल पर राष्ट्रपति से मिलते रहते हैं। हालांकि, इस बात की प्रबल संभावना है कि प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में फेरबदल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई होगी।

कैबिनेट में अब तक हुए विस्तार

पिछले 12 सालों में कैबिनेट में चार बार विस्तार हुआ है।
नवंबर 2014: 21 नए मंत्री शामिल किए गए।
जुलाई 2016: 19 नए मंत्री शामिल किए गए, 5 को हटाया गया।
सितंबर 2017: 9 नए मंत्री शामिल किए गए, 4 को प्रमोट किया गया, 6 को हटाया गया।
जुलाई 2021: 36 नए मंत्री शामिल किए गए, 12 को हटाया गया।

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