यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों का सिलेक्शन संतोषजनक नहीं
958 में से मात्र 53 अभ्यर्थी का सिलेक्शन
देश में करीब 17-18 प्रतिशत आबादी है मुसलमान की
टॉप 30 में मात्र 3 मुस्लिम उम्मीदवार सफल
जयपुर (रॉयल पत्रिका) I देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिनी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा (UPSC Exam) के फाइनल नतीजे सामने आ गए हैं I इस बार अनुज अग्निहोत्री ने परीक्षा में टॉप किया है I वहीं, टॉप-50 उम्मीदवारों की लिस्ट में ए आर राजा मोहिद्दीन और इफरा शम्श अंसारी जैसे मुस्लिम उम्मीदवारों ने भी जगह बनाकर खास पहचान बनाई है I
दरअसल, सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में मानी जाती है, जिसके जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) समेत कई अहम सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है I इस बार जारी रिजल्ट में ए आर राजा मोहिद्दीन, मुस्लिम उम्मीदवारों में टॉप करने वालों में अव्वल हैं, जिनकी रैंक 7वीं है I इसी तरह इफरा शम्श अंसारी ने ओवर ऑल 25वीं रैंक हासिल कर मुस्लिम महिला उम्मीदवारों में पहले नंबर पर हैं I
UPSC CSE में कैसे होता है सेलेक्शन ?
सिविल सेवा परीक्षा तीन अहम चरणों में आयोजित की जाती है I प्रारंभिक परीक्षा (Prelims), मुख्य परीक्षा (Mains) और व्यक्तित्व परीक्षण (Personality Test या Interview) I इन तीनों चरणों को सफलतापूर्वक पार करने के बाद ही उम्मीदवारों का फाइन सेलेक्शन किया जाता है I रैंक के आधार पर उन्हें IAS, IPS, IFS जैसी प्रतिष्ठित पदों पर तैनाती दी जाती है I
सिविल सेवा परीक्षा 2025 की चयन प्रक्रिया की शुरुआत मई 2025 में हुई थी, जब प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई I प्रीलिम्स परीक्षा 25 मई 2025 को हुई थी I इसके बाद 22 अगस्त से 31 अगस्त 2025 के बीच मुख्य परीक्षा आयोजित की गई I वहीं, आखिरी चरण यानी पर्सनैलिटी टेस्ट या इंटरव्यू 27 फरवरी 2026 को खत्म हुआ I इंटरव्यू इस परीक्षा का अंतिम चरण होता है, जिसके पूरा होने के बाद ही अंतिम परिणाम जारी किया जाता है I अब परीक्षा के तीनों चरण पूरे हो चुके हैं और आयोग ने आखिरकार फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है I
देश में जनसंख्या अनुपात की अपेक्षा मुस्लिम उम्मीदवारों का सिलेक्शन काफी कम है
देश में मुसलमानों की जनसंख्या करीब 17-18% के आस-पास है I लेकिन यूपीएससी की इस प्रतिष्ठित परीक्षा में मात्र 5 प्रतिशत मुस्लिम प्रतिभागियों को ही सफलता मिली है I जबकि जनसंख्या के हिसाब से करीब 175-180 मुस्लिम प्रतिभागियों को सफलता मिलनी चाहिए I इस बार यूपीएससी में करीब 50 के लगभग मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए हैं I इससे पता चलता है कि देश में मुस्लिम वर्ग अभी तक कितना शैक्षिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है I शिक्षा में पिछड़ा होने के कारण मुस्लिम का विकास नहीं हो पा रहा है I समाज के पास उपलब्ध साधनों और संसाधनों का सही तरीके से प्रयोग नहीं हो पा रहा है I समाज में कम शिक्षा होने के कारण राजनीति में भी पिछड़ता जा रहा है, मुसलमानों में बेरोजगारी भी बढ़ती जा रही है।
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