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डॉ. ज़ाकिर हुसैन:

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एक महान शिक्षक से लेकर भारत के राष्ट्रपति बनने तक का सफर

परिचय (8 फरवरी 1897 – 3 मई 1969)

डॉ. जाकिर हुसैन खान एक प्रतिष्ठित भारतीय शिक्षाविद और राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने 1962 से 1967 तक भारत के उपराष्ट्रपति और 13 मई 1967 से 3 मई 1969 को अपनी मृत्यु तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

हैदराबाद में एक अफरीदी पश्तून परिवार में जन्मे डॉ. ज़ाकिर हुसैन ने अपनी स्कूली शिक्षा इटावा से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ के मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज और बर्लिन विश्वविद्यालय में अध्ययन किया, जहाँ से उन्होंने अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

  • संस्थापक सदस्य: वे जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।

  • कुलपति: उन्होंने 1926 से 1948 तक जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति के रूप में कार्य किया।

‘नई तालीम’ और शिक्षा नीति

1937 में, डॉ. हुसैन ने बुनियादी राष्ट्रीय शिक्षा समिति की अध्यक्षता की। उन्होंने ‘नई तालीम’ (New Education) नाम से एक नई शिक्षा नीति तैयार की, जिसमें मातृभाषा में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया था।

राजनीतिक विचारधारा और स्वतंत्रता संग्राम

वे महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी थे और मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचक मंडल की नीति के कड़े विरोधी थे। इसी कारण 1946 में मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग ने उन्हें अंतरिम सरकार में शामिल करने के प्रस्ताव को वीटो कर दिया था।

स्वतंत्रता के बाद की भूमिका और महत्वपूर्ण पद

विभाजन के बाद डॉ. हुसैन भारत में ही रहे और 1948 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के कुलपति नियुक्त हुए। उन्होंने इसे राष्ट्रीय उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में बचाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  1. राज्यपाल: 1957 से 1962 तक बिहार के राज्यपाल रहे।

  2. उपराष्ट्रपति: 1962 में भारत के उपराष्ट्रपति चुने गए।

  3. राष्ट्रपति: 1967 में वे भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति बने।

[यहाँ डॉ. ज़ाकिर हुसैन की राष्ट्रपति पद की शपथ लेते हुए फोटो लगाई जा सकती है]

राष्ट्रपति के रूप में ऐतिहासिक कार्यकाल

शपथ ग्रहण के समय डॉ. ज़ाकिर ने ऐतिहासिक शब्द कहे थे:

“पूरा भारत मेरा घर है और यहाँ के लोग मेरा परिवार हैं। मेरा यह दृढ़ प्रयास रहेगा कि मैं इस घर को मजबूत और सुंदर बनाऊँ।”

सम्मान और पुरस्कार

शिक्षा और राष्ट्र सेवा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया:

  • पद्म विभूषण (1954)

  • भारत रत्न (1963)

निधन और अंतिम विश्राम

डॉ. ज़ाकिर हुसैन का कार्यकाल किसी भी भारतीय राष्ट्रपति में सबसे छोटा था। 3 मई 1969 को राष्ट्रपति भवन में हृदयघात से उनका निधन हो गया। वे पद पर रहते हुए मरने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति थे। उनकी मज़ार दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर में स्थित है।

स्मृति और विरासत

उनके सम्मान में भारत सरकार और विभिन्न संस्थानों ने कई कदम उठाए:

  • इंडिया पोस्ट: 1969 और 1998 में उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किए गए।

  • शैक्षणिक संस्थान: ‘ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज’ और जामिया में उनके नाम पर केंद्रीय पुस्तकालय स्थित है।

  • एशिया का सबसे बड़ा रोज़ गार्डन: चंडीगढ़ स्थित ‘ज़ाकिर हुसैन गुलाब उद्यान’ उन्हीं के नाम पर समर्पित है।

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