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इमाम जाफर सादिक़ (अ)

Jaipur

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जाफर अल- सादिक, हज़रत अली अ. स. की चौथी पीढ़ी में थे। आप के पिता इमाम मोहम्मद बाक़र एक वैज्ञानिक थे और मदीना में पढ़ाया करते थे। इमाम जाफ़र सादिक अलैहिस्सलाम एक वैज्ञानिक, चिन्तक और दार्शनिक थे। आप आधुनिक केमिस्ट्री के पिता जाबिर इब्ने हय्यान (गेबर) के उस्ताद थे और आप अरेबिक विज्ञान के स्वर्ण युग का आरंभकर्ता थे। इस्लाम का एक फिरका इनके नाम पर जाफरी फिरका कहलाता है । सूफी फिरका इन्हें वली मानता है। हज़रत इमाम जाफर ए सादिक अ.स.आईम्मा ए अहलेबेत (शिया फिरका) के 12 ईमामों मे से छठे ईमाम हैं। आप की विलादत (जन्म) मदीना मुनव्वरा मे 17 रब्बी उल् अव्वल 83 हिजरी मुताबिक 20 अप्रेल 702 ईसवी बरोज जुमेरात को हुई थी।आप के वालिद हज़रत इमाम मोहम्मद बाकिर अलैहिस्सलाम और वालदा फरदा बिन्ते कासिम रजि.  बिन्ते इब्ने मोहम्मद रजि.  बिन हज़रत अबूबक्र सिद्दिक रज़ि.  थीं ।

इमाम सादिक अलैहिस्सलाम के शिष्यों की संख्या चार हज़ार से अधिक थी। दूर दूर से लोग इनके पास ज्ञान हासिल करने के लिए आते थे। इनके प्रमुख शिष्यों में Father of Chemistry जाबिर इब्ने हय्यान, इमाम अबू हनीफ़ा रअ, जिनके नाम पर इस्लाम की हनफी शाखा है, तथा मालिक इब्न अनस (Malik Ibn Anas), मालिकी शाखा के प्रवर्तक, प्रमुख हैं ।आप का इल्म कमालात, माहारत, शर्क से गर्ब तक मशहुर है , सब का इत्तेफाक है के आप के इल्म से तमाम उलेमा तक कासिर थे। सुन्नियों के सब से बड़े ईमाम फिकह हज़रत ईमाम अबू हनीफा नोमानी रजि. आप के शागीर्द थे और अकीदत भी रखते थे।हज़रत ईमाम अबू हनीफा रअ दो साल तक ईमाम ज़ाफर ए सादिक अ.स. की खिदमत मे रहे।

वोह करामात ओ तसर्रूफात जो आपके आबा ओ अजदाद के वक़्त से परदे में थे आप से बिला तकल्लुफ ज़ाहिर हुए वोह अजीब तरीन इल्म जो वारीसतन सरकार ए दो आलम सल्लल्लाहोअलैहि वसल्लम से सिना ब सिना चले आ रहे थे आप ने ज़ाहिर किये  “आप फरमाते थे पूछलो जो कुछ पूछना है हमारे बाद कोई ऐसी बातें बताने वाला नही होगा”।सुन्नी न्यायशास्त्र ( फिकह)के आलिमों में इमाम जाफर सादिक़ (अ) का उच्च स्थान है। अबू हनीफा और मलिक बिन अनस ने उससे रिवायत किया है। अबू हनीफा उन्हें मुसलमानों में सबसे विद्वान व्यक्ति मानते थे।

कहा गया है कि इमाम जाफर सादिक़ (अ) ने सरकार के सम्मन के कारण कर्बला, नजफ़ और कूफा गए। उन्होंने अपने साथियों को इमाम हज़रत अली (अ) की क़ब्र को दिखाया, जो तब तक छिपी हुई थी। कुछ शिया विद्वानों का मानना है कि इमाम सादिक़ (अ) मंसूर के आदेश पर इमाम जाफर अ को ज़हर दिया गया था। इमाम जाफर सादिक़ (अ) की शहादत के बाद, शियों में विभिन्न शिया संप्रदाय पैदा हो गये, जिनमें इस्माइलिया, फ़तहिया और नावूसिया शामिल हैं। आप का विसाल 15 शव्वाल 148 हिजरी में हुआ और आपको मदीना मुनव्वरा में,  जन्नतुल बक़ी में दफ़नाया गया।आप एक वैज्ञानिक थे,तत्व ज्ञानी थे आप ने अरस्तू की थ्योरी को ग़लत साबित कर दिया था और खगोलीय ज्ञान आज भी खगोलीय वैज्ञानिक मानते हैं।आप ने बहुत सी करामात दिखाईं जिनमें एक मशहूर है कि गाय को ज़िन्दा कर दिया। इस्लामिक दुनिया में आप को सभी फिरके में बहुत मकबूलियत हासिल है।

फ़ज़लुर्रहमान

सहायक सचिव (सेवानिवृत्त)

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