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पाँच साल में 9 लाख ने छोड़ी नागरिकता:

जयपुर

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CAA लागू होने के बाद भी रुझान विपरीत

नागरिकता कानून और हकीकत

नई दिल्ली। भारत में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2024 में मोदी सरकार द्वारा लागू किया गया था। इसके लागू होने के बाद भी हिंदू भारत की नागरिकता लेने से ज्यादा नागरिकता छोड़ रहे हैं, जो सरकार के लिए एक चिंताजनक आंकड़ा है।

क्या था CAA का उद्देश्य?

CAA के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदुओं को भारत में नागरिकता दी जानी थी। हिंदुओं के अलावा सिख, जैन और बौद्धों को भी इसमें शामिल किया गया। सरकार की मंशा थी कि इन देशों में प्रताड़ित अल्पसंख्यक भारत आएं और इसे अपना देश मानें।

नागरिकता के आंकड़े: उम्मीद से काफी कम

आंकड़ों पर नजर डालें तो 2016-2021 तक औसतन 800 से 1700 लोग प्रति वर्ष पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए जिन्हें नागरिकता दी गई। वहीं, मई 2024 से दिसंबर 2025 तक CAA के तहत मात्र कुछ सौ (300-500 के आस-पास) लोगों को ही नागरिकता दी गई।

यह स्पष्ट है कि भारत आने वाले हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध बहुत कम संख्या में आकर भारत की नागरिकता ले रहे हैं।

देश छोड़ने वालों की बढ़ती संख्या

जहाँ एक तरफ मोदी सरकार ने CAA को संसद में इसलिए पास करवाया था जिससे लोग भारत आएं, वहीं दूसरी तरफ भारत के ज्यादातर धनाढ्य (अमीर) हिंदू, सिख, जैन एवं बौद्ध देश छोड़कर अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जाकर बस रहे हैं।

सरकार के दावे और विफलता

मोदी सरकार ने सोचा था कि विदेशों में रह रहे लोग भारत आएंगे, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। पिछले पाँच साल में 9 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है। संसद में मंत्री द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार, इन 9 लाख लोगों ने बेहतर जीवन, शिक्षा, नौकरी एवं अवसरों के लिए विदेशी नागरिकता चुनी और भारत छोड़ दिया।

क्या भारत में अवसरों की कमी है?

अब सवाल यह उठता है कि यदि भारत में अच्छी शिक्षा, नौकरी और जीवन प्रणाली मिल रही है, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग देश क्यों छोड़ रहे हैं? संभवतः देश छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा हिंदू धर्म के नागरिक ही हैं।

हिंदूवादी सरकार के लिए चिंता का विषय

यह आंकड़ा एक ‘हिंदूवादी सरकार’ के लिए चिंताजनक है। प्रधानमंत्री मोदी को हिंदू हृदय सम्राट और हिंदूवादी नेता के तौर पर जाना जाता है। सरकार सोच रही है कि भारत हिंदुओं के लिए सुरक्षित बने, जबकि देश के संपन्न हिंदू ही देश छोड़कर जा रहे हैं। इसे मोदी सरकार की विफलताओं में ऊपर माना जा सकता है।

सवाल जो अब उठ रहे हैं

  • क्या हिंदू समुदाय अब भाजपा सरकार की नीतियों से खुश नहीं है?

  • क्या देश छोड़ने वाले भारत पर किसी आने वाले संकट से आशंकित हैं?

  • क्या वे भारत में संभावित आने वाली अशांति से डरे हुए हैं?

  • क्या उनको मौजूदा शासन और नेताओं पर भरोसा नहीं रहा?

कुछ तो ऐसा है जो देश छोड़ने वाले सोच रहे हैं और कुछ ऐसा भी है जो बाहर से दूसरे देशों की नागरिकता छोड़कर भारत में नहीं आ रहे, जबकि सरकार उनको बुलाना चाहती है।

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