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पाकिस्तान, तुर्की समेत 8 मुस्लिम देश हुए इजरायल के खिलाफ एकजुट

इस्लामाबाद

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पूर्वी येरूशलम में UNRWA मुख्यालय पर IDF के हमले की निंदा

इस्लामाबाद (एजेंसी)। इजरायल और फिलिस्तीन संघर्ष के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। पाकिस्तान और तुर्की सहित आठ प्रमुख मुस्लिम देश एक मुद्दे पर इजरायल के खिलाफ एकजुट हो गए हैं।

इन सभी देशों ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी (UNRWA) का मजबूत समर्थन व्यक्त किया है। साथ ही, पूर्वी येरूशलम में स्थित यूएनआरडब्ल्यूए के दफ्तर पर इजरायली सैनिकों (IDF) द्वारा किए गए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। देशों ने स्पष्ट किया कि गाजा में चल रहे अभूतपूर्व मानवीय संकट के बीच एजेंसी की भूमिका “अतुलनीय” है।

पाकिस्तान ने जारी किया संयुक्त बयान

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को आठ देशों की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें शामिल देश हैं: पाकिस्तान, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।

इन देशों के विदेश मंत्रियों ने “फिलिस्तीनी शरणार्थियों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा में संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) की अपरिहार्य भूमिका” की पुन: पुष्टि की।

  • अनोखी जिम्मेदारी: बयान में कहा गया कि दशकों से UNRWA अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा सौंपी गई अनोखी जिम्मेदारी निभा रहा है।

  • बुनियादी सेवाएं: यह एजेंसी लाखों फिलिस्तीनी शरणार्थियों को सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक सेवाएं और आपातकालीन सहायता प्रदान करती आ रही है।

गाजा में ‘अतुलनीय’ है भूमिका

आठों देशों ने गाजा पट्टी में जारी संकट के मद्देनजर UNRWA के कार्यों को सराहा है।

  • जीवनरेखा: बयान में कहा गया कि गाजा में शरणार्थी समुदायों के लिए UNRWA के स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं जीवनरेखा बने हुए हैं।

  • निष्पक्ष वितरण: अपने वितरण केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से यह एजेंसी जरूरतमंदों तक भोजन और राहत सामग्री निष्पक्ष और कुशलता से पहुंचा रही है।

  • अंतरराष्ट्रीय विश्वास: मंत्रियों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा UNRWA के जनादेश को अतिरिक्त तीन वर्षों के लिए नवीनीकृत करना यह दर्शाता है कि दुनिया को इस एजेंसी पर भरोसा है।

कोई विकल्प मौजूद नहीं

संयुक्त बयान में जोर देकर कहा गया कि UNRWA की भूमिका “अतुलनीय” है। किसी अन्य संस्था के पास फिलिस्तीनी शरणार्थियों की जरूरतों को पूरा करने या इतने बड़े पैमाने पर सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा, विशेषज्ञता और मौके पर उपस्थिति नहीं है।

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