11 वर्ष के मोहम्मद सिदान को मिला PM बाल पुरस्कार:
बहादुरी के लिए राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
दो बच्चों की जान बचाकर पेश की मिसाल — अन्य वीर बालकों को भी मिला सम्मान
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार (26 दिसंबर) को नई दिल्ली में बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार बहादुरी, समाज सेवा, पर्यावरण, खेल, कला, संस्कृति, विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियों के लिए बच्चों को दिया जाता है।
“बच्चों ने देश का नाम रोशन किया”
इस भव्य आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार पाने वाले बच्चों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुरस्कार जीतने वाले बच्चों ने अपने परिवारों, अपने समुदायों और पूरे देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि ये पुरस्कार देश भर के सभी बच्चों को प्रेरित करेंगे।
बहादुरी की मिसाल: सिदान और अजय राज
राष्ट्रपति ने विशेष रूप से उन बच्चों का जिक्र किया जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की मदद की:
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मोहम्मद सिदान और अजय राज: राष्ट्रपति ने कहा कि अजय राज और 11 वर्षीय मोहम्मद सिदान पी, जिन्होंने अपनी बहादुरी और समझदारी से दूसरों को बचाया, वे तारीफ के हकदार हैं। सिदान ने दो बच्चों की जान बचाई थी।
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मरणोपरांत सम्मान: नौ साल की बेटी व्योमा प्रिया और ग्यारह साल के बहादुर बेटे कमलेश कुमार ने अपनी हिम्मत से दूसरों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवा दी। उनकी शहादत को नमन किया गया।
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ऑपरेशन सिंदूर: दस साल के श्रवण सिंह की भी सराहना की गई, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान युद्ध से जुड़े खतरों के बीच, अपने घर के पास बॉर्डर पर तैनात भारतीय सैनिकों को नियमित रूप से पानी, दूध और लस्सी पहुंचाई।
साहिबजादों की कुर्बानी को किया याद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में इतिहास के पन्नों को पलटते हुए गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार के त्याग को याद किया।
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320 साल पुरानी शहादत: उन्होंने कहा कि लगभग 320 वर्ष पहले, सिख धर्म के दसवें गुरु और उनके चार बेटों ने सच और इंसाफ के लिए लड़ते हुए कुर्बानी दी थी।
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वैश्विक सम्मान: उन्होंने कहा कि दो सबसे छोटे साहिबजादों की बहादुरी को भारत और विदेश दोनों जगह सम्मान और इज्जत दी जाती है।
देश का भविष्य
प्रेसिडेंट ने कहा कि किसी देश की महानता तब दिखती है जब उसके बच्चे देशभक्ति और ऊंचे आदर्शों से भरे हों। उन्होंने यह देखकर खुशी जताई कि बच्चों ने बहादुरी, कला और संस्कृति, पर्यावरण, इनोवेशन, साइंस और टेक्नोलॉजी, समाज सेवा और खेल में अपनी असाधारण प्रतिभा दिखाई है।
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