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न नौकरी, न प्रैक्टिस! विदेश से MBBS करने वाले डॉक्टर परेशान, जानें क्या है मामला

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जयपुर। विदेश से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई करके राजस्थान लौटे करीब एक हजार डॉक्टरों का भविष्य अधर में लटक गया है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) की ओर से परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं मिलने के कारण ये डॉक्टर न तो सरकारी या निजी नौकरी कर पा रहे हैं और न ही निजी प्रैक्टिस शुरू कर पा रहे हैं। पिछले कई महीनों से ये डॉक्टर राजस्थान मेडिकल काउंसिल और नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के बीच चक्कर काटने को मजबूर हैं।

जानें क्या है पूरा मामला?

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ NMC की ओर से मार्च 2025 में जारी किए गए दो नोटिफिकेशन हैं। पहले 6 मार्च को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसे बाद में 18 मार्च को वापस लेते हुए नई गाइडलाइन जारी कर दी गई। इन गाइडलाइन्स का उद्देश्य उन फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) की समस्याओं का समाधान करना था, जिन्होंने कोविड-19 महामारी या युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अपनी मेडिकल पढ़ाई का कुछ हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया था।

ऑनलाइन पढ़ाई के बदले फिजिकल क्लास से भरपाई

नई गाइडलाइन के अनुसार, जिन छात्रों ने विदेश में पढ़ाई के दौरान ऑनलाइन क्लास की है, उन्हें उस अवधि की भरपाई फिजिकल क्लास के माध्यम से करनी होगी। इसके लिए दो विकल्प दिए गए हैं।

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पहला : छात्र उसी विदेशी विश्वविद्यालय में अतिरिक्त कक्षाएं लेकर या कोर्स की अवधि बढ़ाकर ऑनलाइन पढ़ाई की भरपाई करें। इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से कंपनसेटरी सर्टिफिकेट और ट्रांसक्रिप्ट देना जरूरी होगा।

दूसरा : विकल्प उन छात्रों के लिए है जो विदेशी विश्वविद्यालय में फिजिकल क्लास के जरिए भरपाई नहीं कर पाए हैं। ऐसे छात्रों को भारत में एक या दो साल की क्लर्कशिप करनी होगी। जिन छात्रों की पढ़ाई फाइनल ईयर में प्रभावित हुई थी, उन्हें एक साल की क्लर्कशिप करनी होगी, जबकि जिनकी पढ़ाई फाइनल ईयर से पहले प्रभावित हुई थी, उन्हें दो साल की क्लर्कशिप करनी पड़ेगी।

18 नवंबर 2021 या उसके बाद एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट : इन पर CRMI रेगुलेशन 2021 लागू होगा। इन्हें FMGE परीक्षा पास करने के बाद भारत में 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होगी।

18 नवंबर 2021 से पहले एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट : इन पर स्क्रीनिंग टेस्ट रेगुलेशन 2002 लागू होगा। अगर ऐसे छात्रों ने अपने विदेशी कॉलेज में ही फिजिकल मोड में पूरी पढ़ाई, भरपाई और इंटर्नशिप पूरी कर ली है। उनका वैलिड सर्टिफिकेट है, तो उन्हें भारत में दोबारा अतिरिक्त इंटर्नशिप करने की जरूरत नहीं है।

भारत में क्लर्कशिप और इंटर्नशिप की शर्तें व फीस

भारत के मेडिकल कॉलेज FMG छात्रों से क्लर्कशिप के लिए अधिकतम हजार रुपए प्रति महीना ही फीस ले सकते हैं। क्लर्कशिप खत्म होने के बाद जब छात्र अपनी 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शुरू करेंगे तो उन्हें भारतीय मेडिकल छात्रों के बराबर ही स्टाइपेंड मिलेगा। पुराने मेडिकल कॉलेजों में FMG स्टूडेंट्स के लिए कुल स्वीकृत एमबीबीएस सीटों का केवल 7.5% हिस्सा ही इंटर्नशिप/क्लर्कशिप के लिए उपलब्ध होगा, जबकि नए कॉलेज जहां अभी अपना इंटर्नशिप बैच नहीं है, वहां यह 100 फीसदी तक हो सकता है।

पासपोर्ट और वेरिफिकेशन

स्थायी रजिस्ट्रेशन देने की पूरी जिम्मेदारी राज्यों की स्टेट मेडिकल काउंसिल की होगी। काउंसिल छात्रों के पासपोर्ट में दर्ज एंट्री-एग्जिट के रिकॉर्ड से यह अच्छी तरह जांच करेगी कि छात्र ने वास्तव में विदेश में जाकर फिजिकल क्लास की है या नहीं। नियमों को पूरा किए बिना किसी भी छात्र को परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं दिया जाएगा।

समय सीमा

सभी FMG छात्रों को अपनी विदेशी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने की तारीख से 10 साल के भीतर अपनी इंटर्नशिप समेत पूरा कोर्स खत्म करना होगा, तभी उनकी डिग्री भारत में मान्य होगी।

RMC का तर्क : NMC से गाइडलाइन मांगी

राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोपाल गोयल ने कहा- NMC ने जो आदेश निकाले हैं, उससे FMG के रजिस्ट्रेशन को लेकर परेशानी आ रही है। ऑनलाइन स्टडी और 10 साल में कोर्स कम्पलीशन को लेकर हमने NMC से गाइडलाइन मांगी है। गाइडलाइन आने के बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तेज कर देंगे। NMC ने 6 मार्च और 18 मार्च को दो नोटिफिकेशन निकाले थे,उनमें क्लियरिटी नहीं थी। फिलहाल, करीब एक हजार फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स रजिस्ट्रेशन के इंतजार में हैं। उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और लाखों रुपये खर्च कर डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया है, लेकिन अब रजिस्ट्रेशन में देरी के कारण उनका करियर और भविष्य दोनों संकट में हैं।

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