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राज्य

जयपुर

अंत में गहलोत पर हमला बोलते हुए राठौड़ ने कहा, "गहलोत साहब पहले अपने गिरेबान में झाँकें कि उनके समय राजस्थान की क्या दशा थी—अपराध में वृद्धि, प्रशासनिक अव्यवस्था और लगातार आपाधापी। अब बिना तथ्यों के आरोप लगाना उनकी हताशा को ही दर्शाता है।" Read More

शिक्षा विभाग ने शौर्य दिवस मनाने का आदेश वापस लिया

जयपुर

राजस्थान के शिक्षा विभाग ने 6 दिसंबर को स्कूलों में 'शौर्य दिवस' मनाने के आदेश को रविवार को वापस ले लिया है। यह आदेश शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर जारी हुआ था, जिसका मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया था। आलोचकों का कहना है कि शिक्षा मंत्री सुधार के बजाय विभाजनकारी राजनीति कर रहे हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नाराजगी…

असम में दूसरी शादी करने पर होगी 10 साल तक की जेल: विधानसभा से बिल पास

गुवाहाटी

असम विधानसभा ने बहुविवाह (Polygamy) पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित कर दिया है। अब असम में दूसरी शादी करने पर 7 से 10 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, अनुसूचित जनजाति (ST) और छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को इससे छूट दी गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि यह कानून इस्लाम के खिलाफ नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण के लिए है और इसमें…

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‘मन की बात’ प्रधानमंत्री के देशवासियों से आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक — भजनलाल शर्मा

जयपुर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 128वें एपिसोड में देश की कृषि उपलब्धियों की सराहना करते हुए बताया कि भारत ने 357 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने जी-20 के दौरान कनाडा के पीएम को उदयपुर की चांदी की शिल्पकला भेंट करने का जिक्र कर 'वोकल फॉर लोकल' पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों की जीत, नौसेना दिवस और विन्टर टूरिज्म पर…

5 दिसंबर तक वक़्फ़ संपत्तियों का उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो क्या होगा?

जयपुर

राजस्थान और देशभर में वक़्फ़ संपत्तियों को केंद्र सरकार के 'उम्मीद पोर्टल' पर रजिस्टर करने की अंतिम तारीख 5 दिसंबर 2025 नजदीक है। लेकिन पोर्टल के सर्वर में तकनीकी खामियों, धीमी गति और वक़्फ़ कमेटियों की लापरवाही के चलते रजिस्ट्रेशन का काम बहुत धीमा है। राजस्थान में 19,044 संपत्तियों में से अब तक केवल 6,840 का ही रजिस्ट्रेशन हो पाया है। यदि तय समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो हजारों…

मोबाइल एडिक्शन: डिजिटल दुनिया का फंदा, जो दिमागी बीमारियों को दे रहा जन्म

जयपुर

यह लेख मोबाइल एडिक्शन के बढ़ते खतरों और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभावों (जैसे अनिद्रा, आंखों की रोशनी कम होना, नोमो-फोबिया) को उजागर करता है। इसमें महाराष्ट्र के सांगली जिले के एक गांव का उदाहरण दिया गया है, जहां लोग शाम को 'डिजिटल डिटॉक्स' का पालन करते हैं। लेख में युवाओं और बच्चों पर एल्गोरिदम ट्रैप और स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई है। अंत में,…

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12वीं आर्ट्स के बाद ये 10 कोर्स बना सकते हैं शानदार करियर: जानिए बेस्ट करियर ऑप्शन्स

जयपुर

यह लेख उन छात्रों के लिए एक गाइड है जिन्होंने 12वीं कक्षा आर्ट्स (कला वर्ग) से पास की है। इसमें इस मिथक को तोड़ा गया है कि आर्ट्स में करियर के विकल्प सीमित हैं। लेख में 10 प्रमुख कोर्सेज की जानकारी दी गई है, जिनमें पारंपरिक बीए (BA) और टीचिंग से लेकर आधुनिक प्रोफेशनल कोर्स जैसे होटल मैनेजमेंट (BHM), लॉ (BA LLB), फैशन डिजाइनिंग, मीडिया (BJMC) और मैनेजमेंट (BBA) शामिल…

प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

जयपुर

यह पोस्ट भारतीय इतिहास और संस्कृति के महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान प्रश्नों का एक संग्रह है। इसमें चोल साम्राज्य की नौसैनिक शक्ति (नागपट्टिनम), प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति (चरक और सुश्रुत संहिता), और संस्कृत व्याकरण व साहित्य (पाणिनि, पतंजलि, मनुस्मृति) पर प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा, लेख का एक बड़ा हिस्सा बौद्ध धर्म को समर्पित है, जिसमें बुद्ध के प्रथम उपदेश, बौद्ध धर्म की शाखाओं (हीनयान-महायान), धर्मचक्र के महत्व और त्रिपिटक ग्रंथों…

हज़रत खालिद बिन वलीद (रज़ि.) और उनकी करामाती टोपी: एक अनकही दास्तान

जयपुर

यह लेख महान इस्लामी योद्धा हज़रत खालिद बिन वलीद (रज़ि.) के जीवन की प्रमुख घटनाओं पर आधारित है। इसमें जंगे ओहद में उनकी रणनीतिक भूमिका से लेकर इस्लाम कबूल करने के बाद 'सैफुल्लाह' (अल्लाह की तलवार) बनने तक का सफर बयां किया गया है। लेख का मुख्य केंद्र उनकी वह खास टोपी (कुलाह) है, जिसमें पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) के बाल मुबारक सिले हुए थे। हज़रत खालिद का मानना था…

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टीपू सुल्तान: शेर-ए-मैसूर (1751-1799)

जयपुर

यह लेख मैसूर के शासक टीपू सुल्तान (1751-1799) की जीवनी और उपलब्धियों पर प्रकाश डालता है। इसमें उनके सैन्य कौशल, विशेषकर रॉकेट तकनीक के जनक के रूप में उनकी भूमिका और अंग्रेजों के खिलाफ उनके संघर्षों का वर्णन है। लेख में उनके प्रशासनिक सुधारों, जैसे रेशम उद्योग की शुरुआत, नौसेना का गठन और हिंदू-मुस्लिम अधिकारियों की नियुक्ति का भी जिक्र है। अंत में, 1799 के चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध में अपनों…

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