रामगंज थाना इलाके में आपसी कहासुनी ने लिया हिंसा का रूप
- सम्पूर्ण क्षेत्र में अब शांति, पुलिस का अतिरिक्त जाप्ता तैनात
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। जयपुर के रामगंज थाना इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बाबू का टीबा मोहल्ले में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दो समुदायों के बीच कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया ! कुछ ही मिनटों में हालात बिगड़े और दोनों पक्षों के बीच जमकर पथराव शुरू हो गया। अफरा-तफरी के माहौल में कई गाड़ियां बनी निशाना, वाहन क्षतिग्रस्त और हवा में तैरते पत्थर ! रामगंज थानाधिकारी सुभाष यादव ने जानकारी दी कि विवाद की शुरुआत एक मंदिर में चल रहे धार्मिक आयोजन के दौरान हुई। बातों-बातों में तकरार बढ़ी और फिर हिंसा में तब्दील हो गई। बस थोड़ी कहासुनी हो रही थी कि अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई, स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने मौके पर मोर्चा संभाला और तुरंत कार्रवाई करते हुए करीब 8 उपद्रवियों को हिरासत में लिया। डीसीपी नॉर्थ राशि डोगरा ने कहा कि “हम CCTV फुटेज खंगाल रहे हैं, दोषी चाहे किसी भी समुदाय से हो… किसी को बख्शा नहीं जाएगा। माहौल खराब करने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है, शांति बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की हर गतिविधि पर पैनी नजर है।
आगे क्या किया जाए
रामगंज क्षेत्र या कोई दूसरे क्षेत्र में किसी न किसी बात को लेकर टकराव देखने को मिल जाता है। जयपुर वैसे तो आपसी भाईचारे एवं सौहार्द के लिए पहचाना जाता है लेकिन फिर भी जयपुर में बदलाव देखा जा रहा है। इसका मुख्य कारण है कि समाज के जिम्मेदार, जिनमें समाजसेवी, व्यापारी, बुद्धिजीवी, पुलिस, पत्रकार एवं राजनेता अपनी भूमिका सही से नहीं निभा रहे हैं। पत्रकार एवं राजनेता तो ऐसी घटनाओं में अपनी जिम्मेदारी भूलकर जातिवाद और धर्म के ठेकेदार ज्यादा नजर आते हैं। पत्रकारों और मीडिया द्वारा घटना को बढ़ा चढ़ाकर बताया जाता है तो राजनीतिक मौके से कैसे फायदा उठाया जाए, को ध्यान में रखकर राजनीति करने की कोशिश करते हैं। पुलिस शांति की कोशिश करती है लेकिन सत्ता के दबाव में उसको भी एक पक्ष में झुकाव दिखाना पड़ता है। पुलिस के निष्पक्ष कार्यवाही के बाद फिर से लोगों को कानून हाथ में लेने की हिम्मत नहीं पड़ती है। ऐसी ही जयपुर के बाबू के टीबा क्षेत्र में शनिवार रात की घटना है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्षेत्रीय लोगों की टीमें बनाई जा सकती है। वर्तमान शांति समिति और सीएलजी की टीमों को बदलने की जरूरत है और वास्तविक लोग जो समाज में प्रभाव रखते हैं को जिम्मेदार बनाने की जरूरत है। यदि ऐसा किया गया तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी। लेकिन वास्तविक दोषियों को सजा जरुर मिलनी चाहिए जिनके कारण समाज के लोगों को अशांति रहती है।
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