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जयपुर में वक्फ कमेटियों के पास करोड़ों का फंड

Jaipur

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-लेकिन शिक्षा, रोजगार एवं स्वास्थ्य पर खर्च नहीं किया जाता है

-जयपुर की दर्जनों वक्फ प्रॉपर्टी इंतजामियां कमेटियां जो हिसाब किताब में पारदर्शिता  नहीं रखती हैं और ना ही वक्फ बोर्ड में ठीक से हिसाब देती है

-वक्फ बोर्ड सीईओ नसीम खान की मंशा वक्फ बोर्ड में सुधार के बजाय कुछ और ही दिखाई देती है

 

जयपुर । जयपुर की घनी आबादी क्षेत्र में गरीब मुस्लिम परिवारों के पास रोजगार नहीं है । बच्चों को पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है, परिवार में पुरुष सदस्य शराब या अन्य नशा करने के कारण बर्बादी आ रही है। आर्थिक तंगी के कारण महिलाएं गलत रास्ते पर जा रही हैं । गरीब परिवार बेरोजगारी और गलत सामाजिक परंपराओं के कारण कर्ज के जाल में फंस रहे हैं । कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए घर एवं अन्य प्रॉपर्टी बेच रहे हैं । जयपुर के मुस्लिम क्षेत्रों में दर्जनों एनजीओ हैं, जो समाज सेवा के नाम पर कागज कार्रवाई एवं राजनीतिक चर्चा में ज्यादा भरोसा रखते हैं । सैंकड़ों मुस्लिम प्राइवेट स्कूल हैं और सैंकड़ों वक्फ कमेटियां हैं जिनमें मस्जिदों की कमेटियां, दरगाहों की कमेटियां एवं मुसाफिरखानों की कमेटियां  शामिल हैं जिनके पास कई करोड़ के फंड उपलब्ध हैं । यह फंड सिर्फ बैंकों में ब्याज लेने या फिर कमेटी सदस्यों के निजी कामों में काम आ रहा है । मुख्य रूप से ऐसी कमेटियां जिनमें बड़ी तादाद में फंड है उनमें मुख्य हैं- मुस्लिम मुसाफिरखाना कमेटी, मस्जिद हैजान फरोशान कमेटी, कुरैशी मुसाफिरखाना भिंडों का रास्ता कमेटी, दरगाह अमानीशाह इंतजामिया कमेटी, हसनपुरा में औलिया मस्जिद कमेटी, जौहरी बाजार स्थित जामा मस्जिद, मंसूरी समाज जमातखाना कर्बला, सी-स्कीम की मस्जिद कमेटी, मस्जिद कमेटी मुमताज बाग आदि। इसी तरह रामगंज, कर्बला, आदर्श नगर, जालूपुरा, शास्त्री नगर, भट्टा बस्ती और हसनपुरा में मस्जिद और दरगाह कमेटियां हैं जिनके पास लाखों का फंड है लेकिन समाज में शिक्षा रोजगार देने के काम नहीं आ रहा है ।

वक्फ कमेटियों का फंड क्यों समाज के काम नहीं आ रहा है-

जयपुर में मस्जिद एवं दरगाह कमेटियों में समाज के पहुंच वाले लोग शामिल हैं जिनकी विधायक, सांसद, वक्फ चेयरमैन या अधिकारियों तक पहुंच होती है । ऐसे लोग समाज का भला इसलिए नहीं चाहते हैं क्योंकि उनकी सोच होती है कि समाज में उनका वर्चस्व बना रहे और दूसरे लोग बराबरी पर नहीं आएं । यही कारण है कि ज्यादातर मस्जिद एवं दरगाह कमेटियों का फंड या तो बिना किसी काम आए बैंकों में पड़ा रहता है या खुद या कुछ कमेटी सदस्य अपने निजी काम में ले लेते हैं । यही कारण है कि मस्जिद कमेटियों और दरगाह कमेटियों के पास काफी ऐसे परिवार रहते हैं जो गरीब हैं अपने बच्चों को आर्थिक तंगी के कारण पढ़ा नहीं सकते हैं । घर में बीमार सदस्य का इलाज नहीं करवा सकते हैं, फिर भी ऐसी वक्फ कमेटिया उनकी सहायता नहीं करती हैं । मस्जिद कमेटियों का सिर्फ ध्यान रहता है कि उनकी कमेटी किसी भी तरह बनी रहे ।

वक्फ बोर्ड सीईओ की कार्यशैली-

वक्फ बोर्ड सीईओ नसीम खान ने राजस्थान के दर्जनों कमेटियों को नोटिस दिए हैं साथ में जयपुर स्थित कर्बला मैदान में अतिक्रमण करके मकान बनाने वालों को भी नोटिस दिए हैं । माना जा रहा है कि वक्फ बोर्ड सीईओ ने यह नोटिस इसलिए दिए जिससे उन पर दबाव बनाया जाकर समझौता किया जा सके । यदि सीईओ की नियत साफ है तो ऐसे अतिकर्मी मकान मालिकों पर मुकदमा दर्ज करवाना चाहिए । यदि वे वास्तव में अतिकर्मी हैं तो उन्हें या तो वक्फ बोर्ड का किराएदार बनाया जावे या फिर वक्फ बोर्ड को जमीन खाली करवाना चाहिए । लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है ।

जयपुर और प्रदेश की वक्फ कमेटियों को भीलवाड़ा सीरत सराय का भ्रमण करना चाहिए-

जयपुर की जिन वक्फ इंतजामिया कमेटियों के पास करोड़ों का फंड है, उन्हें भीलवाड़ा में सीरत सराय वक्फ प्रॉपर्टी और दाई हलीमा हॉस्पिटल का दौरा करना चाहिए। सीरत सराय वक्फ प्रॉपर्टी ट्रस्ट के अध्यक्ष वक्फ बोर्ड के निर्वाचित सदस्य शब्बीर शेख हैं जिन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर सीरत सराय ट्रस्ट के जरिए भीलवाड़ा के लोगों को शिक्षा, रोजगार आदि में मदद की साथ में दूसरी प्रॉपर्टी खरीद कर उन्हें विकसित करने का काम किया है । रोजगार के लिए कोऑपरेटिव बैंक बनाकर लोन दिया जाता है । इसलिए जयपुर वक्फ बोर्ड कमेटी के पदाधिकारियों को हाथ पैर हाथ रखकर बैठने के बजाय कुछ करने की सोचना चाहिए,  नहीं तो जमाना तेजी से बदल रहा है उनको समाज को भी हिसाब देना पड़ेगा और अल्लाह के यहां तो देना ही है ।

ए आर वेलफ़ेअर फाउंडेशन की तर्ज पर काम करना चाहिए वक्फ कमेटियों को-

जयपुर में ए आर वेलफेयर फाउंडेशन नाम से एक एनजीओ चलता है जिसके अध्यक्ष रिटायर्ड आईएस ए आर खान अध्यक्ष है । ए आर वेलफेयर फाउंडेशन मुस्लिम और गैर मुस्लिम बस्तियों में गरीब परिवारो की लड़कियों और महिलाओं को सिलाई की ट्रेनिंग, कड़ाई बुनाई और अन्य छोटे-छोटे रोजगार के लिए ट्रेनिंग देता है । गरीब बच्चों को किताब कपड़े भी वितरण करता है । ए आर वेलफेयर फाउंडेशन के जरिए अब तक हजारों गरीब महिलाओं को रोजगार मिल चुका है । जयपुर की वक्फ कमेटियां ए आर वेलफेयर फाउंडेशन से मिलकर समाज में रोजगार के अवसर बढ़ा सकती हैं या फिर ए आर वेलफेयर फाउंडेशन की तर्ज पर काम कर सकती हैं । जयपुर में गरीब मुस्लिम महिलाओं को रोजगार देने की सख्त जरूरत है क्योंकि बढ़ते नशे एवं बीमारी के कारण परिवार बर्बाद हो रहे हैं ।

 

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