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ध्रुवपद यात्रा 2025: जयपुर में सुरों की महफिल, दूसरे और तीसरे दिन का संगीतमय सफर

Jaipur

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जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ध्रुवपद यात्रा महोत्सव 2025 के तीसरे दिन भारत की सबसे प्राचीन शास्त्रीय संगीत परंपरा का शाश्वत सार गूंज उठा। यह प्रतिष्ठित आयोजन डागर घराने के संरक्षक स्वर्गीय अरविंद सिंह मेवाड़ को समर्पित था और इसे उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर भारतीय संगीत कला और संस्कृति सोसायटी एवं डागर अभिलेखागार संग्रहालय जयपुर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। महोत्सव को राजस्थान सरकार के कला और संस्कृति विभाग पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र राजीविका एवं राजस्थान राज्य खान और खनिज लिमिटेड सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तिलक समारोह से हुई जिसके बाद डागर घराने के महान कलाकारों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई इसके पश्चात डागर अभिलेखागार संग्रहालय द्वारा आयोजित कला प्रदर्शनी ने दर्शकों को शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ा। इस प्रदर्शनी में डागर घराने की दुर्लभ तस्वीरें हस्तलिखित रचनाएं और संगीत साधना से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रदर्शित किए गए। रेनबो पैलेट फाइन आर्ट अकादमी के युवा कलाकारों ने संगीत के भावों को रंगों में उकेरने का प्रयास किया। संत कुमार बिश्नोई के निर्देशन में हुए इस लाइव पेंटिंग सत्र में संगीत की तरंगों को कैनवास पर उतारने की अद्भुत कला देखने को मिली। शानदार मंच पृष्ठभूमि और अद्भुत दृश्य अनुभव प्रदान करने के लिए कॉल प्रो प्रोजेक्ट की टीम यूसुफ खिमानी बादशाह मियाँ और गिरिराज चिप्पा ने विशेष भूमिका निभाई जिससे समारोह की भव्यता और अधिक निखरकर सामने आई। ध्रुवपद यात्रा 2025 के तीसरे दिन की संगीतमय संध्या कई असाधारण प्रस्तुतियों से सजी रही।मिस मैरी लाइन ऑब्री ने राग यमन में आलाप और चौताल की शानदार प्रस्तुति दी उनके साथ पखावज पर आदित्य दीप और वायलिन पर संगत करते हुए दर्शकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान किया। गुंडेचा घराने की धनी गुंडेचा ने ध्यानेश्वर देशमुख के साथ मिलकर राग केदार प्रस्तुत किया उनकी प्रस्तुति में हर स्वर आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर था। पंडित पुष्पराज कोष्टी ने राग बागेश्री में सुरबहार की दुर्लभ प्रस्तुति दी उनके गहरे ध्यानपूर्ण आलाप ने श्रोताओं को एक अलग ही लोक में पहुंचा दिया।रुद्र वीणा वादक मुरली मोहन गौड़ा ने पंडित प्रवीण आर्य पखावज की संगत में राग आदि बसंत प्रस्तुत किया। जिसमें आलाप जोड़ और चौताल का शानदार मिश्रण था। इस बार के महोत्सव में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महिला कलाकारों की उल्लेखनीय भागीदारी रही पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस शास्त्रीय संगीत विधा में महिलाओं की उपस्थिति ने एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की। यह बदलाव न केवल ध्रुवपद की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है बल्कि इसमें महिला कलाकारों की सशक्त भूमिका को भी रेखांकित करता है। महोत्सव के समापन सत्र में  शबाना डागर और इमरान डागर ने प्रतिष्ठित कलाकारों को सम्मानित किया और भारतीय शास्त्रीय संगीत की इस अनमोल विरासत को सहेजने के अपने संकल्प को दोहराया। इस बार जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मीडिया स्टडीज को प्रमुख ज्ञान साझेदार के रूप में शामिल किया गया। जिसके छात्रों ने महोत्सव के दस्तावेजीकरण और शोध कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। यह पहल ध्रुवपद की अमूल्य धरोहर को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। ध्रुवपद यात्रा 2025 ने यह सिद्ध कर दिया कि यह महज एक संगीत महोत्सव नहीं बल्कि ध्वनि साधना और परंपरा का एक पवित्र संगम है। जयपुर की इस संगीतमयी यात्रा ने संगीत प्रेमियों को सदियों पुरानी परंपरा और आधुनिकता के बीच एक दिव्य सेतु प्रदान किया। इस आयोजन ने न केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत की गरिमा को बढ़ाया बल्कि यह भी प्रमाणित किया कि ध्रुवपद की गूँज कालातीत है और यह आने वाली पीढ़ियों को भी इसी तरह प्रेरित करती रहेगी।

 

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