अब्दुल कय्यूम अंसारी: स्वतंत्रता आंदोलन के मजबूत भागीदार
अब्दुल कय्यूम अंसारी का जन्म 1 जुलाई 1905 को डेहरी-ऑन-सोन, बंगाल प्रेसिडेंसी में हुआ था। उनका जन्म एक अमीर मोमिन/अंसारी परिवार में हुआ था। सासाराम ओर डेहरी-ऑन-सोन हाई स्कूल में अध्ययन करने के बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, कलकत्ता विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षा हासिल की, हालांकि भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष में उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण समय-समय पर उनकी शिक्षा बाधित हुई। बहुत कम उम्र में ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आह्वान के जवाब में सरकारी स्कूलों का बहिष्कार करने वाले छात्रों के लिए एक राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना की इसके लिए उन्हें 16 साल की छोटी उम्र में गिरफ्तार कर लिया गया और जेल में डाल दिया गया क्योंकि यह असहयोग और खिलाफत आंदोलन में भाग लेने के बराबर था। अब्दुल कय्यूम अंसारी एक कुशल पत्रकार, लेखक और कवि भी थे। स्वतंत्रता -पूर्व दिनों में वे उर्दू साप्ताहिक “अल-इस्लाह ” (सुधार) ओर एक उर्दू मासिक “मुसावत” के सम्पादक थे। उन्होंने मुस्लिम लीग की साम्प्रदायिक नीतियों का विरोध किया,भारत को विभाजित करके पाकिस्तान के निर्माण के लिए मुस्लिम लीग की मांग के खिलाफ थे। इनके खिलाफ उन्होंने मोमिन आंदोलन शुरू किया। इस बेनर के तहत उन्होंने पिछड़े मोमिन समुदाय के सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक मुक्ति और उत्थान के लिए काम किया। अब्दुल कय्यूम अंसारी जीवन भर अखिल भारतीय मोमिन सम्मेलन के अध्यक्ष रहे। मोमिन आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया। 1946 में उनकी पार्टी बिहार प्रंतीय विधानसभा में मुस्लिम लीग के खिलाफ चुनाव लड़कर 6 सीटें जीतने में सफल रही। इस प्रकार वे बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह के मंत्रिमंडल में बिहार के मंत्री बनने वाले पहले मोमिन बने। गरीबों और दलितों के एक चैंपियन अब्दुल कय्यूम अंसारी ने शिक्षा और साक्षरता के प्रसार के लिए काम किया और उनकी पहल पर 1953 में भारत सरकार द्वारा पहला अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग आयोग नियुक्त किया गया था। 18 जनवरी 1973 को बिहार के अमियावर गाँव मे डेहरी-आरा नहर के ढहने से गाँव को हुए नुकसान का निरीक्षण करने के दौरान उनकी मौत हुई थी। 1 जुलाई 2005 को, भारत सरकार (या इंडिया पोस्ट) ने उनकी याद में एक डाक टिकट जारी किया।
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