विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दों पर मतदान करेंगे दिल्लीवासी
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। दिल्ली विधानसभा के चुनाव 5 फरवरी को होने जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस पार्टी पूरे जोर शोर से तैयारी में जुटी है। करीब 10 वर्षों से आम आदमी पार्टी ने दिल्ली से भाजपा और कांग्रेस दोनों का सफाया कर दिया है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री की तीखी आलोचना करके उनको कई बार चुनौती देने की कोशिश की है। आप संयोजक केजरीवाल अपनी पार्टी और स्वयं को घोर ईमानदार घोषित करते आए हैं। जबकि भाजपा एवं स्वयं प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह केजरीवाल और उनकी पार्टी को सबसे भ्रष्ट घोषित करने में तुले हुए हैं। विकास के मुद्दों पर भाजपा का पलड़ा कमजोर दिखाई दे रहा है। इसी तरह कांग्रेस पार्टी की चुनावी घोषणाएं अच्छी हैं लेकिन जनता भाजपा और कांग्रेस पार्टी की चुनावी घोषणाओं पर इतना भरोसा नहीं करती है। जितना आम आदमी पार्टी की घोषणाओं पर करती है। चुनावों में दिल्ली के दो बार के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने चुनावों मे जो भी घोषणाएं की उनको पूरा भी करके दिखाया। दिल्ली की जनता को केजरीवाल सरकार ने ही फ्री बिजली, पानी, दवाई एवं शिक्षा उपलब्ध करवाई है। यही कारण है कि सुविधाभोगी दिल्ली की जनता आम आदमी की सरकार चौथी बार बनवाना पसंद करेगी। वैसे भाजपा बड़ी पार्टी है। चुनावों में उलट फेर कैसे किया जाता है, यह भाजपा के कुशल चुनावी रणनीतिकार गृहमंत्री अमित शाह से ज्यादा कोई नहीं जानता। इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि दिल्ली में भाजपा सरकार बन जाए। क्योंकि हरियाणा और महाराष्ट्र प्रदेशों में भी भाजपा की सरकार सर्वेक्षणों में नहीं बन रही थी।
दिल्ली में ध्रुवीकरण नहीं :- दिल्ली में विधानसभा चुनाव में ध्रुवीकरण का माहौल दिखाई नहीं दे रहा है। सभी दिल्लीवासी समझते हैं कि कौन सी पार्टी उनके लिए फायदेमंद है। दिल्ली की जनता पूरे देश में बड़ी होशियार दिखाई देती है। दो वर्षों से लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद करती है तो दूसरी तरफ विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पूरा समर्थन देती है। दिल्ली की जनता दस वर्ष से जिस पार्टी को भी वोट देती है, वही सरकार बनती है। इसलिए कहा जा सकता है कि दिल्ली की जनता किसी का भी समर्थन करेगी, उसी की बहुमत से सरकार बनेगी। दिल्ली में हिंदू मुस्लिम और सांप्रदायिक वातावरण दिखाई नहीं दे रहा है। चुनावी प्रचार, भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दे पर फोकस होता जा रहा है। अब दिल्ली की जनता के ऊपर निर्भर है कि वह किस पार्टी और किस नेता को भ्रष्ट मानती है और किस को ईमानदार मानेगी, यह चुनाव परिणाम से ही पता लग पाएगा।
भाजपा का पूरा जोर केजरीवाल को रोकना है – भाजपा का शीर्ष स्तर चाहता है कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की राजनीति को कमजोर किया जाए। क्योंकि भविष्य में केजरीवाल भाजपा को चुनौती दे सकते हैं, यदि आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतती है। इसलिए भाजपा नेता पूरी कोशिश कर रहे हैं कि दिल्ली में किसी भी तरीके से केजरीवाल सरकार नहीं बने। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने स्वयं चुनाव रैलियों को संबोधित किया है और केजरीवाल सरकार और उनको बड़ा भ्रष्टाचारी बताया है। पंजाब में आप की सरकार है। यदि दिल्ली में फिर से आप सरकार बनती है तो भविष्य में आम आदमी पार्टी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती खड़ी करेगी। गुजरात विधानसभा में आम आदमी पार्टी ने करीब 15% वोट लिए थे। इसलिए भाजपा पूरी कोशिश करेगी कि दिल्ली में इस बार आम आदमी की सरकार रिपीट नहीं हो।
कांग्रेस कर रही है बड़ी चुनावी घोषणाएं – दिल्ली में हासिए पर चल रही कांग्रेस पार्टी ने कई बड़ी चुनावी घोषणाएं की हैं। कांग्रेस ने 8500/- महीना पढ़े लिखे बेरोजगारों को एवं 2500/- रूपए महीने महिलाओं को देने की घोषणा की है। फिर भी ऐसा नहीं लगता है कि कांग्रेस दिल्ली में सरकार बना पाएगी।
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