Loading...

उपलब्धियों से भरा मनमोहन सिंह का पूरा जीवन, आर्थिक सुधारों से बदली भारत की तस्वीर

Jaipur

Follow us

Share

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। उनका पूरा जीवन उपलब्धियों से भरा है। उनकी किताब इंडियाज एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रोस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ सस्टेंड ग्रोथ भारत की व्यापार नीति की पहली और सटीक आलोचना मानी जाती है। डॉ. मनमोहन सिंह भारत के 13 वें प्रधानमंत्री थे। वह एक अर्थशास्त्री भी थे। लोकसभा चुनाव 2009 में मिली जीत के बाद वह जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने, जिन्हें पांच वर्षों का कार्यकाल पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री  बनने का अवसर मिला था। पीवी नरसिंह राव के प्रधानमंत्रित्व काल में वित्त मंत्री के रूप में किए गए आर्थिक सुधारों का श्रेय दिया जाता है। भारत की तस्वीर और तकदीर बदलने वाले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 92 साल की उम्र में गुरुवार को निधन हो गया। वे न सिर्फ भारत के 14वें प्रधानमंत्री थे, बल्कि एक महान अर्थशास्त्री, विद्वान और नेता भी थे। 1991 से 1996 तक वे भारत के वित्त मंत्री भी रहे। आज की युवा पीढ़ी उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में जानती है, लेकिन वित्त मंत्री के तौर पर उन्होंने जो काम किए, वो आज भी भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव हैं। उनके द्वारा किए कुछ बड़े फैसले, जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था और समाज को हमेशा के लिए बदल दिया।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) (2005)

2004 में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने गरीबों और ग्रामीण भारत के विकास पर विशेष ध्यान दिया। 2005 में उन्होंने “राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम” (नरेगा) लागू किया। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हर परिवार को साल में कम से कम 100 दिन मजदूरी की गारंटी दी गई। अगर सरकार 100 दिन का काम नहीं दे पाती थी, तो उसे बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता था। इस योजना से ग्रामीण इलाकों में गरीबी कम हुई और लोगों का शहरों की ओर पलायन भी कम हुआ। बाद में इस योजना का नाम बदलकर “महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम” (मनरेगा) कर दिया गया। यह योजना आज भी ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) (2005)

डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 2005 में “सूचना का अधिकार अधिनियम” (RTI) लागू किया। यह एक क्रांतिकारी कानून था, जिसने आम आदमी को सशक्त बनाया। इस कानून के तहत भारत का कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी मांग सकता है। इससे सरकारी कामों में पारदर्शिता आई और भ्रष्टाचार कम हुआ। सरकारी अधिकारियों को अब पता था कि उनके काम पर जनता की नजर है, इसलिए वे ज्यादा जिम्मेदारी से काम करने लगे।

भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (2008)

डॉ. मनमोहन सिंह ने 2008 में अमेरिका के साथ एक ऐतिहासिक “परमाणु समझौता” किया। इस समझौते को “123 समझौता” भी कहा जाता है। इस समझौते के तहत भारत को अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु तकनीक और ईंधन मिलने का रास्ता खुल गया। भारत ने “परमाणु अप्रसार संधि” (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, फिर भी यह समझौता हुआ। यह डॉ. मनमोहन सिंह की कूटनीतिक सफलता थी। इस समझौते से दुनिया में भारत का कद बढ़ा और भारत को एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता मिली। इस समझौते ने भारत के विकास को नई गति दी।

पंजाब विश्वविद्यालय से उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई पूरी की। बाद में वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए। जहां से उन्होंने पीएचडी की। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी-फिल भी किया। उनकी पुस्तक इंडियाज एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रोस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ सस्टेंड ग्रोथ भारत की व्यापार नीति की पहली और सटीक आलोचना मानी जाती है।

अर्थशास्त्र के शिक्षक के तौर पर मिली ख्याति

डॉ. सिंह ने अर्थशास्त्र के अध्यापक के तौर पर काफी ख्याति अर्जित की। वह पंजाब विश्वविद्यालय और बाद में प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकनामिक्स में प्राध्यापक रहे।  इसी बीच वह संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन सचिवालय में सलाहकार भी रहे और 1987 और 1990 में जेनेवा में साउथ कमीशन में सचिव भी रहे। 1971 में डॉ. सिंह भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किए गए। इसके बाद 1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया।

आरबीआई गवर्नर भी रह चुके

मनमोहन सिंह योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। इसके अलावा रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे। भारत के आर्थिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वह 1991 से 1996 तक भारत के वित्त मंत्री रहे।

योजना आयोग के उपाध्यक्ष और पीएम के आर्थिक सलाहकार भी रहे

1985 में राजीव गांधी के शासन काल में मनमोहन सिंह को योजना आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस पद पर उन्होंने लगातार पांच वर्षों तक कार्य किया, जबकि 1990 में वह प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार  बनाए गए। जब पीवी नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने मनमोहन सिंह को 1991 में अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया और वित्त मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा। इस समय वह न तो लोकसभा और न ही राज्यसभा के सदस्य थे। मगर संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार सरकार के मंत्री को संसद का सदस्य होना आवश्यक होता है। इसलिए उन्हें 1991 में असम से राज्यसभा भेजा गया था।

 

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।