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17 दिन से भूख हड़ताल, 8.5 KG वजन कम और लगातार बिगड़ रही सेहत, फिर भी आंदोलन नहीं छोड़ रहे सोनम वांगचुक

17 दिन से भूख हड़ताल, 8.5 KG वजन कम और लगातार बिगड़ रही सेहत, फिर भी आंदोलन नहीं छोड़ रहे सोनम वांगचुक

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का प्रदर्शन पिछले 24 दिनों से चल रहा है। शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस प्रदर्शन में 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है। सोनम वांगचुक का वजन 8.5 किलोग्राम कम हो गया है। अनशन शुरू होने पर वजन 67 किग्रा था। देश की कई लोकप्रिय हस्तियों ने सीजेपी के प्रदर्शन का समर्थन किया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, एक्टर नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, राइटर अरुंधति रॉय समेत कई प्रमुख हस्तियों ने सोनम से अनशन खत्म करने की अपील की है।

इसी बीच सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने एक्स पर बताया कि अरविंद केजरीवाल ने सोनम वांगचुक का हाल चाल पूछा है और प्रदर्शन का समर्थन दिया है। मंगलवार को आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया और वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की। वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी वांगचुक से अनशन तोड़ने की गुजारिश की और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। इसके अलावा लेखिका अरुंधति रॉय समेत कई जाने माने लोगों ने भी प्रदर्शनकारियों से भूख हड़ताल रोकने की अपील की है। कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा कि सरकार को वांगचुक की कोई चिंता नहीं है। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि वांगचुक की जान को खतरा है। सरकार को मांगों पर ध्यान देना चाहिए।

कई लोकप्रिय हस्तियों ने किया समर्थन

अखिलेश यादव : जिस भाजपा सरकार को वह अपने आमरण अनशन से जगाने की कोशिश कर रहे हैं, वह सिद्धांतहीन और भ्रष्ट व्यवस्था बन चुकी है। इतनी निर्मम सरकार के लिए किसी का भी बलिदान मायने नहीं रखता।

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अरविंद केजरीवाल : मैं 16 जुलाई शाम 5 बजे जंतर-मंतर जाकर सोनम वांगचुक और CJP के प्रदर्शनकारियों से मुलाकात करूंगा और अपना समर्थन दूंगा।

TMC नेता महुआ मोइत्रा : आपके उपवास ने युवाओं को एकजुट कर दिया है। सरकार को आपके या करोड़ों युवाओं के जीवन की परवाह नहीं है। आपका जीवन हमारे लिए मायने रखता है। अनशन बंद करें और लड़ाई जारी रखें।

पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे : हम, शिवसेना की ओर से सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के आंदोलन को सपोर्ट देते हैं। दीपके से फोन पर बात कर सोनम से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है।

ओमी वैद्य : मैं नहीं चाहता कि यह इंसान मर जाए। मेरे लिए वह एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं। मैं चाहता हूं कि वह सुरक्षित रहें और जिंदा रहें।

जीनत अमान : मैं भारत सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील करती हूं। हमें ऐसा समाज नहीं बनना चाहिए, जो चुपचाप बैठकर अपने सबसे अच्छे दिमागों में से एक को बलिदान होते देखता रहे।

सीजेपी प्रमुख ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा कि उनकी मांसपेशियां तेजी से कमजोर हो रही हैं और वह बेहद दर्द में हैं। मैंने भी अन्य लोगों की तरह उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने शांत भाव से कहा-‘मुझसे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए, सरकार से पूछिए कि वह बातचीत क्यों नहीं करना चाहती’।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

बॉलीवुड आमिर खान ने फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में एक शानदार किरदार अदा किया था। इस फिल्म में वो ‘फुंसुक वांगड़ू’ या रैंचो के किरदार में नजर आए थे। जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था। ये किरदार सोनम वांगचुक की जिंदगी से प्रेरित था। सोनम वांगचुक की पहचान शिक्षा सुधारक, इंजीनियर और जलवायु कार्यकर्ता के रूप में है। उनका जन्म लद्दाख में 1 सितंबर 1966 को हुआ था। 59 वर्षीय सोनम कृत्रिम ग्लेशियर ‘आइस स्तूप’ के आविष्कार के लिए सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे हैं। इसके जरिए हिमालय और पहाड़ों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पानी की किल्लत दूर होती है।

वांगचुक ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान वांगचुक मैकेनिकल इंजीनियरिंग पढ़ना चाहते थे, जबकि उनके पिता चाहते थे कि वह सिविल इंजीनियरिंग करें। इसी वजह से उन्हें कुछ समय के लिए घर छोड़ना पड़ा। साइंस और मैथ्स की अपनी जानकारी से उन्होंने लेह का पहला कोचिंग सेंटर शुरू किया था। इसके बाद उनका अनुभव बढ़ा कि कई होनहार छात्र इसलिए फेल हो रहे थे क्योंकि उनमें काबिलियत की कमी नहीं थी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था उन्हें सपोर्ट करने के लिए नहीं बनी थी।

सौर ऊर्जा पर चलने वाला स्कूल बनाया

साल 1988 में सोनम ने ‘स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख’ (SECMOL) की शुरुआत की थी। खास बात ये है कि ये स्कूल पूरी तरह से सिर्फ सौर ऊर्जा पर ही चलता है। यहां स्टूडेंट्स को व्यावसायिक, सामाजिक और व्यावहारिक स्किल के बारे में भी सिखाया जाता है। सोनम को उनके सराहनीय कार्यों के लिए साल 2018 में रमन मैगसेसे पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

170 दिन जोधपुर जेल में रहे सोनम वांगचुक

बता दें कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक 170 दिन तक जोधपुर जेल में रहे। उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए। सरकार ने हिंसा भड़काने का आरोप वांगचुक पर लगाया। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया।

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