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18 प्रसूताओं की मौत, स्वास्थ्य मंत्री के चेहरे पर हंसी! सवालों के जवाब में बोले- ‘मिलते हैं ब्रेक के बाद’

18 प्रसूताओं की मौत, स्वास्थ्य मंत्री के चेहरे पर हंसी! सवालों के जवाब में बोले- ‘मिलते हैं ब्रेक के बाद’

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जयपुर। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने पूरे प्रदेश को चिंतित कर दिया है। अब तक 18 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 50 महिलाओं के बीमार होने की जानकारी सामने आई है। प्रसूताओं की हो रही मौतों का गंभीर और संवेदनशील मामला पूरे प्रदेश में गरमाया हुआ है। इस गंभीर मामले के बीच स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का एक बयान नया विवाद खड़ा कर गया है।

तीन घंटे चली बैठक?

दरअसल, सोमवार को जयपुर में स्वास्थ्य मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब तीन घंटे तक समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने विभिन्न संभावित कारणों का जिक्र किया। कभी डिहाइड्रेशन, कभी किडनी फेलियर और अन्य चिकित्सकीय जटिलताओं की बात कही, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि लगातार हो रही मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है और अब तक किसी स्तर पर जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई।

सवालों के बीच उठे और बोले- ‘ब्रेक के बाद’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकार लगातार मौतों, जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल पूछते रहे। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्री अपनी सीट से उठे और मुस्कुराते हुए कहा, “बाकी बातें ब्रेक के बाद करेंगे।” संवेदनशील मामले में दिए गए इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। विपक्ष ने इसे सरकार की असंवेदनशीलता बताते हुए सवाल उठाए हैं कि जब माताओं की मौत हो रही है, तब सरकार गंभीर जवाब देने के बजाय हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया क्यों दे रही है।

लगातार बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में ही बांसवाड़ा में पांच और भीलवाड़ा में चार प्रसूताओं की मौत हुई है। इससे पहले कोटा, बीकानेर और जोधपुर में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। इन सभी घटनाओं को मिलाकर मृतकों की संख्या 18 तक पहुंच गई है, जबकि लगभग 50 महिलाओं के बीमार होने की सूचना है।

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क्या ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बन रहा कारण?

जांच के दौरान ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के एक बैच को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई थी कि संबंधित बैच में दवा की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी। हालांकि सरकार ने अभी तक किसी भी मामले में अंतिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है और न ही किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है।

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