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राम मंदिर चोरी मामला: एक व्यक्ति करता था चोरी! उसे घेर कर खड़े होते थे बाकी लोग, फिर शुरू होता था असली खेल

राम मंदिर चोरी मामला: एक व्यक्ति करता था चोरी!  उसे घेर कर खड़े होते थे बाकी लोग, फिर शुरू होता था असली खेल

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Ram Mandir Theft Case : अयोध्या। उत्तरप्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस व एसआईटी लगातार जांच कर रही है। पुलिस टीम ने मामले में जेल में बंद आरोपी अविनाश शुक्ला के अयोध्या स्थित योग केंद्र से एक संदूक बरामद किया है। जिस पर लाल रंग से ‘राम राज्य कोष’ प्रशासन लिखा है और ऑनलाइन दान के लिए QR/बारकोड भी लगा हुआ है। 28 जून को हुई इस छापेमारी का वीडियो बुधवार सुबह सामने आया।

इस बीच पुलिस टीम ने मामले में जेल में बंद आरोपी लवकुश मिश्रा के रुदौली के घर और करुणेश पांडेय के खंडासा वाले घर पर छापेमारी की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई रकम बरामद करने और संपत्ति के दस्तावेज एकत्र करने के लिए की गई है। इसके पहले, पुलिस ने कोर्ट की अनुमति के बाद मंगलवार को फैजाबाद जेल में बंद राम मंदिर चढ़ावा चोरी के सभी आठों आरोपियों से करीब दो घंटे पूछताछ की। सबसे लंबी पूछताछ अविनाश से हुई। दो घंटे चली पूछताछ में 5 जून को बरामद 20 लाख नकद और गहनों को लेकर सवाल-जवाब किए गए। आरोपियों ने करोड़ों की चोरी स्वीकारते हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में भी बताया। इस दौरान ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया। जिसमें बताया गया कि दान राशि की गणना संबंधी प्रक्रिया में अनिल मिश्रा की प्रमुख भूमिका रहती थी।

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में सबसे अधिक बरामदगी अविनाश के पास से हुई थी, इसलिए उससे लंबी पूछताछ की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस की पूछताछ में पता चला कि टिन्नू यादव के पास गणना कक्ष की चाबी रहती थी। दूसरी चाबी बैंक कर्मियों के पास होती थी। इन सभी की मिलीभगत से रकम पार की जाती थी। टिन्नू व बैंककर्मी चोरी की रकम में हिस्सा लेते थे।

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एक आदमी करता था चोरी, बाकी उसे घेर कर खड़े होते थे

आरोपियों ने बताया कि टिन्नू की मिलीभगत होने से चोरी आसानी से होती थी। कोई भी सवाल करने वाला नहीं रहता था। उनको पता था कि कैमरे कहां-कहां लगे हैं। इसलिए कैमरे से बचकर चोरी को अंजाम देते थे। कैमरे की नजर से बचने के लिए एक आदमी रकम पार करता था और बाकी लोग उसे घेर लेते थे। फिर रकम बाथरूम में छिपाते थे और मौका पाकर बाहर ले जाते थे। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के करीबी होने की वजह से उनकी कहीं पर कोई चेकिंग नहीं होती थी।

400 निजी सुरक्षाकर्मी भी जांच के घेरे में

राम मंदिर परिसर में तैनात 400 निजी सुरक्षाकर्मी भी जांच के घेरे में हैं। उनकी ड्यूटी, रोस्टर, CCTV, एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा जिस निजी सुरक्षा कंपनी के पास था, वह बिहार के पूर्व सांसद की है। ट्रस्ट इस पर हर महीने 1 करोड़ खर्च करता था। यानी निजी सुरक्षा पर सालाना 12 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे थे।

7 जून को सामने आया मामला

चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। यूपी सरकार ने 13 जून को SIT बनाई। 25 जून को FIR हुई। रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी दिन मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया।

आरोपियों ने कहा…जमीन मकान में लगाया पैसा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का आरोपी अविनाश शुक्ला महेशगंज थाना क्षेत्र के बाबूपुर नारियावा का रहने वाला है। पिता राम सजीवन शुक्ला किसान हैं। पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर है। बड़ा भाई अभिषेक अयोध्या में टीचर है। अविनाश का पैतृक मकान कच्चा है, जहां उसके पिता और मां मिथिलेश देवी रहते हैं। कुछ महीने पहले अविनाश और अभिषेक ने नया पक्का मकान बनवाया था। दोनों भाई जब गांव आते थे, तो उसी मकान में रहते थे। सूत्रों के मुताबिक चोरी की रकम के इस्तेमाल पर आरोपियों ने जमीन व मकान में रकम खपाने की बात कबूली। ये उम्मीद नहीं थी कि पूरा खेल इतनी जल्द खुल जाएगा।

चंपत, अनिल और गोपाल राव को दोषी मान सकती है SIT

यदि इस्तीफा मंजूर न हुआ तो भी चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा की मुश्कलें बढ़ सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) अपनी फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय के साथ अनिल मिश्र और गोपाल राव को भी दोषी मान सकती है। जांच में सामने आया कि इन लोगों ने अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से नहीं निभाया। सूत्रों के अनुसार, SIT की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के खिलाफ FIR होना तय है।

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