Loading...

NCERT का नया सिलेबस, 9वीं की किताब से संविधान प्रस्तावना गायब और ‘इमरजेंसी’ की एंट्री, विपक्षी दलों ने बोला हमला

NCERT का नया सिलेबस, 9वीं की किताब से संविधान प्रस्तावना गायब और ‘इमरजेंसी’ की एंट्री, विपक्षी दलों ने बोला हमला

Follow us

Share

NCERT Class 9 Book Changes 2026 नई दिल्ली। एनसीईआरटी (NCERT Book) की किताबों और सिलेबस में किया गया बदलाव सुर्खियों में हैं। कक्षा 9वीं की किताब में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। कक्षा 9 वीं की सोशल साइंस की किताब लोकतांत्रिक राजनीति-1 (Democratic Politics-I) से प्रस्तावना और सेकुलर का जिक्र हटा दिया गया है। वहीं नए सिलेबस में नया चैप्टर जोड़ कर विद्यार्थियों को इमरजेंसी का इतिहास पढ़ाया जाएगा। इससे पहले यह विषय सिर्फ कक्षा 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की किताब में था। बदलाव के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे लेकर भाजपा पर हमला बोला है और इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया। वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे पूरी तरह सही कदम बताया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ जहां किताब में आपातकाल का नया टॉपिक जोड़ा गया है, वहीं दूसरी तरफ किताब के कुछ हिस्सों से संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और ‘सेकुलरिज्म’ (धर्मनिरपेक्षता) से जुड़े कुछ पुराने रेफरेंस को हटाए जाने की बात सामने आई है। इस बदलाव के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। एनसीईआरटी के इस कदम को लेकर शिक्षाविदों और एक्सपर्ट्स के बीच अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।

1975 की इमरजेंसी का टॉपिक क्यों जोड़ा गया?

देश में आपातकाल लागू होने के 50 साल पूरे होने के बाद NCERT ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में इस दौर को शामिल किया है। नई पुस्तक Understanding Society: India and Beyond में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। किताब में बताया गया है कि कैसे 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी। इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार स्थगित कर दिए गए थे, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई थी और कई विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। बोर्ड का मानना है कि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की सही जानकारी होनी चाहिए।

Advertisement

पहले की किताब में क्या था?

पहले कक्षा 9 की पुस्तक ‘डेमोक्रेटिक पॉलिटिक्स-1’ में ‘संवैधानिक व्यवस्था’ नाम से एक चैप्टर था। इसमें संविधान की प्रस्तावना को संवैधानिक मूल्यों का आधार बताया गया था। छात्रों को समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य जैसे शब्दों का अर्थ पढ़ाया जाता था। पुस्तक में प्रस्तावना को “लोकतंत्र पर लिखी गई कविता” बताया गया था और पंथनिरपेक्षता का अर्थ यह समझाया गया था कि राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं होता तथा सभी धर्मों को समान सम्मान दिया जाता है।

नई किताब में क्या किया बदलाव?

इस नए बदलाव में जो बात सबसे ज्यादा चर्चा बटोर रही है, वो है किताब के कुछ हिस्सों से संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का हटना। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले किताब के शुरुआती पन्नों और कुछ चैप्टर्स के साथ ‘प्रस्तावना’ को प्रमुखता से छापा जाता था, जिसमें ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी) और ‘सेकुलर’ (धर्मनिरपेक्ष) जैसे शब्द शामिल थे। नए वर्जन में इस खास रेफरेंस को कम किया गया है या कुछ जगहों से पूरी तरह हटा दिया गया है, इसके अलावा, धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा और उसके महत्व से जुड़े कुछ पैराग्राफ्स में भी कांट-छांट की गई है।

25 जून को आपातकाल के 50 साल पूरे

बता दें कि यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब हाल ही में आपातकाल के 50 साल पूरे हुए हैं। केंद्र सरकार ने 2 साल पहले 25 जून को हर साल “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की थी। पूरे मामले पर बहस शुरू होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि आपातकाल के काले इतिहास को पढ़ाया जाना सही है। उन्होंने कहा, ‘एनसीईआरटी ने सही काम किया है। आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल के काले अध्याय को जानना और समझना चाहिए।’ हालांकि इस संबंध में एनसीईआरटी ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

विपक्षी दलों ने बोला हमला

एनसीईआरटी के इस फैसले पर विपक्ष ने सवाल उठाए है। कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, ‘जैसा कि मैंने कहा, भाजपा की सिर्फ एक ही नीति और एक ही सोच है कि लोगों के मन में भ्रम कैसे पैदा किया जाए और उनका ध्यान कैसे भटकाया जाए। आज हर युवा देश के लिए काम करना चाहता है और अच्छी शिक्षा चाहता है, लेकिन भाजपा इतनी संकीर्ण सोच वाली पार्टी है कि बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में भी राजनीति कर रही है। कांग्रेस ने कई दशकों तक शासन किया, लेकिन कभी बच्चों के भविष्य के साथ राजनीति नहीं की। देश के इतिहास में यह पहली सरकार है जो युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और उनके साथ अन्याय कर रही है।’

संजय राउत ने भी उठाए सवाल

शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, ‘पिछले 12 वर्षों में इस देश में जो स्थिति रही है, उस पर भी चर्चा होनी चाहिए। इंदिरा गांधी ने किसी राजनीतिक दल को नहीं तोड़ा और न ही संविधान को समाप्त किया। आपातकाल केवल पढ़ाई का विषय नहीं है, बल्कि संविधान में इसका प्रावधान भी है। यदि देश में अराजकता फैलती है तो संविधान प्रधानमंत्री को आपातकाल लगाने का अधिकार देता है। इसका मतलब यह नहीं कि संविधान का सम्मान न किया जाए। मैं पूछना चाहता हूं कि नोटबंदी क्यों लागू की गई? कोविड-19 महामारी के दौरान इतने कड़े प्रतिबंध और आपातकाल जैसी व्यवस्थाएं क्यों लागू की गईं? ये सभी कदम संविधान और कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों के आधार पर उठाए गए थे, लेकिन आज जो लोग संविधान की बात करते हैं, वे उसकी मूल भावना का सम्मान नहीं करते।’

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।