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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला : चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा… क्या नृपेंद्र मिश्र बनेंगे ट्रस्ट के CEO!

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला : चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा… क्या नृपेंद्र मिश्र बनेंगे ट्रस्ट के CEO!

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अयोध्या। उत्तप्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख का असर साफ देखने को मिला है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को इस्तीफा सौंपा। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में कठोर संस्तुति के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया। एसआईटी की सिफारिश पर मामले में पहली एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है। इस्तीफों को जांच में हुई कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।

राम मंदिर के सबसे पावरफुल शख्स थे चंपत राय

सूत्रों के मुताबिक, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर की व्यवस्था से बाहर कर दिया गया है। चंपत राय राम मंदिर के सबसे पावरफुल शख्स थे। पूरे मंदिर की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी। राय के बाद ट्रस्टी अनिल और गोपाल राव की मंदिर व्यवस्था में बड़ी भूमिका थी। एक हफ्ते पहले सीएम योगी अयोध्या दौरे पर गए थे। उस कार्यक्रम से चंपत राय को दूर रखा गया था, तभी से यह सुगबुगाहट थी कि चंपत राय हटाए जा सकते हैं।

नृपेंद्र मिश्र बन सकते हैं ट्रस्ट के CEO

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्र को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि रामजन्मभूमि परिसर में मंदिरों का निर्माण पूरा हो जाने के कारण उनका मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म हो रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट में SIT ने किसी प्रशासकीय अधिकारी को सीईओ बनाने की संस्तुति की है। ऐसे में माना जा रहा कि केंद्र सरकार के स्तर से उन्हें सीईओ बनाया जा सकता है। नृपेंद्र मिश्र, गठन के समय से ही ट्रस्ट के सदस्य हैं। उनके निर्देशन में ही पूरा निर्माण हुआ है। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सलाहकार और पीएमओ में प्रमुख सचिव भी रहे हैं।

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चंपत के ड्राइवर टिन्नू समेत 8 गिरफ्तार

बता दें कि चढ़ावा गबन मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है और जांच जारी है। बता दें कि गुरुवार से ही चंपत राय के इस्तीफे की चर्चा थी। वहीं, कल रात चढ़ावा चोरी के मामले में अब तक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस शुक्रवार को सभी को कोर्ट में पेश करेगी। इससे पहले, गुरुवार देर शाम ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली FIR दर्ज कराई। इसमें चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा समेत अन्य बड़े पदाधिकारियों के नाम नहीं हैं।

पहले गिरफ्तार आठों आरोपियों को जेल भेजने की तैयारी

चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नामजद आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की तैयारी है, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। मामले में दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस जांच तेज कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार जांच में एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट को भी शामिल किया जाएगा, ताकि सभी तथ्यों का समग्र परीक्षण हो सके। उधर, विपक्षी दल एफआईआर में किसी बड़े पदाधिकारी का नाम शामिल न किए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं और जांच की निष्पक्षता पर आरोप लगा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जारी है।

चढ़ावा चोरी के खुलासे के 19 दिन बाद हुई FIR

इसके पहले, चढ़ावा चोरी के खुलासे के 19 दिन बाद और जांच के लिए गठित एसआईटी की सिफारिश के दो दिन बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा के अलावा गणना कर्मी मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव और कई अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई गई। सभी पर साजिश के तहत धोखाधड़ी कर चढ़ावा राशि चोरी करने का आरोप है। जिसके बाद आठों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

कैसे खुली राम मंदिर चोरी की पोल

बताया जा रहा है कि सेवादारों को मंदिर में सालों से चल रहे गबन की जानकारी थी। इसमें बड़े लोगों के नाम होने के कारण वे कुछ बोल नहीं रहे थे। पिछले 2 सालों में टिन्नू का दबदबा बढ़ा तो मंदिर में काम करने वाले एक गुट को यह चुभने लगा। इस गुट ने प्लानिंग बनाकर उससे करीबी बढ़ाई। फिर सभी तथ्य पता कर इसकी जानकारी मीडिया तक पहुंचा दी।

जांच में ये हैं मुख्य आरोपी, जानें कौन क्या करता था?

1-रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू : ये चंपत राय का करीबी है। मंदिर की हर व्यवस्था में हस्ताक्षेप रहता था। गणना प्रक्रिया की देखरेख भी करता था। गणना कक्ष की चाबी इसके पास रहती थी। ये घटना का अहम किरदार है।

2- लवकुश मिश्रा : ये अनिल मिश्र का रिश्तेदार है। अनुकल्प का साला है। इसकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी। इसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी।

3- अनुकल्प मिश्रा : ये लवकुश मिश्रा का जीजा है। अनिल मिश्र का रिश्तेदार है। इसकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी। इसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी।

4- मनीष यादव : ये टिन्नू यादव का भतीजा है। गणना प्रक्रिया में ये शामिल रहता था। इसके पास से भी चोरी की रकम बरामद हुई थी।

5 – अविनाश शुक्ला : ये भी ड्यूटी गणना में लगती थी। इसके बैंक खाते से पांच लाख रुपये बरामद होने की चर्चा थी।

6- सुभाष श्रीवास्तव : ये गणना इंचार्ज था। गणना की पूरी प्रक्रिया इसकी निगरानी में होती थी।

7- करुणेश पांडेय : अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल रहे।

8- रमाशंकर मिश्र : अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल रहे।

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