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फिरदौस मस्जिद विवाद थमा नहीं, अब मक्का मस्जिद के मदरसा तालीमुल कुरान पर कब्जे का आरोप

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फिरदौस मस्जिद विवाद थमा नहीं, अब मक्का मस्जिद के मदरसा तालीमुल कुरान पर कब्जे का आरोप

मक्का मस्जिद बंदा बस्ती के मदरसा तालीमुल कुरान पर कब्जे के आरोप

जावेद अख्तर

जयपुर (रॉयल पत्रिका) I जयपुर के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र के नहरी का नाका, बंदा बस्ती स्थित मक्का मस्जिद के पास बने मदरसा तालीमुल कुरान को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि यह मदरसा इलाके के बच्चों को दीनी तालीम देने के लिए बनाया गया था, लेकिन पिछले कई वर्षों से यहां पढ़ाई लगभग बंद पड़ी है।

मदरसे की जमीन पर कब्जे के आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मदरसे के पास की जमीन पर पूर्व पार्षद के भाई लियाकत अली पठान और मोहसिन पठान (मोसिन टेंट वाला) ने कब्जा कर रखा है। बताया जाता है कि यहां टेंट का सामान रखा जाता है और उसी जगह का इस्तेमाल शादी-समारोह के लिए किया जा रहा है। हर शादी से करीब 7 हजार रुपये लिए जाने की बात सामने आ रही है।

आमदनी के हिसाब को लेकर उठे सवाल

इलाके के लोगों का कहना है कि अगर साल में औसतन करीब 30 शादियां होती हैं और एक शादी से लगभग 7 हजार रुपये लिए जाते हैं, तो एक साल में करीब 2 लाख 10 हजार रुपये की आमदनी बनती है। लोगों के अनुसार मदरसा बंद हुए करीब 10 साल से अधिक समय हो चुका है। ऐसे में अनुमान के अनुसार करीब 20 लाख रुपये से ज्यादा की रकम बनती है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यह पैसा आखिर कहां गया और इसका हिसाब किसके पास है।

पहले भी उठी थी आवाज, हमला होने का आरोप

स्थानीय लोगों के अनुसार इससे पहले भी नाजिम नाम के युवक ने इस मुद्दे को उठाया था। आरोप है कि उस समय करीब 30–35 लोगों ने उसके घर पर हमला कर दिया था, जिसके बाद इलाके में डर का माहौल बन गया था।

मदरसे की कमेटी और प्रबंधन पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले मदरसे की देखरेख मुफ्ती वाजिद साहब करते थे, लेकिन बाद में उन पर आरोप लगाकर उन्हें हटा दिया गया। इसके बाद अलग-अलग समय में बनी कमेटियों के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि मदरसे से जुड़ी आमदनी और प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता की जरूरत है।

मदरसा बंद, इमारत भी जर्जर हालत में

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मस्जिद और मदरसे की जो तामीर पहले हुई थी, उसके बाद यहां कोई खास विकास कार्य नहीं हुआ। इमारत आज भी लगभग उसी हालत में है और कई जगह खिड़कियां व दरवाजे टूटे हुए बताए जा रहे हैं।

स्थानीय युवक ने उठाई आवाज 

मामले को लेकर आवाज उठाने वाले स्थानीय युवक सद्दाम मसूरी ने बताया कि वह इसी इलाके का रहने वाला है और बचपन से ही मदरसा तालीमुल कुरान से जुड़ा रहा है। उसके अनुसार यह मदरसा इलाके के बच्चों को दीनी तालीम देने के लिए बनाया गया था और एक समय यहां अच्छी संख्या में बच्चे पढ़ते थे। सद्दाम के मुताबिक यहां लड़कों के लिए हिफ्ज़ की तालीम होती थी और हर साल करीब 8–9 लड़के हाफिज बनकर निकलते थे। वहीं लड़कियों के लिए भी अलग मदरसा चलता था, जहां हर साल करीब 5–7 लड़कियां आलिमा बनकर अपनी पढ़ाई पूरी करती थीं। सद्दाम का कहना है कि समय के साथ यह सारी गतिविधियां बंद हो गईं और मदरसा लगभग बंद पड़ा है। उनका आरोप है कि मदरसा बंद होने के बाद इलाके के माहौल पर भी असर पड़ा है। उनके मुताबिक अब मोहल्ले में नशे की समस्या बढ़ गई है और कई जगह गांजा और चरस जैसे नशे खुलेआम इस्तेमाल होते दिखाई देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इलाके में पुलिस की गश्त भी बहुत कम होती है। सद्दाम का कहना है कि अगर मदरसा फिर से शुरू हो और बच्चों को तालीम मिले तो इलाके का माहौल बेहतर हो सकता है।

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