इजराईल और अमेरिका की बढ़ेगी चिंता
सलीम अली
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। सीरिया 13 साल के गृह युद्ध के बाद बशर अल असद सरकार के 24 वर्ष लम्बे शासन का तख्ता पलट कर दिया गया। सीरिया का विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) ने सीरिया का शासन अपने नियंत्रण में ले लिया है। सीरिया के प्रमुख एचटीएस विद्रोही गुट ने मोहम्मद अल बशीर को सीरिया का अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। सीरिया में तख्तापलट की रपानीति अबु मोहम्मद अल जुलानी के नेतृत्व में बनाई गई। अबु मोहम्मद अल जुलानी पहले अलकायदा में काम कर चुके है। अलकायदा और तालिबान ने मिलकर अफगानिस्तान में अमेरिका और पश्चिमी देशो से एक लम्बे समय तक भीशण युद्ध किया। तालिबान वर्तमान में अफगानिस्तान पर शासन कर रहा है। विश्व में तालिबान सरकार पहली प्रमुख इस्लामिक सरकार है। जो इस्लामिक मूल्यों की पैरवी करती है। यदि सीरिया में वर्तमान सरकार इस्लामिक शासन स्थापित करती है तो अमेरिका और इजराईल की मुश्किलें बढ़ती जाएंगी। क्योंकि मिडिल ईस्ट में ज्यादातर मुस्लिम देशो में इजराईल और अमेरिका की कठपुतली सरकार है। सिर्फ ईरान और तुर्कीए ही अपने बलबूते पर आगे बढ़ रहे है। सीरिया में यदि इस्लामिक सरकार विकसित होती है तो मुस्लिम देशो में शेखों, राजाओं और सभी शासकों को खतरा पैदा हो जाएगा और इस्लामिक शासन की मांग बढ़ने लगेगी। क्योंकि ज्यादातर मुस्लिम देशो में जनता शासकों की कारगुजारियों से परेषान है। इजराईल का पड़ौसी एवं दोस्त जोर्डन में तख्ता पलट भी हो सकता है। जोर्डन ने फिलिस्तीन एवं लेबनान युद्ध में इजराईल और अमेरिका का साथ दिया है। इजराईल सीरिया में बमबारी कर रहा है और उसके कुछ भागों पर कब्जा भी कर लिया है। फिर भी इजराईल के लिए बशर अल असद की सरकार से ज्यादा खतरा एचटीएस सरकार से रहेगा। क्योंकि बशर अल असद की सरकार लम्बे गृह युद्ध के कारण कमजोर हो गई थी। एचटीएस का साथ तुर्किए दे रहा हैं। एचटीएस यदि इजराईल से आगे संघर्ष करता है तो ईरान भी उसका साथ दे सकता है। ईरान अमेरिकी और इजराईल का विरोधी है और खाडी देशो में अमेरिकी सेनाओं की उपस्थिति का विरोध करता है। इसलिए इजराईल और अमेरिका कोशिश करेंगे कि सीरिया में विद्रोही गुट आपस में उलझे रहें या ईरान से टकराव बढ़ जाए। लेकिन सीरिया में अभी एचटीएस की सरकार बनी है, भविष्य में क्या होगा इसके लिए दो चार महीने इंतजार करना पड़ेगा।
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