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विधायक बालमुकुंद आचार्य ने दरगाह का निर्माण कार्य रुकवाया:

जयपुर

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पुलिस की सतर्कता से टला बड़ा टकराव

क्या है पूरा मामला?

जयपुर। हवा महल विधायक बाबा बालमुकुंद आचार्य ने चांदपोल गेट के पास सब्जी मंडी के पीछे स्थित एक दरगाह में चल रहे निर्माण कार्य को रुकवा दिया है। मौके पर तनाव की स्थिति बन गई, लेकिन पुलिस प्रशासन की सतर्कता के कारण दो समुदायों के बीच संभावित टकराव को टाल दिया गया।

प्रशासन और पुलिस पर दबाव का आरोप

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दरगाह परिसर में हॉल निर्माण का कार्य नगर निगम की स्वीकृति और कानून के दायरे में हो रहा था। इसके बावजूद, सत्ताधारी पार्टी के विधायक होने के कारण नगर निगम और पुलिस प्रशासन बालमुकुंद आचार्य के दबाव में दिखाई दिए और काम रुकवा दिया गया।

किशनपोल विधायक अमीन कागजी के मौके पर पहुंचने के बाद दोनों विधायकों के समर्थक बड़ी संख्या में वहां जमा हो गए। हालांकि, पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए भीड़ को वहां से हटा दिया और शांति कायम की।

विधायक अमीन कागजी का दावा

किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने बताया कि यह दरगाह करीब 100 वर्ष पुरानी है। पहले यहां टीन शेड लगा हुआ था। स्थानीय लोगों की मांग पर उन्होंने अपने विधायक कोटे से यहां हॉल व अन्य निर्माण के लिए 20 लाख रुपए स्वीकृत किए थे।

कागजी ने कहा, “नगर निगम ने निर्माण कार्य की विधिवत स्वीकृति दी है। इसके बावजूद हवा महल विधायक विरोध कर रहे हैं, जबकि यह क्षेत्र उनके विधानसभा में भी नहीं आता। वे जयपुर की गंगा-जमुनी तहज़ीब को बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।”

प्रशासन का रवैया और कानूनी स्थिति

दरगाह परिसर में हो रहा निर्माण कार्य पूरी तरह से वैध बताया जा रहा है:

  • नगर निगम से निर्माण की परमिशन थी।

  • निर्माण के लिए फंड सरकारी (विधायक कोटे से) था।

  • स्थानीय लोगों का कोई विरोध नहीं था।

बावजूद इसके, सत्ताधारी विधायक के हस्तक्षेप के बाद काम रोक दिया गया। हालांकि, पुलिस ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने से बचा लिया, लेकिन विधायक की मनमानी को रोकने में प्रशासन लाचार नजर आया।

धार्मिक तनाव से गौण होते विकास के मुद्दे

बाबा बालमुकुंद आचार्य जयपुर की हवा महल विधानसभा सीट से विधायक हैं। उनके क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल, सड़कें, गंदे नालों की सफाई और युवाओं की बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याएं मौजूद हैं।

आरोप है कि विधायक मूल समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय मंदिर-मस्जिद, दरगाह और मीट की दुकानों जैसे धार्मिक मुद्दों में उलझे रहते हैं। जानकारों का मानना है कि ऐसे विवादों से जयपुर का विकास पीछे छूट रहा है और शहर में डर का माहौल बन रहा है, जो शांतिप्रिय जयपुर वासियों के लिए चिंता का विषय है।

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