ख्वातीन का तालीम याफ्ता होना बहुत जरूरी है: आलिमा नुज़हत फातमा
औरत की तालीम पूरे खानदान की तालीम होती है
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। ख्वाजा नगर अमृतपुरी घाटगेट स्थित मदरसा गुलशन-ए-हुसैन की प्रिंसिपल आलिमा नुज़हत फातमा ने तालीम की अहमियत पर रोशनी डालते हुए समाज को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने औरत को एक तहफ्फुज़ और ऐसी कद्र अता की है कि माँ के कदमों तले जन्नत का दर्जा दिया गया है। इस्लाम ने मर्द और औरत दोनों के लिए इल्म हासिल करना लाज़मी करार दिया है।
माँ: बच्चे की पहली दरस्गाह
आलिमा नुज़हत फातमा ने इल्म-ए-दीन की फजीलत पर जोर देते हुए कहा कि औरत अपने बच्चों की पहली दरस्गाह (स्कूल) होती है।
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मुस्तकबिल का निर्माण: किसी भी बच्चे का भविष्य उसकी माँ द्वारा दी गई परवरिश और प्यार पर निर्भर करता है।
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शिक्षित समाज: अगर माँ तालीम याफ्ता (शिक्षित) होगी, तो औलाद भी साहिबे इल्म और मुहज्जब (सभ्य) होगी, क्योंकि बच्चा सबसे ज्यादा वक्त माँ के साथ गुज़ारता है।
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सफलता का आधार: उन्होंने कहा कि हर कामयाब मर्द के पीछे औरत का हाथ होता है और एक औरत का शिक्षित होना पूरे खानदान को शिक्षित करने के बराबर है।
‘इकरा’ से हुई इस्लाम की शुरुआत
उन्होंने बताया कि हुजूर रहमत-ए-आलम (स.अ.व.) पर सबसे पहले जो लफ्ज़ नाज़िल हुआ, वह था ‘इकरा’ (पढ़)।
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ज्ञान की प्राथमिकता: कुरआन-ए-पाक की पहली वही से साफ है कि अल्लाह ने सबसे पहले जिस चीज़ की तरफ तवज्जो दिलाई, वह पढ़ना-लिखना और तालीम व तरबियत है।
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मुअल्लिम-ए-इंसानियत: अल्लाह ने अपने महबूब (स.अ.व.) को पूरी इंसानियत के लिए शिक्षक बनाकर भेजा।
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सुफ्फाह मदरसा: मस्जिद-ए-नबवी के सेहन में ‘सुफ्फाह’ नाम से पहले मदरसे की बुनियाद रखी गई, जहाँ से इल्म की रोशनी पूरी दुनिया में फैली।
मदरसा गुलशन-ए-हुसैन की नन्ही उपलब्धि
आलिमा नुज़हत फातमा ने गर्व के साथ बताया कि इस साल भी मदरसे की छात्राओं ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
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नन्ही तालेबा: मदरसा गुलशन-ए-हुसैन की सबसे छोटी तालेबा रिदा फातमा (6 वर्ष) ने नाज़िरा कुरआन-ए-पाक मुकम्मल कर मिसाल पेश की है।
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अपील: उन्होंने वालिदैन (माता-पिता) से अपील की कि वे अपनी औलाद को दुनियावी तालीम के साथ-साथ सबसे पहले इस्लाम की बुनियादी और अखलाकी तालीम सिखाएं।
[यहाँ शिक्षित महिलाओं या मदरसे की छात्राओं की प्रतीकात्मक फोटो लगाई जा सकती है]
एक चिंतन: कौम की वर्तमान स्थिति
लेख के अंत में आलिमा नुज़हत फातमा ने कौम की स्थिति पर एक शेर के जरिए गहरा कटाक्ष किया:
हैरत है के तालीम व तरक्की में है पीछे जिस कौम का आगाज़ ही ‘इकरा’ से हुआ था।
निष्कर्ष
शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का नाम नहीं है, बल्कि यह वह रोशनी है जो आने वाली नस्लों के ख्यालात को निखारती है। समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए महिलाओं का शिक्षित होना अनिवार्य है।
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