Loading...

अरब देशों से भारत के संबंध प्रगाढ़ होना जरूरी:

जयपुर

Follow us

Share

बदलता वैश्विक परिदृश्य और भारत की चुनौतियां

मुस्लिम देशों की आर्थिक और तकनीकी प्रगति

विश्व में अरब और मुस्लिम देश आर्थिक और तकनीकी रूप से काफी प्रोग्रेस कर रहे हैं। पश्चिम एशिया के मुस्लिम देश पहले आपस में लड़ते रहते थे, लेकिन अब ज्यादातर देश आपसी मतभेद भुलाकर एक प्लेटफॉर्म पर आने की बात कर रहे हैं।

अमेरिका से बढ़ती दूरियां और नए गठबंधन

पश्चिम एशिया के मुस्लिम देश, जिनके पास पेट्रोल-डीजल का बड़ा भंडार है, वे पहले अमेरिका के आदेश पर ही अपना निर्णय कर पाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। मुस्लिम देश अमेरिका से अलग होने का प्रयास कर रहे हैं और चीन व रूस से अपनी सैन्य एवं व्यापारिक भागीदारी बढ़ा रहे हैं।

  • परमाणु सुरक्षा का महत्व: मुस्लिम देशों का मानना है कि किसी भी देश की सुरक्षा के लिए परमाणु बम होना जरूरी है।

  • पाकिस्तान की भूमिका: इसी कारण से मुस्लिम देश पाकिस्तान से सुरक्षा समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं। सऊदी अरब और तुर्की ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ सैन्य एवं सुरक्षा समझौता किया है।

वैश्विक समीकरणों में बदलाव

विश्व का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और अमेरिका का वर्चस्व घटता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक एवं सुरक्षा नीतियों को विश्व के ज्यादातर देश पसंद नहीं कर रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों का ‘नाटो’ (NATO) सैन्य संगठन अब आंतरिक नीतियों के कारण विघटन की कगार पर है। इसके विपरीत, चीन, रूस और उत्तर कोरिया का गठजोड़ एक नई ताकत के रूप में उभरा है।

पाकिस्तान का रक्षा निर्यात और कूटनीति

पाकिस्तान, चीन और सऊदी अरब के साथ मिलकर अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति सुधारने में लगा है।

  1. जे-17 लड़ाकू विमान: पाकिस्तान ने चीनी तकनीक से जे-17 लड़ाकू विमान बनाए और उन्हें आधा दर्जन मुस्लिम देशों को बेचकर भारी मुनाफा कमाया है।

  2. सैन्य प्रचार: पाकिस्तान ने भारत के साथ हुई सैन्य झड़पों को विश्व में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और खुद को विजेता बताकर हथियार बेचने के बाजार तलाश लिए हैं।

  3. पड़ोसी देशों पर प्रभाव: पाकिस्तान अब बांग्लादेश के साथ भी संबंध बेहतर करने की कोशिश कर रहा है, जिससे भारत और बांग्लादेश के बीच दूरियां पैदा हो रही हैं।

भारत, इजरायल और मुस्लिम देशों का त्रिकोण

भारत और बांग्लादेश के बीच अब धार्मिक आधार पर संबंध तय होने लगे हैं। एक तरफ भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों का विरोध होता है, तो दूसरी तरफ बांग्लादेश की टीम ने भारत में टी-20 विश्व कप खेलने से मना कर दिया।

मोदी सरकार की विदेश नीति

भारत में भाजपा सरकार का नजरिया मुस्लिम देशों के प्रति अलग रहा है। मोदी सरकार ने मुस्लिम देशों की अपेक्षा इजरायल से संबंध मजबूत बनाने को प्राथमिकता दी, जबकि स्वतंत्रता के बाद से ही भारत के मुस्लिम देशों से प्रगाढ़ संबंध थे और कच्चा तेल वहीं से आता था।

आर्थिक मजबूती के लिए अरब देशों का महत्व

इजरायल से बढ़ती नजदीकी के कारण मुस्लिम देश भारत से दूरी बनाने लगे थे, लेकिन अब भारत की ओर से फिर से अरब देशों से संबंध सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 50-60 मुस्लिम देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध फिर से मजबूत होते हैं, तो:

  • देश की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होगी।

  • देश में रोजगार के अवसर तेजी से पैदा होंगे।

आगे की राह

यह निश्चित है कि मुस्लिम देशों और इजरायल के साथ एक साथ बहुत गहरे संबंध रखना चुनौतीपूर्ण है। अब यह भारत सरकार पर निर्भर करता है कि वह इजरायल के साथ जाना चाहती है या खाड़ी के मुस्लिम देशों के साथ अपने पुराने और मजबूत व्यापारिक रिश्तों को प्राथमिकता देती है।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।