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राजस्थान में मतदाता अधिकारों पर गंभीर संकट:

जयपुर

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SIR प्रक्रिया के तहत लाखों नाम हटाने पर कांग्रेस ने जताई चिंता

ड्राफ्ट सूची में बड़ी गड़बड़ी — बिना सत्यापन मतदाताओं को बताया ‘लापता’ और ‘मृत’

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम “अनुपस्थित”, “स्थानांतरित” या “मृत” (ASD Category) श्रेणी में दर्ज कर दिए गए हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव डॉ. मोहम्मद शोएब ने इसे प्रशासनिक चूक के बजाय संवैधानिक मूल्यों पर सीधा आघात बताया है।

जयपुर से जोधपुर तक शिकायतों का अंबार

कांग्रेस द्वारा संकलित आंकड़ों और स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्राफ्ट सूची में लाखों मतदाताओं की स्थिति संदिग्ध रूप से बदली गई है।

  • प्रभावित जिले: जयपुर, अलवर, भरतपुर, कोटा, जोधपुर और सीकर जैसे प्रमुख जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं।

  • बिना सत्यापन कार्रवाई: आरोप है कि बिना पर्याप्त भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के नाम हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई।

  • अजीब विसंगतियां: कई स्थानों पर एक ही परिवार के एक सदस्य का नाम सूची में मौजूद है, जबकि उसी घर में रहने वाले अन्य सदस्यों को “अनुपस्थित” दर्शा दिया गया है।

BLOs ने नहीं किया घर-घर सर्वे?

चिंताजनक तथ्य यह है कि कई मामलों में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन न करने की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी कच्ची बस्तियों (Slums), प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में रहने वाले मतदाता इससे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। साथ ही, आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा और सूचना प्रणाली आम मतदाता तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँच पाई है।

“प्रशासनिक चूक नहीं, संवैधानिक आघात है”

डॉ. मोहम्मद शोएब ने कहा, “लोकतंत्र में मताधिकार नागरिक का मूल अधिकार है। यदि राजस्थान जैसे बड़े राज्य में लाखों मतदाताओं के अधिकार संदेह के घेरे में आ जाएँ, तो यह स्वीकार्य नहीं है।”

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

कांग्रेस ने चुनाव आयोग और प्रशासन से स्पष्ट मांग की है:

  1. राजस्थान में SIR प्रक्रिया की निष्पक्ष पुनर्समीक्षा हो।

  2. आपत्तियां दर्ज कराने के लिए जनता को पर्याप्त समय दिया जाए।

  3. किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे लिखित सूचना दी जाए और सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

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