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राजस्थान में वोटर गायब करने को लेकर राजनीतिक दलों में घमासान

जयपुर

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  • फार्म-7 का भयभीत करने वाला सच सामने आया

  • प्रदेश में मुस्लिमों और दलितों के वोट कटवाने की योजना

  • पहली बार कांग्रेस कार्यकर्ता सक्रिय नजर आए

जयपुर। राजस्थान में आगामी चुनावों से पहले चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया इन दिनों सियासी टकराव का केंद्र बन गई है। मतदाता सूचियों से फार्म-7 के माध्यम से जानबूझकर मतदाताओं के नाम हटवाने को लेकर प्रदेशभर में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी, नेता और कार्यकर्ता आमने-सामने हैं।

दूसरी तरफ जनता में भी फार्म-7 को लेकर डर सामने आने लगा है। लोगों का मानना है कि क्या पता कोई भी साजिश करके, फार्म-7 भर के बीएलओ (BLO) से मिलीभगत करके उनके नाम मतदाता सूची से हटवा दे और उन्हें पता ही नहीं लगे।

फार्म-7 के जरिए वर्तमान पार्षदों, सैकड़ों वर्षों से रह रहे स्थानीय लोगों एवं जाने-पहचाने लोगों के नाम कटवाने की सूचना आ रही है। कहने को तो SIR प्रक्रिया मतदाता सूचियों को साफ-सुथरा करने एवं अनावश्यक मतदाताओं (जो मर गए हैं या जगह बदलकर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं) के नाम हटवाने को लेकर की जा रही है। लेकिन जो मौजूदा स्थिति सामने आ रही है, उसके अनुसार इस प्रक्रिया में विरोधियों, मुस्लिमों एवं दलितों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो निर्वाचन आयोग की मिलीभगत और नाकामी को दर्शाती है। मतदाता सूचियों में धांधली सरासर लोकतंत्र पर हमला है।

फार्म-7 क्या है और किसके अधिकार में है?

फार्म-7 वह आवेदन है जो मतदाता सूची (Electoral Roll) के ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद किसी मतदाता के नाम को हटाने के लिए भरा जाता है। इस फॉर्म का उद्देश्य है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने या फिर किसी दूसरी जगह शिफ्ट होने पर नाम काटने के लिए आवेदन किया जाए।

फार्म-7 को कोई भी व्यक्ति, जिसके नाम पर आपत्ति हो, सेल्फ ऑब्जेक्टर के रूप में फॉर्म भर सकता है। बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी आवेदनों को एक दिन में नियम के अनुसार जमा कर सकता है। साथ ही पार्टियों के एजेंट भी फॉर्म जमा कर सकते हैं। इलेक्शन कमीशन के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के हस्ताक्षर आम तौर पर आवश्यक होते हैं ताकि यह पुष्टि हो सके कि आवेदन स्थानीय स्तर पर सत्यापित किया गया है। BLO और BLA को कई नियमों के तहत ही फॉर्म जमा करना होता है और सामान्य प्रक्रिया में एक दिन में सीमित संख्या में आवेदन ही मान्य माने जाते हैं। अधिक आवेदन पर ECI के सख्त निर्देशों के तहत जांच होती है।

प्रदेश में दलित और मुस्लिमों के वोट कटवाने की योजना

जैसी सूचनाएं आ रही हैं और कांग्रेस नेता टीकाराम जूली और रफीक खान का आरोप है कि भाजपा SIR और फार्म-7 के जरिए बड़ी संख्या में दलित और मुस्लिम मतदाताओं को मतदाता सूचियों से हटाने की साजिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा जानती है कि दलित और मुस्लिम भाजपा को वोट नहीं देते हैं, इसलिए दलित और मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से साजिश करके हटवाये जा रहे हैं।

जयपुर सहित विभिन्न जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग से शिकायत की है कि बड़ी संख्या में BLO से मिलीभगत और दबाव बनाकर भाजपा नेता और कार्यकर्ता विरोधी पार्टियों के लोगों के नाम फार्म-7 भरकर हटवाने की साजिश कर रहे हैं। जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्होंने ऐसे नाम हटवाने की अनुशंसा की है जो या तो वहां रहते नहीं हैं या फिर वे घुसपैठिए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस बीजेपी पर झूठा आरोप लगा रही है।

पहली बार कांग्रेस कार्यकर्ता फील्ड में सक्रिय नजर आए

राजस्थान प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सबसे ज्यादा आलसी, निष्क्रिय एवं ‘इच्छाओं का बादशाह’ माना जाता है। कांग्रेस पार्टी ने देश एवं प्रदेश में एक लंबे समय तक शासन किया है। कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता अक्सर घर या ऑफिस में बैठकर चुनाव जीत कर नगर निगम, विधानसभा और संसद में जाना चाहते हैं।

दूसरी तरफ, भाजपा के नेता और कार्यकर्ता बूथ से लेकर संसद तक सक्रिय नजर आते हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं की बूथ के प्रत्येक कार्यकर्ता तक पहुंच रहती है, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता आमतौर पर केवल चुनाव के समय फील्ड में नजर आने लगते हैं। कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की पूछ नहीं होती है; वहां अक्सर सिर्फ पैसा खर्च करने वाला ही टिकट प्राप्त कर सकता है।

लेकिन इस बार ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता SIR और मतदाता सूचियों को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाने का काम एक लंबे समय से हो रहा है, लेकिन तब कांग्रेस कार्यकर्ता सो रहे थे और अब वे जाग रहे हैं, यानी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। किसी भी पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ता होना भविष्य मजबूत होने की ओर संकेत है।

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